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केंद्र के साथ नगा शांति समझौते को अंतिम रूप देने में बाधा बन रहा रूपरेखा समझौता

नगा शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) के मध्य 2015 का रूपरेखा समझौता अब दोनों पक्षों के बीच एक समझौते तक पहुँचने और लंबे समय से चले आ रहे नगा मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने में महत्वपूर्ण बाधा बन रहा है।

सरकार के सूत्रों ने कहा कि अन्य सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है। संप्रभुता के मुद्दे पर सरकार के साथ वार्ता करने वाले प्रमुख नगा समूह एनएससीएन (आईएम) द्वारा रूपरेखा समझौते (एफए) की व्याख्या को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को रोक दिया गया है।

सरकार के एक सूत्र ने कहा, “संप्रभु शक्ति को साझा करने पर कुछ खंड हैं, जिसका नगा समूह के अनुसार अर्थ है कि हम अलग हैं, वे इस बात पर बल देते हैं कि अंतर बनाए रखा जाना चाहिए।” एनएससीएन अब तर्क देता है कि एफए (अगस्त 2015 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति पर हस्ताक्षर किए गए) के अनुसार, इसकी संप्रभुता को बनाए रखना होगा और कोई भी अंतिम समझौता दो संप्रभु शक्तियों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए होना चाहिए।”

एनएससीएन (आईएम) का तर्क है कि ‘संप्रभु शक्ति को साझा करने’ और ‘दो सत्ता के सह-अस्तित्व’ के विचार का अर्थ है कि नगा लोग अपने स्वयं के राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के दावेदार होंगे।