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केंद्र सरकार के निशाने पर अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट व अन्य ई-कॉमर्स मंचों पर झूठी समीक्षा

ऑनलाइन सेवाओं या उत्पादों को खरीदने हेतु उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले ई-कॉमर्स मंच पर झूठी समीक्षाओं की भयावहता का आकलन और आगे का रोडमैप तैयार करने के लिए भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् (एएससीआई) के सहयोग से केंद्र के उपभोक्ता मामले का विभाग (डीओसीए) शुक्रवार (27 मई) को विभिन्न हितधारकों के साथ एक आभासी बैठक करेगा।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में गुरुवार (26 मई) को बताया गया कि चर्चा मोटे तौर पर उपभोक्ताओं पर झूठी और भ्रामक समीक्षाओं के प्रभाव और इस तरह की विसंगति को रोकने के संभावित उपायों पर आधारित होगी।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इस संबंध में उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने सभी हितधारकों ई-कॉमर्स संस्थाएँ जैसे फ्लिपकार्ट, अमेज़ॉन, टाटा संस, रिलायंस रिटेल और अन्य के अतिरिक्त उपभोक्ता मंच, कानून विश्वविद्यालय, वकील, फिक्की, सीआईआई, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता आदि को बैठक में सम्मिलित होने के लिए लिखा है।

पत्र के साथ उन्होंने यूरोपीय आयोग की 20 जनवरी 2022 की एक प्रेस विज्ञप्ति भी साझा की, जिसमें 223 प्रमुख वेबसाइटों पर ऑनलाइन उपभोक्ता समीक्षाओं पर यूरोपीय संघ-व्यापी स्क्रीनिंग के परिणामों पर प्रकाश डाला गया है।

स्क्रीनिंग के परिणाम रेखांकित करते हैं कि कम से कम 55 प्रतिशत वेबसाइटें यूरोपीय संघ के अनुचित वाणिज्यिक व्यवहार निर्देश का उल्लंघन करती हैं, जिसके लिए उपभोक्ताओं को एक सूचित विकल्प बनाने के लिए सच्ची जानकारी प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है।

पत्र में कहा गया, “ई-कॉमर्स में उत्पाद को भौतिक रूप से देखे व जाँचे बिना उपभोक्ता उपयोगकर्ताओं की राय और अनुभव देखने के लिए उस मंच पर डाली गईं समीक्षाओं को बहुत ध्यान से देखता है, जिन्होंने पहले सामान या सेवा का उपयोग किया हो। परिणामस्वरूप झूठी और भ्रामक समीक्षाओं की वजह से सूचना का अधिकार, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत एक उपभोक्ता का अधिकार है, उसका उल्लंघन होता है।”