रक्षा
नकली नोटों के रैकेट को पकड़ने के लिए बांग्लादेश में एनआईए करेगी जाँच

पाकिस्तान से बांग्लादेश और वहाँ से बंगाल आ रहे नकली भारतीय नोटों की तस्करी के रैकेट को पकड़ने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) बांग्लादेश में जाँच आरंभ करेगी। दिल्ली से एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वराज्य को फोन पर बताया कि मामला दर्ज किया जा चुका है और शीघ्र ही जाँच दल ढाका पहुँचेगा।

पता चला है कि बांग्लादेश एनआईए जाँच के लिए तैयार है और पूरे सहयोग का आश्वासन भारत सरकार को दिया है। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस ने हाल ही में पाकिस्तानियों द्वारा चलाए जा रहे एक सेल का भंडाफोड़ किया था जो जाली भारतीय नोटों की तस्करी पाकिस्तान से बांग्लादेश और फिर वहाँ से बंगाल में कर रहा था।

46 लाख रुपये से अधिक के नकली नोट मिले थे और पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिनमें से दो पाकिस्तानी नागरिक हैं। एनआईए अपनी जाँच की शुरुआत इन गिरफ्तार लोगों की पूछताछ से करेगी। चिंता की बात यह है कि जो ₹500 और ₹2,000 के नोट मिले हैं, वे बहुत अच्छे से जाली किए गए हैं एवं उनकी पहचान कर पाना कठिन है।

“जाली नोट वास्तविक से काफी मेल खाते हैं और सामान्य लोग तो क्या, बैंक के कैशियरों का भी उन्हें पकड़ पाना कठिन है। लगता है कि जाली भारतीय मुद्रा बनाने में पाकिस्तान कुशल हो रहा है।”, एनआईए अधिकारी ने कहा।

एनआईए को संदेह है कि सामान के रूप में वायु मार्ग से नकली नोट ढाका आते हैं। कुछ समुद्री मार्ग से भी आते होंगे। भारत-बांग्लादेश की छिद्रपूर्ण सीमा से फिर इन्हें बंगाल पहुँचाया जाता है। अवैध रूप से बांग्लादेश मूल के मुस्लिम जो पिछले कई दशकों में बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बस गए हैं, इस तस्करी में सहयोग करते होंगे।

“अंतर्राष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर बसे लोगों में मजहबी एवं संजातीय मेल के कारण बंगाल में नकली नोटों को लाना काफी सरल है। बंगाल के सीमावर्ती जिलों में पुलिस भी सुस्त है और बांग्लादेश मूल के मुस्लिमों को मिलने वाले राजनीतिक व प्रशासनिक प्रश्रय के कारण नकली नोटों की तस्करी हो जाती है।”, सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया।

पिछले कुछ वर्षों में एनआईए ने नकली नोटों के तस्करी रैकेट के कई मामलों की जाँच की है और सभी में यही पाया है कि पाकिस्तान से नोटों को बांग्लादेश लाया जाता है एवं वहाँ से बंगाल में। केंद्रीय एजेंसियों का मानना है कि बंगाल में नकली नोटों का व्यापार बढ़ रहा है और इसे राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त है।

“ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक प्रश्रय के बिना यह तस्करी नहीं हो सकती है।”, इन्टेलीजेन्स ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि असम एवं मेघालय में भी भारत-बांग्लादेश सीमा छिद्रपूर्ण है।

“लेकिन उन राज्यों में तस्करों को राजनीतिक प्रश्रय नहीं मिलता है और पुलिस व राज्य एजेंसियों की चौकसी भी दुरुस्त है। इसलिए वहाँ संगठित रूप से और भारी मात्रा में नकली नोटों की तस्करी नहीं हो पाती है।”, अधिकारी ने आगे कहा।

बंगाल में आने के बाद जाली नोटों को कूरियर के माध्यम से देश के अन्य भागों में भेजा जाता है, विशेषकर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कुछ अन्य मेट्रोपोलिटन केंद्र जहाँ उच्च व्यापार लेन-देन होता है। एनआईए अधिकारी ने स्वराज्य  को बताया कि उन्हें अपेक्षा है कि बांग्लादेश में जाँच से इस रैकेट का भंडाफोड़ हो पाएगा।

“अभी तक हम बिखरी हुई जानकारी के आधार पर ही लोगों को पकड़ पाए हैं और पूरे व्यापार की तह तक नहीं पहुँचे हैं। जो लोग पकड़े गए हैं, वे मात्र माध्यम थे लेकिन अब हम बड़ी मछली को पकड़ सकेंगे।”, उन्होंने कहा।

एनआईए अधिकारी ने आगे बताया कि भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्यबल, जो नकली नोटों की तस्करी पर जानकारी साझा करता है, के होने के बावजूद भी इसलिए ही एक स्वतंत्र एवं व्यापक जाँच का निर्णय लिया गया है।

जाली नोटों के लिए भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्यबल (फरवरी 2016)

“ढाका में पकड़े गए लोगों, विशेषकर पाकिस्तानी नागरिकों, की पूछताछ से बहुत कुछ पता चलेगा। हम इसकी भी जाँच करेंगे कि इस रैकेट का भारत में किससे संबंध था ताकि हम पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर पाएँ।”, अधिकारी ने कहा।

पिछले वर्ष 92 करोड़ रुपये के जाली नोट भारत में पकड़े गए थे। परंतु एनआईए का मानना है कि देशभर में जितने जाली नोट चल रहे हैं, उसकी तुलना में यह काफी छोटा भाग था। पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेस इन्टेलीजेन्स (आईएसआई) इस पूरे रैकेट के पीछे है।

“अब हम यह पता लगाना चाहते हैं कि पाकिस्तान में ये जाली नोट कहाँ छपते हैं और इनके पीछे कौन है।”, अधिकारी ने कहा। नई दिल्ली को अपेक्षा है कि रैकेट में पाकिस्तान की संलिप्तता के साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करके पाकिस्तान को बेनकाब किया जा सकता है।

संयोगवश, बांग्लादेश में जाली नोटों की जाँच विदेश में एनआईए की तीसरी जाँच होगी। इससे पहले पिछले वर्ष के मार्च में काबुल गुरुद्वारे पर हुए हमले, जिसमें 27 सिखों ने जान गँवाई थी, की जाँच एनआईए ने की थी।

इसके अलावा यूएस, यूके, जर्मनी, कनाडा और कुछ अन्य देशों में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शनों के लिए सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) की गतिविधियों पर एनआईए जाँच आरंभ कर चुका है। माना जाता है कि पाकिस्तान के आईएसआई और खालिस्तानी आतंक समूहों से एसएफजे के निकट संबंध हैं।

2019 में एनआईए अधिनियम में संशोधन किया गया था जिसने जाँच एजेंसी को अनुमति दी कि दूसरे देशों में वह उन आतंकी गतिविधियों की जाँच कर सके जो भारतीयों और भारतीय दूतावासों को निशाना बनाती हैं। जाली नोटों के रैकेट को भारतीय अर्थव्यवस्था एवं संप्रभुता पर एक हमला माना गया।

जयदीप मज़ूमदार स्वराज्य में नियमित रूप से योगदान करने वाले संपादक हैं। वे @joyincal09के माध्यम से ट्वीट करते हैं।