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मिस्र ने रूस-यूक्रेन युद्ध के मध्य भारत को नए गेहूँ आपूर्तिकर्ता के रूप में जोड़ा

एक सकारात्मक विकास में रूस-यूक्रेन युद्ध के मध्य मिस्र ने भारत को गेहूँ आपूर्तिकर्ता के रूप में स्वीकृति दे दी है। दरअसल, युद्ध की वजह से वैश्विक खाद्य सुरक्षा का खतरा उत्पन्न हो रहा है क्योंकि दोनों देश खाद्यान्न के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से हैं।

केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने ने शुक्रवार (15 अप्रैल) को एक ट्वीट में कहा, “भारतीय किसान दुनिया का पेट भर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “मिस्र भारत को गेहूँ आपूर्तिकर्ता के रूप में स्वीकृति देता है। दुनिया सतत खाद्य आपूर्ति के भरोसेमंद वैकल्पिक स्रोत की खोज में है। ऐसे में मोदी सरकार आगे आई है। हमारे किसानों ने भंडारों को भरा रखा और हम विश्व की सेवा करने के लिए तैयार हैं।”

रॉयटर की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र के आपूर्ति मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में पुष्टि की थी कि वह अपने देश के अनाज खरीदार द्वारा स्वीकार किए गए 16 अन्य राष्ट्रीय आयात मूल में भारत से गेहूँ जोड़ने पर विचार कर रहा था।

समाचार एजेंसी ने बताया कि दुनिया का शीर्ष गेहूँ आयातक मिस्र आमतौर पर अपने देश के अनाज खरीदार, आपूर्ति वस्तुओं हेतु सामान्य प्राधिकरण (जीएएससी) द्वारा निर्धारित निविदाओं के माध्यम से ही अनाज खरीदता है।

जीएएससी की टेंडर बुक में पहले रूस, यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, कजाकिस्तान और अमेरिका सहित 16 मान्यता प्राप्त गेहूँ आयात मूल थे। पिछले नवंबर को लताविया भी इस सूची में जोड़ा गया था।