राजनीति
उच्च शिक्षा ही नहीं, प्राथमिक शिक्षा पर भी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किया है काम

बेहतर शिक्षा से ही समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था स्वतः विकासात्मक व निवेशात्मक वातावरण की जनक होती है। इसका एहसास योगी आदित्यनाथ से बेहतर किसको हो सकता है।

शिक्षा की महत्ता की सीख योगी को अपने दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ से मिली, जिन्होंने शिक्षा के प्रसार को लोक जागरण और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम मानकर कार्य किया।

महंत दिग्विजयनाथ ने शैक्षिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के केंद्र एवं अपनी कर्मस्थली गोरखपुर में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की शिक्षण संस्थाओं को संचालित करने हेतु महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् की वर्ष 1932 में स्थापना कर शिक्षा क्षेत्र में अपनी अविस्मरणीय भूमिका की नींव रखी।

वर्तमान में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् दो दर्जन से भी अधिक शिक्षण-संस्थाओं को संचालित कर रही है, जिसमें 25,000 से भी अधिक छात्रा-छात्राएँ कला, विज्ञान, वाणिज्य, साहित्य और प्राविधिक विषयों में परंपरागत तथा आधुनिक विषयों की शिक्षा ले रहे हैं।

यही अनुभव था कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही योगी आदित्यनाथ ने 24 करोड़ लोगों के प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने की प्राथमिकता एवं प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने अपने कार्यकाल में एक के बाद एक विश्वविद्यालयों, शोध केंद्रों, महाविद्यालयों, मेडिकल काॅलेजों आदि की स्थापना की है।

पूर्व सरकारों द्वारा शिक्षा को लेकर दिखाई गई उदासीनता की वजह से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में वर्षों से व्याप्त कुव्यवस्था मुख्यमंत्री योगी को विरासत में मिली। संसाधन के अभाव एवं शिक्षकों की कमी की वजह से प्रदेश के विश्विद्यालयों में पठन-पाठन व शोध कार्य बंद हो चुके थे या बंद होने के कगार पर थे।

परीक्षा में नकल, नियुक्तियों में धांधली व भ्रष्टाचार के साथ-साथ विश्विद्यालय गुंडागर्दी का अड्डा बन गए थे। योगी सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया, नकलविहीन परीक्षा व गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का वातावरण बनाया है।

अब शुचितापूर्ण तरीके से समयबद्ध परीक्षाएँ संपन्न हो रही हैं। नकल माफियाओं व फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा गया। वर्ष 2018 में नकल पर नकेल कसी गई तो लगभग 10 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा ही छोड़ दी। ऐसी कार्यवाहियाँ सतत् चल रही हैं।

उत्तर प्रदेश के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अक्सर प्रदेश से बाहर जाना पड़ता है। जो छात्र यहाँ पढ़ते भी हैं, उन्हें रोजगार हेतु प्रदेश छोड़ना पड़ता है। लेकिन अब इस पर रोक लग रही है।

एक संतत्व नेतृत्व में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय परिवेश के अनुरूप उच्च शिक्षा का ढाँचा विकसित हो चुका है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ लागू करने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर क्रियाशील है। कभी अराजकता का अड्डा बन चुके विश्वविद्यालय आज शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में लगे हैं।

योगी सरकार राज्य के असेवित मंडलों में राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना करने जा रही है। सहारनपुर में माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ में राज्य विश्वविद्यालय, मेरठ में मेजर ध्यान चंद खेल विश्वविद्यालय प्रस्तावित हैं।

हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास संपन्न हुआ है। लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के नाम पर चिकित्सा विश्ववविद्यालय का निर्माण हो रहा है।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की उपस्थिति में गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय व प्रयागराज में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास हो चुका है। इस तरह प्रदेश में लगभग कुल आठ विश्वविद्यालयों का निर्माण सतत् जारी है। इसके साथ ही राज्य की सभी पात्र बेटियों को स्नातक तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में 51 नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना हो चुकी है। लगभग 25 मॉडल राजकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। लगभग 28 निजी विश्वविद्यालय खोलने के साथ ही सभी जनपदों में राजकीय मेडिकल काॅलेज खोलने की कार्यवाही जारी है।

उच्च शिक्षा के साथ-साथ ही विद्यालयी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों की रिकॉर्ड भर्तियाँ हुई हैं। ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत प्रदेश के विद्यालयों में विकास का बसंत छा गया है। राज्य के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठों की स्थापना की जा चुकी है।

पं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोध पीठ, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) के नाम पर पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर में रिसर्च सेंटर, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर डीएवी कॉलेज, कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आदि की स्थापना से प्रदेश में शोध को एक नया आयाम मिलेगा।

वहीं, राज्य में निःशुल्क मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सरकार टैबलेट मुहैया करा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में हुए इन तमाम विकास कार्यों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी ने बहुत बड़ी लकीर खींच दी है।

अब वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव माथे पर है। विपक्ष बेखबर है। “योगी दोबारा” की चर्चा है। प्रदेश के मान-सम्मान, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार सहित सभी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन कर योगी ने स्वयं का लोहा मनवा दिया है।

रामाशीष यादव पत्रकार हैं। डॉ महेंद्र कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार हैं।