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ईडी ने कुंभ में झूठे कोविड परीक्षण मामले में पाँच कंपनियों के कार्यालयों पर छापेमारी की

उत्तराखंड में कुंभ मेले के दौरान झूठे कोविड-19 परीक्षण का मामला सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (7 अगस्त) को मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर पाँच डायग्नोस्टिक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के आवासों एवं कार्यालयों में छापेमारी की। इस दौरान कई काल्पनिक बिल, लैपटॉप, मोबाइल फोन, संपत्ति के कागज़ात और 30.9 लाख रुपये नगद बरामद किए गए।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने जिनके यहाँ छापा मारा, उनमें नोवस पाथ लैब्स, डीएनए लैब्स, मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज़, डॉ. लाल चंदानी लैब्स और नलवा लैबोरेटरीज़ सम्मिलित हैं। छापेमारी की यह कार्रवाई दिल्ली, नोएडा, हिसार, देहरादून और हरिद्वार में की गई।

कुंभ मेले के दौरान इन प्रयोगशालाओं को उत्तराखंड सरकार ने रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर परीक्षण कराने का ठेका दिया था। इन्हें पहले ही 3.40 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। आरोप है कि इन्होंने जितने परीक्षणों की संख्या दिखाई, उतने हुए नहीं थे।

ईडी ने बताया कि कोविड परीक्षण जाँच के लिए लैबों ने कई लोगों के एक ही मोबाइल नंबर, पते और फॉर्म का उपयोग किया। बिना परीक्षण किए कई के नाम इसमें जोड़ दिए। इनमें बहुत से ऐसे थे, जो कुंभ गए ही नहीं। इनकी वजह से उस वक्त हरिद्वार में संक्रमण की सकारात्मक दर 0.18 प्रतिशत रही, जो असलियत में 5.3 प्रतिशत थी।

बता दें कि मामले का खुलासा तब हुआ, जब पंजाब के एक व्यक्ति के मोबाइल पर कुंभ में कोरोना जाँच करवाने का संदेश आया, जबकि वह हरिद्वार गया ही नहीं था। उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज करवाई। राज्य सरकार ने जाँच शुरू करवाई और शुरुआत में एक लाख से अधिक झूठे कोरोना परीक्षण की बातें सामने आईं।