अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी के बजट के तीन दाँव- किसान, मध्यम वर्ग और अनौपचारिक क्षेत्र

आशुचित्र- लोकप्रिय धारणा और वित्तीय गणित को साथ लेकर चला नरेंद्र मोदी का बजट सबको खुश करने में सक्षम है और इससे विपक्ष के चेहरे पर उदासी छा गई है।

नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के छठे बजट में नरेंद्र मोदी का तीर निशाने पर लगा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत किए इस बजट के असली रचनाकार स्वयं नरेंद्र मोदी थे और पीयूष गोयल मात्र उनके संदेशवाहक हैं। अगर शंका हो तो याद करें कि हर घोषणा के साथ प्रधानमंत्री ने स्वयं ताली ठोककर इसकी सराहना कर इसे जगजाहिर किया है। और यह बजट चुनावों के पहले मार्च में लागू हो जाएगा और यह अंतरिम बजट नहीं बल्कि पूर्ण बजट ही है। यह ्ंतरिम बजट तब ही होगा जब मोदी अगले चुनावों में हार जाते हैं।

जब गोयल बजट प्रस्तुत करने के लिए खड़े हुए तो यह स्पष्ट हो गया था कि इसका निशाना आगामी चुनाव हैं क्योंकि उन्होंने शुरुआत सरकार की उपलब्धियों से की और उन्हें लक्षित किया जो सरकार के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। इसमें छोटे किसान, अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी और सबसे ज़रूरी मध्यम वर्ग सम्मिलित हैं।

मध्यम वर्ग जो मोदी के समर्थक रहे हैं को मोदी ने कोष के सबसे बड़े अंशदाता होने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस नए बजट, जिसे कोई अगली सरकार वापस नहीं ले सकती, में कर छूट की सीमा को बढ़ाकर रिबेट के रूप में 5 लाख रुपये कर दिया गया है जिसका अर्थ है कि यह छूट सिर्फ इस वर्ष के लिए होगी और कर बेस वैसा ही बना रहेगा। 5 लाख रुपये से अधिक आय वालों को यह छूट नहीं मिलेगी। मानक कटौती को 40,000 से ब़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है। यदि आपके पास दूसरा मकान भी है तो इससे होने वाली काल्पनिक आय पर भी कोई कर नहीं वसूला जाएगा। ऐच्छिक दान की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

इन कर विरामों का अर्थ है कि मध्यम वर्ग को करीबन 7.5 लाख रुपये की कर मुक्त आय मिल सकेगी, यदि कोई कर युक्त आय की कर कटौती को भी जोड़कर देखे तो। मूल छूट में 1.5 लाख की 80सी कटौती, राष्ट्रीय पेंशन योजना में 50,000 रुपये का अतिरिक्त योगदान और उच्च मानक कटौती को भी जोड़ना चाहिए। इसमें स्वास्थ्य बीमा को दी जाने वाली राशि को नहीं गिना गया है। इस प्रकार कुल कर मुक्त आय लगभग 8 लाख रुपये के निकट है जो सीमा 10 प्रतिशत आर्थिक पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए भी रखी गई है।

खेल बदलने वाला निर्णय निश्चित रूप से सीमांत और छोटे किसानों (1 दिसंबर 2018 तक 2 हेक्टेयर से कम की उत्पादक भूमि वाले किसान) को 6,000 रुपये की निश्चित वार्षिक आय की घोषणा है जो तीन किश्तों में दी जाएगी। इसलिए जब किसान अप्रिल 2019 में मत डालने जाएगा, तब तक उसे इस राशि की दो किश्तें मिल चुकी होंगी। इससे राहुल गांधी की न्यूनतम आय को लेकर समयपूर्व घोषणा को समझा जा सकता है। इसका मतलब बजट का यह प्रावधान पहले ही प्रकट हो चुका था। मोदी की यह योजना 12 करोड़ किसानों को 75,000 करोड़ रुपये की राशि से लाभ पहुँचाएगी जो वित्तीय गणित के साथ तर्कसंगत है।

अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को नई वेतन योजना में सम्मिलित किया गया है जिसके अंतर्गत जो व्यक्ति 100 रुपये का मासिक योगदान देगा, उसके लिए सरकार भी 100 रुपये का योगदान देगी। 42 करोड़ कर्मचारियों में से 10 करोड़ कर्मचारी इसका लाभ उठा सकेंगे यदि वे योगदान देना चाहें तो। गणित देखें तो यदि कोई व्यक्ति 29 वर्ष की आयु में इस योजना में सम्मिलित होगा तो 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बाद उसे 3,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी। लेकिन प्रधानमंत्री श्रम योजना का सबसे बड़ा जो लाभ होगा, वह यह है कि इन कर्मचारियों को प्रलेखन में सम्मिलित किया जा सकेगा जिससे सरकार इस क्षेत्र के रोजगार पर अपनी नज़र रख सकेगी जो भावी योजनाओं के लिए सहायक सिद्ध होगा।

सस्ता आवास देने वाली कंपनियों के मुनाफे पर कर छूट को एक और वर्ष बढ़ाकर मार्च 2020 तक वैध कर दिया गया है जिसका अर्थ यह है कि परियोजनाएँ शुरू हो जाएँ और बाद में भी पूरी की जाएँ जिससे निवेश, रोजगार और वृद्धि में लाभ मिलेगा।

इन सब छूटों के बावजूद 2018-19 की वित्तीय कमी मात्र 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो जाएगी जो अगले वर्ष के लिए 3.1 प्रतिशत आंकी गई है।

लोकप्रिय धारणा और वित्तीय गणित को साथ लेकर चला नरेंद्र मोदी का बजट सबको खुश करने में सक्षम रहा है और इससे विपक्ष के चेहरे पर उदासी छा गई है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।