अर्थव्यवस्था
चिप अभाव क्यों झेल रहा है विश्व, कोविड-पश्चात आर्थिक सुधार में सेमीकन्डक्टर की बाधा

हमारे फोन से लेकर अनेक घरेलू व रक्षा उपकरणों में उपयोग होने वाली सेमीकन्डक्टर चिप का अभाव वैश्विक परिदृश्य में देखने को मिल रहा है। यह बात एक वर्ष से चिंता का विषय बनी हुई है लेकिन अब अपने चरम पर आ गई है और विशेषकर वाहन निर्माता इससे जूझते दिखाई दे रहे हैं।

जेनरल मोटर्स ने कह दिया है कि सेमीकन्डक्टर की कमी 2021 में उनके उत्पादन को प्रभावित करेगी। वहीं फोर्ड मोटर कॉरपोरेशन भी उत्पादन में 20 प्रतिशत गिरावट के लिए तैयार है। फॉक्सवैगन के आधिपत्य वाली जर्मनी की ऑडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्कस ने भी उच्च-श्रेणी वाहनों के निर्माण में देरी की बात कही है।

कोविड महामारी से पहले ही समस्याओं का सामना कर रही सेमीकन्डक्टर आपूर्ति अब अर्थव्यवस्था में पुनः उछाल के साथ कदम नहीं मिला पा रही है। अचानक मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों की माँग उठी है। इसके अतिरिक्त नई तकनीकें भी चिप की अधिक माँग कर रही हैं।

उदाहरण स्वरूप, विश्व 5जी के लिए तैयार हो रहा है और आईफोन 12 समेत कई मोबाइल बनाए जा रहे हैं जो अधिक सेमीकन्डक्टर की माँग करते हैं। वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहन भी गति पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। विश्लेषक नील मॉस्टन के अनुसार अन्य क्षेत्रों में बढ़ती माँग मोबाइल उपकरणों की आपूर्ति में बाधा बनेगी।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की चिप

ब्लूमबर्ग का अनुमान है कि चिप की कमी के कारण वाहन क्षेत्र में 61 अरब डॉलर कम की बिक्री होगी, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को इससे भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि पिछले तीन से छह महीनों में कुछ चिप के दाम 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

अभाव की स्थिति में जमाखोरी का कुचक्र चल पड़ा है जो इस अभाव को और गंभीर बना रहा है। यूएस से कई प्रकार के प्रतिबंधों की आशंकाओं के बीच चीन की हुआवे टेक्नोलॉजीज़ ने कुछ उपकरण जमा करने शुरू कर दिए। यह बात आँकड़ो में भी दिखती है।

चीन ने 2020 में कुल मिलाकर 380 अरब डॉलर के चिप का आयात किया। वहीं चीन ने घरेलू रूप से भी सेमीकन्डक्टर निर्माण पर ज़ोर दिया लेकिन इसके प्रयास अभी तक आवश्यक गुणवत्ता को नहीं छू पाए हैं। हुआवे को देखते हुए ऐप्पल ने भी चिप जमा करना शुरू कर दिया।

ऐप्पल को चिप आपूर्ति करने वाली यूके आधारित कंपनी

ताइवान सेमीकन्डक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) के अधिकारियों ने भी कहा था कि अनिश्चितताओं के बीच ग्राहक सामान्य से अधिक चिप खरीद रहे हैं। हेडफोन और कीबोर्ड के लिए चिप का उपयोग करने वाली कंपनी ड्रॉप के मुख्य उत्पाद अधिकारी ने भी चिप जमा करने की होड़ पर टिप्पणी की थी।

विश्व की सबसे बड़ी मोबाइल चिप निर्माता क्वालकॉम ने भी कमी की बात उठाकर कहा कि वे एशिया की मात्र कुछ कंपनियों पर आश्रित हैं। सबसे बड़ी और वैश्विक कंपनियों की सबसे पसंदीदा कंपनी टीएसएमसी अपने प्रयासों से अग्रणी रही है लेकिन इसी पर केंद्रित हो जाने से अभाव की स्थिति खड़ी हो गई है।

टीएसएमसी के अलावा सिर्फ सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ही है जो अत्याधुनिक और उन्नत सेमीकन्डक्टर बना सकती है। ऐसे में दो ही कंपनियों पर निर्भरता उच्च श्रेणी की वस्तुओं को सता रही है। इस विषय में जो बाइडन प्रशासन ने कंपनियों से वार्ता की और अमेरिका के चिप निर्माता संघ ने स्थिति की गंभीरता रेखांकित की।

एक और बात देखने को मिली है कि सेमीकन्डक्टर निर्माता सीधे उपभोक्ता उपयोग में काम आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे स्मार्टफोन आदि को चिप आपूर्ति में प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में उड्डयन क्षेत्र जो पुराने विमानों के स्थान पर नए विमान लाने की तैयारी कर रहा है, चिप की कमी के कारण इसमें देरी का सामना करना पड़ेगा।

इससे भी बड़ा संकट होगा जब फाइटर जेट, रक्षा उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उपकरणों में चिप की कमी के कारण देरी होगी जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती होगी। अमेरिकी सांसदों ने इस अभाव के बीच महामारी के पश्चात के आर्थिक सुधार के धीमा होने की भी आशंका जताई।

सेमीकन्डक्टर विश्लेषक विवेक आर्य का मानना है कि 2021 के उत्तरार्ध में इस अभाव से थोड़ी ही राहत मिल पाएगी और तंगी 2022 तक बनी रहेगी। दक्षिण एशिया के अलावा सेमीकन्डक्टर उद्योग मुख्य रूप से अमेरिका में ही है ऐसे में विश्लेषक इस परिस्थिति से उबारने की अपेक्षा बाइडन प्रशासन से कर रहे हैं।

अमेरिकी चिप निर्माता कंपनी

वहीं, दूसरी ओर एशियाई चिप निर्माताओं ने भी बढ़ती माँग की आपूर्ति करने के लिए कमर कस ली है। हालाँकि, अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें कुछ महीनों का समय लगेगा। ताइवानी चिप निर्माता युनाइटेड माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ने पिछले वर्ष की तुलना में अपना निवेश डेढ़ गुना करके 1.5 अरब डॉलर करने की योजना बनाई है।

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता दक्षिण कोरिया की एसके हायनिक्स चीन में अपना उत्पादन स्तथानांतरित करके लागत कम करने की तैयारी में है।चीन की शीर्ष चिप निर्माता सेमीकन्डक्टर मैन्युफैक्टरिंग इंटरनेशनल कॉरपोरेशन भी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है, इकोनॉमिक टाइम्स ने रिपोर्ट किया।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।