अर्थव्यवस्था / भारती
सेमीकन्डक्टर चिप का अभाव दर्जनों उद्योगों को करने लगा प्रभावित, 2022 तक आशा नहीं

वैश्विक सेमीकन्डक्टर चिप का अभाव वाहन निर्माताओं से इलेक्ट्रॉनिक निर्माताओं तक को परेशान करने लगा है। दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियाँ विनिर्माण में देरी का अनुमान लगा रही हैं और ऐसा 2022 तक चलने की संभावना है।

सैमसंग के मुख्य उपकरण निर्माताओं ने फाइनेन्शियल टाइम्स को बताया कि कंपनी ने इस माह कुछ स्मार्टफोन उपकरण के ऑर्डर कम दिए हैं। एक बड़े स्मार्टफोन पुर्जा आपूर्तिकर्ता के अनुसार ऐप्लिकेशन प्रोसेसर, डिस्प्ले ड्राइवर और कैमरा सेन्सर, सभी की आपूर्ति में कमी है तथा इसी कारण से इस तिमाही में सैमसंग कम ऑर्डर दे रहा है।

सैमसंग मोबाइल व्यापार के प्रमुख कोह डॉन्ग-जिन को चिंता है कि दूसरी तिमाही में भी चिप अभाव का सामना करना पड़ेगा और इस कारण से उन्हें भय है कि कंपनी को एक उच्च-श्रेणी के स्मार्टफोन के लॉन्च को अगले वर्ष तक स्थगित करना पड़ सकता है। हालाँकि, सैमसंग के पास स्वयं कुछ चिप निर्माण की क्षमता है।

वहीं, एलजी का कहना है कि चिप अभाव ने अभी तक उसके उत्पादन को प्रभावित नहीं किया है लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें इसका भय नहीं है। वे स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। दक्षिण कोरिया के छोटे टीवी निर्माता अधिक मूल्य देकर कच्चा माल प्राप्त कर पा रहे हैं और वे चाहते हैं कि इसकी भरपाई वे टीवी की कीमतें बढ़ाकर करें।

वॉशिंग मशीन और ब्रेड टोस्टर में काम आने वाले सरल चिप का भी अभाव है। एशियाई सेमीकन्डक्टर शोध संस्था क्रेडिट सुइस के प्रमुख रैन्डी अब्राम्स के अनुसार माइक्रोकन्ट्रोलर इकाइयों का भी अभाव है जो सामान्य उपकरणों को प्रभावित कर सकता है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इनमें लाभ की संभावना अधिक नहीं होती जिसके कारण विनिर्माताओं ने इन चिप के विनिर्माण स्थान पर अधिक मार्जिन वाली चिपों के विनिर्माण को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया।

माइक्रोचिप

कितना विस्तृत है चिप अभाव का दायरा

गोल्डमैन सैक्स के एक विश्लेषण के अनुसार चिप अभाव किसी न किसी तरह से 169 उद्योगों को प्रभावित कर रहा है। यानी स्टील से लेकर रेडी-मिक्स कॉन्क्रीट बनाने वाली कंपनियों, एयर कंडीशनर से लेकर रेफरीजरेटर बनाने वाली कंपनियों, यहाँ तक कि साबुन बनाने वाली फैक्टरियों तक को प्रभावित कर रहा है।

विश्लेषण के लिए गोल्डमैन सैक्स ने यह देखा कि कंपनी के जीडीपी के कितने प्रतिशत भाग में माइक्रोचिप या संबंधित उपकरणों की आवश्यकता है। और माना कि जिन कंपनियों के लिए यह आँकड़ा 1 प्रतिशत जीडीपी से अधिक है, वे उद्योग चिप संकट से प्रभावित होंगे।

जैसे ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए जीडीपी का 4.7 प्रतिशत माइक्रोचिप और संबंधित सेमीकन्डक्टर पर खर्च होता है। इसलिए हम देख सकते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र से पहले से एवं अधिक प्रभाव जैग्यूआर लैंड रोवर (जेएलआर) और फोर्ड जैसी कार विनिर्माताओं पर पड़ रहा है।

डिज़ाइनरों और चिप विनिर्माताओं ने यहाँ तक चेतावनी दे दी है कि 2022 या 2023 तक इस अभाव को झेलना पड़ सकता है। इस सोमवार से जेएलआर ने इंगलैंड से हेलवुड और कैसल ब्रोमविच संयंत्रों के संचालन को बंद कर दिया है जो कम से कम एक सप्ताह तक बंद रहेगा। वहीं,  फोर्ड ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप में अपने 10 स्थलों को बंद कर दिया है।

फोर्ड का तुर्की संयंत्र जून तक बंद रहेगा और यूके में इसके उपकरणों की फैक्टरी भी वैश्विक चिप अभाव से प्रभावित रहेगी। वहीं, जर्मनी की बहुराष्ट्रीय वाहन निगम डैमलर एजी ने भी कम उत्पादन के कारण अपने 18,500 कर्मचारियों के कार्य घंटे कम कर दिए हैं।

बात यही नहीं रुकती। 22 अप्रैल को रिनॉल्ट ने चेतावनी दी थी कि यह स्थिति और खराब होगी। पहली तिमाही में इसकी कुल बिक्री में 1.1 प्रतिशत गिर गई जो कि 10 अरब डॉलर के आसपास है। इस संकट के कारण अपेक्षा है कि दसों-हज़ारों कारों के उत्पादन में भी गिरावट आएगी।

रिनॉल्ट वाहन में चिप

रिनॉल्ट के प्रबंधन बोर्ड की सदस्या क्लोटिल्डे डेलबोस कोई भी अनुमान बताने से कतरा रही हैं क्योंकि वे उत्पाद के लिए ऐसा कोई अनुमान नहीं देना चाहतीं जो “शीघ्र ही गलत” सिद्ध हो जाए। “दो महा पहले हमने कहा था कि हमें लगता है कि दूसरी तिमाही में शिखर आएगा लेकिन अब हमें लगता है कि कम से कम तीसरी तिमाही तक भी इसका प्रभाव रहेगा।”, उन्होंने कहा।

उनके अनुसार इस मामले में दूरदर्शिता बिगड़ रही है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी लुका डे मेओ के नेतृत्व में कंपनी अपनी योजना बदलने पर विचार कर रही है जिसमें संयंत्र क्षमता को एक-चौथाई एवं 15,000 नौकरियों को कम किए जाने के साथ ब्रांड के जीर्णोद्धार का भी विचार है।

कब तक रहेगा चिप अभाव

सेमीकन्डक्टर की एक बड़ी विनिर्माता कंपनी इंटेल के सीईओ पैट जेलसिंगर के अनुसार विश्व भर के कई उद्योगों को प्रभावित कर चुकी सीमित आपूर्ति से तब तक छुटकारा नहीं पाया जा सकता जब तक अतिरिक्त क्षमताएँ न विकसित की जाएँ।

“लोग ज़मीनी स्तर पर क्षमता में निवेश कर पाएँ, इसमें थोड़ा समय लगेगा। नई फैक्टरियाँ बनाना ही एकमात्र तरीका है।”, उन्होंने कहा। वैश्विक चिप संकट दो प्रमुख कारणों से और बढ़ गया- एक, यूएस-चीन व्यापार युद्ध और दूसरा, कोरोनावायरस के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला का बाधित होना।

महामारी के कारण कार विनिर्माताओं ने वाहन क्षेत्र में अपेक्षित मंदी के कारण माँग कम कर दी लेकिन अपेक्षा के विपरीत कार की माँग अधिक तेज़ी से बढ़ी। कार उद्योग के लिए सबसे बड़े चिप विनिर्माता रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के जापान संयंत्र में अग्नि दुर्घटना ने आपूर्ति शृंखला को और प्रभावित किया।

वोल्वो समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्टिन लंडस्टेड्ट ने कहा, “सेमीकन्डक्टर एवं अन्य उपकरणों के लिए वैश्विक आपूर्ति शृंखला काफी अस्थिर है और अनिश्चितता भी काफी अधिक है।” चिप बनाना सरल नहीं है और उन्नत सेमीकन्डक्टर चिप के उत्पादन में तो छह माह तक का समय लग जाता है।

अनुमान है कि चिप का अभाव के कारण यूएस को 1 प्रतिशत जीडीपी का नुकसान झेलना पड़ सकता है। हालाँकि यदि कंपनियाँ दूसरी चिप का उपयोग करके उसे अपने अनुसार ढालकर काम चला लें तो इस नुकसान को जीडीपी के 0.5 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है।

इन सबके बीच एकमात्र राहत का समाचार इस माह की शुरुआत में मिला था जब विश्व की सबसे बड़ी चिप विनिर्माता ताइवान सेमीकन्डक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (टीएसएमसी) ने उत्पादन बढ़ाने के लिए अगले तीन वर्षों में 1 खरब डॉलर के निवेश की योजना सार्वजनिक की थी।

वहीं, इंटेल पहले ही बता चुका है कि 20 अरब डॉलर की लागत से वह एरिज़ोना में दो संयंत्र लगाएगा जिससे अमेरिका और यूरोप को चिप अभाव से छुटकारा दिलाया जा सके। टीएसएमसी ने उन्नत क्षमता तकनीक स्थापित करने के लिए 2.89 अरब डॉलर की राशि को स्वीकृति भी दे दी है।

चिप विनिर्माता का कहना है कि वाहन उद्योग उसकी प्राथमिकता रहेगा। साथ ही 2021 में 25-28 अरब डॉलर उन्नत चिप बनाने और संयंत्र क्षमता बढ़ाने पर खर्च करने की बात भी टीएसएमसी ने की थी। वहीं, सैमसंग ने सेमीकन्डक्टर उत्पादन के लिए 2030 तक 1.16 अरब डॉलर के निवेश की बात कही है।

ये सकारात्मक प्रगति है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चिप संकट से उबरने में विश्व को दो-तीन वर्ष लग सकते हैं। वहीं, प्रतिबंधों के भय से चीनी समूह अतिरिक्त चिप जमा करके आपूर्ति शृंखला को और प्रभावित कर रहे हैं।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।