अर्थव्यवस्था / भारती
रिलायंस डिजिटल उपनिवेश बनने से बचने में भारत के प्रतिरोध का नेतृत्व कर रहा है

रिलायंस की वार्षिक महासभा (एजीएम) उतनी ही रोमांचक थी, जितनी अपेक्षा थी। आखिरकार, रिलायंस को जाना जाता है रोचक एजीएम के लिए और इस वर्ष भी लोगों को काफी अपेक्षाएँ थीं।

हम में से कुछ लोगों को याद होगा कि धीरुभाई अंबानी मुंबई के एक स्टेडियम में एजीएम आयोजित किया करते थे जिसमें दर्शक दीर्घा में कई शेयरधारक बैठते थे। मुकेश अंबानी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।

हालाँकि, इस वर्ष पिछले वर्ष की तरह ही कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण वर्चुअल एजीएम आयोजित हुई थी लेकिन घोषणाएँ रोचक रहीं। रिलायंस ने एक बड़ी विस्तार योजना घोषित की।

इसमें निगम के पुनर्निर्माण की बात है जिसमें तेल व रसायन व्यापार की बजाय खुद्रा व्यापार और तकनीक-आधारित जियो व्यापार को केंद्र बनाया जाएगा। पिछले वर्ष रिलायंस ने 44.4 अरब डॉलर की राशि एकत्रित की थी जो विश्व भर में किसी भी एक कंपनी द्वारा जुटाई गई अधिकतम राशि है, मुकेश अंबानी ने बताया।

हालाँकि अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अंबानी द्वारा सबसे बड़ी घोषणा यह की गई कि 2035 तक रिलायंस पूर्ण हरित कंपनी बन जाएगी और शून्य कार्बन उत्सर्जन (कार्बन न्यूट्रल) का दर्जा प्राप्त करेगी।

निस्संदेह ही भविष्य में जीवाश्म ईंधनों का स्थान हरित ऊर्जा ले लेगी। हरित ऊर्जा में रिलायंस का भारी निवेश भारत को एक हरित भविष्य की ओर लेकर जाएगा। अपने जाने-माने तरीके से अंबानी ने स्तर, उच्च-प्रदर्शन और नए विश्व में वे क्या करेंगे, इसकी बात की।

अगले तीन वर्षों में ‘नई ऊर्जा’ व्यापार के लिए रिलायंस 75,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। 2030 तक भारत में अनुमानित अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 450 गीगावाट की होगी जिसमें से 100 गीगावाट का योगदान रिलायंस देगा।

हरित ऊर्जा की ओर विश्व तेज़ी से बढ़ रहा है और अपेक्षा है कि रिलायंस इस नए विश्व में भारत को लेकर जाएगा। एजीएम में अंबानी ने यह भी समझाया कि वे इसे कैसे करने वाले हैं। नई ऊर्जा आपूर्ति के लिए चार गीगा फैक्ट्रियाँ होंगी।

एक सौर ऊर्जा के लिए, एक भंडारण (विशेषकर सौर ऊर्जा के) के लिए (क्योंकि सौर ऊर्जा केवल दिन में ही उलब्ध होती है लेकिन ऊर्जा आवश्यकता 24 घंटे रहती है), एक ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइसिस संयंत्र और एक ईंधन सेल संयंत्र जो आवागमन के लिए ईंधन सेल बनाएगा।

ये सभी चार फैक्ट्रियाँ गुजरात के जामनगर में स्थित 5,000 एकड़ में फैले कॉम्प्लेक्स में होंगी जो एक पूर्ण रूप से एकीकृत संयंत्र संरचना होगी। काफी समय से अंबनी एक हरित रिलायंस बनाने की बात कर रहे थे। अब जब वैश्विक नेता और बड़े देश जलवायु परिवर्तन के लिए सजग हो रहे हैं, तो रिलायंस के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था।

जियो की क्रांति

हरित ऊर्जा को रिलायंस के बढ़ावे के साथ-साथ जियो भी एजीएम की रौनक रहा जहाँ सुंदर पिचई ने भी अपने विचार रखे। सबसे बड़ी घोषणा एक नए स्मार्टफोन- जियोफोन नेक्स्ट के लॉन्च की थी।

जियो फोन एक वैश्विक उत्पाद होगा जो उभरते हुए बाज़ारों में 6 अरब लोगों को इंटरनेट तक पहुँचने का एक सस्ता माध्यम देगा। विश्व भर में आज 5 अरब लोगों की इंटरनेट तक पहुँच है लेकिन जियो फोन कम लागत में पहुँच को बढ़ाएगा।

पिछले कई वर्षों में जियो और गूगल ने कई प्रयासों के लिए साझेदारी की है और स्पष्ट है कि जियो में गूगल का निवेश इस तकनीकी प्रमुख को बड़े लाभांश दिला सकता है। ऐसे ही,अपने फोन के लिए जियो गूगल क्लाउड का उपयोग करेगा।

वास्तव में, मोबाइल के लिए क्लाउड व्यापार वैश्विक रूप से एक बहुत बड़ा व्यापार है। जो भी गूगल के उत्पादों का उपयोग करते हैं, वे जानते हैं कि क्लाउड वास्तुशिल्प का उपयोग करने के लिए आपको एक मासिक भुगतान करना होता है।

गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के जियो में निवेश की तरह ही जियो-अज़ूर क्लाउड डाटा केंद्र भी रणनीतिक प्रकृति के हैं। जियो-अज़ूर का लक्ष्य छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) हैं। एसएमई के लिए क्लाउड माँग काफी बढ़ेगी और जियो-अज़ूर साझेदारी इस बाज़ार के बड़े भाग को भुना सकेंगे।

अगले 12 माहों में अपेक्षा है कि जियो के 50 करोड़ उपभोक्ता हो जाएँगे और जब बात 5जी और मोबाइल फोन की हो तो वैश्विक स्तर पर जियो शीर्ष पर होगा। अंबानी ने बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित 5जी तकनीक ने 1 जीबी प्रति सेकंड की डाटा गति प्राप्त की है।

रिलायंस जियो द्वारा जो दूरसंचार संरचना बनाई गई है, उसका सौंदर्य यह है कि 4जी से 5जी में स्थानांतरण और संभवतः भविष्य में 5जी से 6जी में स्थानांतरण सॉफ्टवेयर केंद्रित है, न कि हार्डवेयर। यह बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पूरी संरचना के उन्नतीकरण में जो लागत होती है, वह काफी बड़ी होती है।

डिजिटल युग में हम में से कई को भय था कि वॉलमार्ट और अमेज़ॉन एवं चीनी ऐपों के अतिक्रमण से हम एक डिजिटल उपनिवेश बन जाएँगे। लेकिन जियो के विस्तार के साथ-साथ भारत और भारतीय डिजिटल विश्व में अपना सर उठाकर खड़े हो पा रहे हैं।

आज आवश्यकता है कि विश्व का हर देश अपने भूभाग के साथ-साथ डिजिटल क्षेत्र की भी रक्षा करे। जिन चीनी ऐपों ने भारतीय बाज़ार में 60 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी बना ली थी, उनपर और चीनी पूँजी पर प्रतिबंध लगाने का भारत सरकार का निर्णय सुनिश्चित करेगा कि जियो के नेतृत्व में भारत और भारतीयों का स्वयं का डिजिटल क्षेत्र हो।

खुदरा क्षेत्र में भी रिलायंस रिटेल एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरा है। जियोमार्ट एक दिन में अधिकतम 6.5 लाख ऑर्डर के शिखर को प्राप्त करके अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स मंचों को टक्कर दे रहा है।

अपने ही तरह का एक संगठन

स्पष्ट है कि अंबानी उन व्यापारों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिनमें तीव्र वृद्धि की अपेक्षा है- तेल से रसायन, ऊर्जा, तकनीक और मोबाइल फोन एवं खुदरा व्यापार। अगले 10-15 वर्ष में ये सभी क्षेत्र भारत में काफी बढ़ने वाले हैं।

शेयरधारकों से उन्होंने यह भी वादा किया कि उनकी कमाई में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में रिलायंस ने 90 अरब डॉलर का निवेश किया है और अगले 10 वर्षों में लगभग 2 खरब डॉलर का निवेश किया जाएगा।

हरित ऊर्जा, डिजिटल रिटेल और डिजिटल क्षेत्र में अंबानी के भारी निवेश सुनिश्चित करेंगे कि अपने भविष्य पर भारत का ही नियंत्रण हो जिसमें नेतृत्व भारतीय पूँजीपति और भारतीय कर रहे हों। बात सिर्फ घोषणाओं की ही नहीं है, रिलायंस को जाना जाता है कि वे जो घोषणाएँ करते हैं, उसे प्राप्त भी करते हैं।

इसलिए हम कह रहे हैं कि यह अपने ही तरह का एक संगठन है। यदि भारत में रिलायंस के आकार और स्तर की 20-25 कंपनियाँ होतीं, तो अवश्य ही भारत एक अलग तरह का देश होता।

लेकिन यदि आप डाटा देखेंगे तो आपको आश्चर्य होगा कि कितनी कंपनियाँ हैं जो इस स्तर के परिणामों की घोषणाएँ करती हैं जहाँ 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के लाभ की बात होती है। यदि हम 2030 में जाकर देखें तो पाएँगे कि ये सभी कंपनियाँ देश के लिए काफी धन उपार्जन कर रही होंगी और रिलायंस इसमें अग्रणी होगा।