अर्थव्यवस्था
अचल संपत्ति दर कटौती- जीएसटी की राजनीति का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

आशुचित्र- क्या यह केवल एक संयोग है कि जीएसटी परिषद आम चुनाव से ठीक पहले रियल एस्टेट क्षेत्र की मदद करना चाहती है जिसमें ज़्यादातर राजनेताओं द्वारा गुप्त रूप से या खुल्लमखुल्ला निवेश किया जाता है?

किफायती आवास के लिए कर की दर को 1 प्रतिशत तक कम करने और निर्माणाधीन संपत्ति के लिए जीएसटी 5 प्रतिशत (12 प्रतिशत से) करने का जीएसटी परिषद का निर्णय आवास और अचल संपत्ति को थोड़े समय के लिए प्रोत्साहित अवश्य करेगा लेकिन एक लंबे समय की लागत यह है कि यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना को अधिक मनमाना और जटिल बना रहा है।

कल (24 फरवरी को) घोषित किए गए फैसलों के तहत किफायती आवास को अब नए सिरे से परिभाषित किया गया है जिसके अनुसार महानगरों में 45 लाख रुपये से कम कीमत में बने और 60 वर्ग मीटर से कम के क्षेत्र पर बनाए गए घरों को सस्ता माना गया है महानगरों के बाहर के घरों का क्षेत्रफल 90 वर्ग मीटर तक हो सकता है। इससे महानगरों में एकबेडरूम के फ्लैट और स्टूडियो अपार्टमेंट, और महानगरों के बाहर बड़े घरों की खरीद को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट किया, यह (दर में कटौती) सभी के लिए आवास जैसी परिकल्पना को बढ़ावा देगा और नव/मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।

यह सीमांत तौर पर संभव हो सकता है लेकिन कोई इस संभावना को खारिज नहीं कर सकता कि यह बढ़ावा अस्थाई हो सकता है। उपभोक्ताओं को शुरुआती लाभ के बाद रियल एस्टेट के दलाल स्टील, सीमेंट और फिटिंग जैसी वस्तुओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नुकसान की भरपाई के लिए दरें बढ़ा सकते हैं।

हालाँकि अनुपालन आसान हो जाता है क्योंकि कर की दरें किफायती घरों के लिए 1 प्रतिशत और निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए 5 प्रतिशत तक गिर रही हैं मगर मध्यम अवधि में यह उछाल समग्र जीएसटी संरचना को और अधिक जटिल बनाकर निष्प्रभावी हो जाएगा।

यदि आप बिना आईटीसी के लाभ के साथ कम दरों की पेशकश करते हैं तो जीएसटी श्रृंखला टूट जाती है, जब जीएसटी का पूरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इनपुट पर कर ज़्यादा न लगाई जाए। आईटीसी के लाभ के साथ कम दरों का परिणाम वास्तव में उस समस्या के परिणामस्वरूप हो सकता है जब एक बार बढ़ती अर्थव्यवस्था में इनपुट कीमतें बढ़ने लगती हैं और बिल्डर के पास इसे संतुलित करने के लिए कोई आधार नहीं होता है।

जो बिल्डर पहले से निर्माणाधीन संपत्तियों को बेच चुके हैं वे आईटीसी के नुकसान के लिए कीमतें नहीं बढ़ा सकते हैं। जीएसटी के गैर-मुनाफाखोरी प्रावधानों से यह सुनिश्चित होगा कि वे इसे माने लेकिन नए प्रोजेक्ट प्रक्षेपित करने वाले उच्च आधार लागत पर प्रक्षेपण कर सकते हैं। तो तथाकथित लाभ अल्पकालिक हो सकता है।

इन कटौतियों के साथ दूसरी बड़ी समस्या यह है कि वे अब जीएसटी दर संरचना को और अधिक जटिल बनाते हैं। अपवादों को देखते हुए विचार करें कि अब हमारे पास कितनी दरें हो सकती हैं। हमारे पास 1 प्रतिशत, 3 प्रतिशत (सोने के आभूषण), 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और विलासिता (लक्ज़री) वस्तुओं के लिए 28 प्रतिशत के शीर्ष पर सबसे अधिक दर है। शून्य श्रेणीबद्ध वस्तुओं सहित आठ दरें मौजूद हैं। और हम यह नहीं भूल सकते हैं कि जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो केरल की तरह ही बाकि राज्यों पर भी उपकर लागू हो सकता है। जीएसटी परिषद ने केरल में बाढ़ के बाद के पुनर्निर्माण को वित्त देने के लिए राज्य के भीतर बिक्री पर उपकर लगाने की अनुमति दी थी।

लेकिन यह भी इस चर्चा का अंत नहीं है। अब हमारे पास आईटीसी के लाभ के बिना और आईटीसी के लाभ के साथ 1 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की दरें हैं जिसका अर्थ है दो और अंतर्निहित दरें- यह सभी मिलकर 10 प्रकार की दरें बनाती हैं। यह जो हमने शुरू किया था उससे अधिक सरल कैसे है?

मुद्रायोजन इसे और जटिल बनाता है जिसमें जीएसटी दर रिपोर्ट किए गए टर्नओवर पर आधारित है, न कि मूल्यों पर आधारित है। समय के साथ राजनीतिक मांग रहेगी कि जीएसटी अपवर्जन की स्तरों को बढ़ाते रहा जाए और दरों की संरचना को पहचानना 2017 के मुक़ाबले में मुश्किल हो जाएगा। यह मुद्रायोजन कंपनियों को छोटे स्तर पर रहने के लिए प्रेरित करती है जिसकी वजह से वे मूल्यवर्धन पर जीएसटी के भुगतान से बचने के पात्र बन जाते हैं।

जीएसटी की व्यापक सफाई अगली सरकार का इंतज़ार कर रही है। किसी भी एक एक क्षेत्र या दूसरे क्षेत्रों  को जल्द से जल्द आगे बढ़ने हेतु छोटा मार्ग अपनाना अंततः सादगी के उद्देश्य को ख़त्म कर देगा। एक गरीब देश में यथोचित प्रगतिशील जीएसटी संरचना होना एक बात है  मगर उद्योग पर निर्भर जीएसटी दरों को अनुकूलित करना काफी अलग बात है। जीएसटी की राजनीति जीएसटी के अर्थशास्त्र पर जीत हासिल कर रही है।

पुनश्च- क्या यह केवल एक संयोग है कि जीएसटी परिषद आम चुनाव से ठीक पहले रियल एस्टेट क्षेत्र की मदद करना चाहती है जिसमें ज्यादातर राजनेताओं द्वारा गुप्त रूप से या खुल्लमखुल्ला निवेश किया जाता है?

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।