अर्थव्यवस्था
रियल एस्टेट को पीयूष गोयल के बजट से बड़ा लाभ होगा
अगर कोई एक ऐसा क्षेत्र है जिसे नरेंद्र मोदी के छठे और पीयूष गोयल के पहले बजट से प्रसन्न किया जाना चाहिए था, तो वो है रियल एस्टेट (अचस संपत्ति) क्षेत्र। जो कि अब प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निवेशकों को प्रोत्साहित करेगा एक से ज़्यादा घरों में निवेश करने से।
सीधा लाभ रियल एस्टेट को यहाँ से होगा कि अब अनुभाग 80-आईबीए को एक साल के लिए उन सभी कंपनियों के लिए बढ़ा दिया है, जो मार्च 2020 तक सस्ती आवासीय परियोजना में सम्मिलित है। इस दिनांक से शुरू हुई परियोजनाओं के मुनाफे कर रहित होंगे। अब आने वाले 15 महीनों में बिल्डिंग निर्माण के कार्यों में भारी उछाल आना चाहिए।
अब निर्माताओं को जिस साल में घरों को निर्माण हुआ था उस के बाद अनबिके हुए घरों का काल्पनिक किराया दो साल तक नहीं देना पड़ेगा। यह पहले तय की गई एक साल की सीमा से ऊपर है।
इन सभी प्रत्यक्ष फायदों के बाद भी, रियल एस्टेट को जिससे लाभ होगा, वे हैं रियायतें जो निवेशकों को दी गई हैं।
पहला कि अगर आपके पास दो घर हैं, और वह दोनों अलग-अलग जगहों पर हैं, और दोनों में ही अधिकृत हैं। तो पहले आपको दूसरे घर के काल्पनिक किराये पर कर देना पड़ता था। अब आप दोनों घरों में रह सकते हैं और आपको किसी का कर नहीं देना पड़ेगा। यह कदम लोगों को प्रोत्साहित करेगा की वह दूसरे शहर में घरों पर निवेश करें। इससे दूसरे घरों की मांग में भी बढ़ोतरी होगी।
दूसरा, बिके हुए घरों के लाभ से नए घर खरीदने में निवेश कर सकते हैं। अगले साल से 2 करोड़ रुपये तक के लाभ दो घरों की खरीद में निवेश किए जा सकते हैं। यह लोगों को प्रोत्साहन देगा ताकि वह घरों में निवेश कर सकें।
तीसरा, किराया भरने पर टीडीएस सीमा को 1.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.4 लाख रुपये कर दी है। इसका मतलब कि अब किराये पर दिये गए घरों पर ठेकेदारों को टीडीइस नहीं देना पड़ेगा।
अगर जीएसटी परिषद निर्माणाधीन संपत्ति पर दरें कम करे तो, जो रियल एस्टेट क्षेत्र को नोटबंदी के दौरान और 2016 से रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम से नुकसान हुआ है, उसकी पूर्ति हो जाएगी।