अर्थव्यवस्था
पंजाब में मोदी सरकार द्वारा एमएसपी पर धान की खरीद क्या संकेत देती है, डाटा से समझें

ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पंजाब के किसानों द्वारा उगाई गई संपूर्ण धान की फसल को 1 अक्टूबर से शुरू हुए खरीफ के बिक्री मौसम में खरीद लिया है। पीआईबी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार पंजाब से 2.028 करोड़ टन धान खरीदी गई जो कि पूरे देश से कुल खरीदी गई 3.18 करोड़ टन धान का 67 प्रतिशत है।

इसका अर्थ हुआ कि अकेले पंजाब से ही देश की कुल धान खरीद का दो-तिहाई भाग आया। लेकिन यहाँ पर एक मोड़ है। कृषि मंत्रालय के फर्स्ट एडवांस एस्टिमेट (पहले अनुमान) के अनुसार इस वर्ष 10.236 करोड़ टन खरीफ चावल के उत्पादन की अपेक्षा थी, वहीं पिछले वर्ष 10.198 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था।

अगर खरीद के डाटा के अनुसार देखें तो अभी तक जितनी धान खरीदी जा चुकी है, उससे 2.13 करोड़ टन चावल प्राप्त होंगे। इसका अर्थ हुआ कि केंद्र ने जुलाई 2020-जून 2021 के लिए खरीफ चावल के उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक भाग खरीद लिया है। पंजाब से खरीदी गई धान से 1.358 करोड़ टन चावल प्राप्त किए जा सकते हैं।

धान की फसल सिर्फ खरीफ मौसम में ही होती है जिसका अर्थ हुआ कि जुलाई 2021 तक के लिए उत्पादन हो चुका है। डाटा के अनुसार पंजाब ने पिछले वर्ष 1.282 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया था, वहीं 2018 में 1.338 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था जो कि हाल के वर्षों में सर्वाधिक है।

पंजाब में बासमती चावल का भी उत्पादन होता है जो कि देश के कुल बासमती उत्पादन का 10 प्रतिशत रहता है। इससे अलग हटकर खरीद के डाटा को ध्यानपूर्वक समझते हैं।

प्रश्न यह है कि जब पंजाब का हाल के वर्षों में अधिकांश चावल उत्पादन 1.338 करोड़ टन हुआ है तो भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) कैसे दिखा रहा है कि राज्य से 2.028 करोड़ टन धान खरीदी गई है जिससे 1.358 करोड़ टन चावल प्राप्त किए जा सकते हैं।

राज्यवार खरीद का एफसीआई डाटा

इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला तो यह कि इस वर्ष उत्पादन अधिक हुआ है।
दूसरा, ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों से पंजाब जाकर धान बेचा गया है।

इसके अलावा, किसान भी अपने उत्पादन का कुछ भाग अपने उपभोग और बीजों के लिए रखते हैं। अगर हम यह भी मान लें कि सामान्य रूप से 30 प्रतिशत की जगह, मात्र 10 प्रतिशत उत्पाद ही किसानों ने अपने लिए रखा है, तो भी कुछ गड़बड़ है।

यहाँ से हमें एक संकेत मिल सकता है कि क्यों कृषि सुधारों का इतना विरोध हो रहा है। इन सुधारों से ये होगा कि उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के किसान अपनी पसंद का खरीददार चुन सकेंगे और उन्हें पंजाब के व्यापारियों को अपनी धान की फसल नहीं सौंपनी होगी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद स्पष्ट कर देती है कि पंजाब को इसमें विशेष स्थान दिया जा रहा है, जबकि इसी राज्य के किसान कृषि सुधारों का सर्वाधिक विरोध कर रहे हैं। क्या उनके डर का कारण इतनी बड़ी मात्रा में होने वाली खरीद ही है?

यदि पैसों के आँकड़ों में बात करें तो धान खरीद पर व्यय होने वाले कुल 60,038.68 करोड़ रुपये में से मोदी सरकार ने अकेले पंजाब से धान खरीदने में 38,280.66 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इतने रुपये मात्र 1,888 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर धान खरीदने में खर्च हुए हैं।

इसके अतिरिक्त केंद्र को मंडी शुल्क, विकास शुल्क और आड़तिया कमीशन (कमिशन एजेंट को) भी देना पड़ता है जो अकेले पंजाब में 8.5 प्रतिशत है। दूसरे राज्यों में नोडल एजेंसी एफसीआई द्वारा किए जाने वाले ये भुगतान कम हैं। इसके ऊपर आप परिवहन और लोडिंग (माल चढ़ाना और उतारना) मूल्य को भी जोड़ लें।

केंद्र किसानों से एमएसपी पर फसल इसलिए खरीदती है ताकि सूखा, बाढ़ आदि आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सरकार के पास खाद्य भंडार रहे। इसके अलावा इस खरीद का उपयोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से निर्धनों को राशन वितरित करने के लिए भी होता है।

1 जुलाई 2020 तक गरीब कल्याण योजना की प्रगति

इस वर्ष जब कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण अर्थव्यवस्था धीमी है, तब सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से इसी भंडार का उपयोग कर लोगों को 1 करोड़ टन अनाज, विशेषकर गरीबी रेखा के नीचे आने वालों को गेहूँ और चावल पहुँचाया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जब पंजाब के किसान दिल्ली की सीमाओं पर सप्ताह भर से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं और रेल पटरियों पर कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं, उसी बीच सरकार ने पूरे देश की खरीद का दो-तिहाई भाग अकेले पंजाब से खरीदा।

मोदी सरकार किसानों के लिए जो सुधार लाई है, वे किसानों को अनुमति देते हैं कि वे अपने पसंद के किसी भी खरीददार को उत्पाद बेच सकें और साथ ही कृषि उत्पाद बाज़ार समिति (एपीएमसी) का अस्तित्व भी विकल्प के रूप में बनाए रखते हैं।

धान के अलावा मोदी सरकार ने भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के माध्यम से पंजाब से कपास भी खरीदा है। इसका राज्यवार डाटा उपलब्ध नहीं है लेकिन कुल 29 लाख गट्ठर (प्रत्येक 170 किलोग्राम के) सीसीआई ने खरीदे हैं जिससे 5.81 लाख लाभार्थी किसानों को कुल 8,515.53 करोड़ रुपये की राशि मिली है।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि  @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।