अर्थव्यवस्था
कृषि कानून-विरोधी आंदोलन के बीच पंजाब का तीन-चौथाई गेहूँ बिका एमएसपी पर

छह महीने से अधिक समय से जारी कृषि कानून-विरोधी आंदोलन के बीच गेहूँ की अब तक की सर्वाधिक खरीद केंद्र सरकार ने की है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डाटा के अनुसार 31 मई तक 407.8 लाख मेट्रिक टन (एलएमटी) गेहूँ खरीदा गया।

यह पहली बार है जब गेहूँ की खरीद 400 एलएमटी को पार कर गई। रबी खरीद मौसम 2020-21 में 390 एलएमटी गेहूँ की खरीद हुई थी और 2019-20 में 341 एलएमटी जो लगातार तीन वर्षों से वृद्धि के ट्रेंड को दर्शाता है।

इस ट्रेंड में एक रोचक बात यह है कि खरीद में किसान आंदोलन प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। 132.1 एलएमटी गेहूँ खरीद के साथ पंजाब पहले स्थान पर है जबकि पिछले वर्ष यह दर्जा मध्य प्रदेश को मिला था।

इस वर्ष मध्य प्रदेश से अब तक 127.7 एलएमटी और हरियाणा से लगभग 85 एलएमटी गेहूँ खरीदा गया है। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से यह आँकड़ा क्रमशः 129 एलएमटी, 127 एलएमटी और 74 एलएमटी का था।

कृषि मंत्रालय द्वारा 24 फरवरी को जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में 10.924 करोड़ मेट्रिक टन गेहूँ उत्पादन का अनुमान लगाया गया था जो कि 10.8 करोड़ टन के तय लक्ष्य से अधिक है। इस प्रकार देश के कुल उत्पादन का 37 प्रतिशत लगभग सरकार खरीद चुकी है।

2019-20 में पंजाब में लगभग 35 लाख हेक्टेयर के क्षेत्रफल में गेहूँ की खेती की गई थी, वहीं मध्य प्रदेश में गेहूँ खेती का क्षेत्रफल पंजाब का लगभग तीन गुना है। मध्य प्रदेश में 2019-20 में 102 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूँ की फसल हुई।

देशभर में कुल 330 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूँ बोया गया था यानी क्षेत्रफल में 31 प्रतिशत योगदान मध्य प्रदेश का रहा जबकि मात्र 10.6 प्रतिशत पंजाब का। पंजाब में उत्पादकता मध्य प्रदेश से डेढ़ गुना अधिक है और इस अनुमान ने मध्य प्रदेश का उत्पादन पंजाब से दोगुना होना चाहिए।

हालाँकि, डाटा दर्शाता है कि 2019-20 में मध्य प्रदेश ने 185 एलएमटी गेहूँ का उत्पादन करके पंजाब के 182 एलएमटी को पीछे कर दिया। संभवतः इसी के फल स्वरूप 2020-21 की खरीद में मध्य प्रदेश अव्वल रहा। हालाँकि देश में सर्वाधिक गेहूँ का उत्पादन उत्तर प्रदेश करता है।

इसके बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के मामले में उत्तर प्रदेश को प्राथमिकता नहीं दी जाती है। इस वर्ष मात्र 39.5 एमएलटी गेहूँ उत्तर प्रदेश से खरीदा गया है जबकि 2019-20 में उत्तर प्रदेश ने कम-से-कम 320 एलएमटी गेहूँ का उत्पादन किया था।

ऐसे में देश भर में जहाँ औसत रूप से मात्र 6 प्रतिशत किसान एमएसपी का लाभ उठा पाते हैं, वहाँ पर उत्तर प्रदेश का लगभग 10 प्रतिशत गेहूँ एमएसपी पर खरीदा जाता है लेकिन पंजाब का लगभग तीन-चौथाई गेहूँ एमएसपी पर खरीद लिया जाता है।

सरकारी खरीद पोर्टल के अनुसार पंजाब में 12-13 लाख गेहूँ किसान हैं और लगभग सभी अपना उत्पाद एमएसपी पर बेच पाते हैं। कुछ मात्रा में वे अनाज को अपने उपयोग के लिए रख लेते हैं या निजी खरीददारों को बेच देते हैं।

वहीं, मध्य प्रदेश में निजी खिलाड़ियों की भीड़ अधिक रहती है क्योंकि वहाँ के गेहूँ की गुणवत्ता को अच्छा माना जाता है। हालाँकि पिछले वर्ष कोविड-19 के कारण निजी क्षेत्र का व्यापार मंद रहा था जिसके कारण मध्य प्रदेश के लगभग 81 प्रतिशत गेहूँ किसान मंडियों में पहुँचे थे।

एमएसपी खरीद की असमानताओं के अपने ऐतिहासिक कारण हैं लेकिन पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। एमएसपी और इस वर्ष से शुरू हुए प्रत्यक्ष लाभांतरण (डीबीटी) के बावजूद किसानों के आंदोलन का तुक नहीं समझ आता।

सिर्फ गेहूँ खरीद नहीं बल्कि 1 अक्टूबर 2020 से शुरू हुए खरीफ खरीद मौसम में भी पंजाब को इसी तरह की प्राथमिकता दी गई थी। 31 मई तक देश भर से कुल 531.85 एलएमटी चावल खरीदा गया जिसमें 135.89 एलएमटी अकेले पंजाब से खरीदा गया।

चावल खरीद में भी पंजाब सभी राज्यों से आगे रहा जबकि एक बड़े अंतर के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर रहा जो पंजाब के आधे से भी कम- 66.67 एलएमटी चावल एमएसपी पर एफसीआई को बेच पाया। ऐसा ही कपास की सरकारी खरीद के साथ भी है।

सरकार ने कुल 90 लाख कपास के गट्ठर (प्रत्येक का वजन 170 किलोग्राम) खरीदे जिनमें से 5.38 लाख पंजाब से खरीदे गए। बड़ी बात यह नहीं है क्योंकि हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और ओडिशा से इससे काफी अधिक मात्रा में कपास खरीदा गया।

बड़ी बात यह है कि भारतीय कपास संघ ने अनुमान लगाया था कि देश में कुल 356 लाख कपास गट्ठर का उत्पादन होगा जिसमें से 10.5 लाख गट्ठरों का उत्पादन में होगा यानी पंजाब के कुल उत्पादन का आधे से अधिक भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने एमएसपी पर खरीद लिया।

इस प्रकार तीन कृषि कानूनों के आने के बाद भी पंजाब की सरकारी खरीद में कोई कमी नहीं आई है, उल्टा यह बढ़ी है। हालाँकि, तीनों कानून अभी के लिए स्थगित कर दिए गए हैं लेकिन उनके लागू हो जाने से भी निकट भविष्य में एमएसपी खरीद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।