अर्थव्यवस्था
किसानों को सीधी आय देने का प्रावधान खेल परिवर्तक सिद्ध होगा
आशुचित्र- इस कदम से उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के 5 करोड़ किसानों को लाऊ मिलेगा और ये तीन प्रदेश ही लोकसभा में 168 प्रतिनिधि भेजते हैं।
आखिरकार, अरुण जेटली की जगह खड़े हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 2019-2020 के अंतरिम बजट के दौरान यह घोषणा की कि केंद्र सरकार उन किसानों को 6000 रुपये प्रति वर्ष की वित्तीय सहायता देगी जिनके पास 5 एकड़ से कम ज़मीन है।
इस योजना के तहत आय की पहली किश्त इसी वित्तीय वर्ष 31 मार्च से पहले किसानों को दी जाएगी। दूसरी और तीसरी किश्त की रकम का भुगतान अगले वित्त वर्ष में होगा, जो कि अप्रैल में शुरू होगा।
इसी हफ्ते, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हवा में तीर चलते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी फिर सत्ता में आई तो वह समाज के गरीब तबके को न्यूनतम आय प्रदान करेगी।
हालाँकि, ना तो गांधी ने कोई निश्चित राशि बताई, और ना ही यह बताया की उस गरीब तबके में कौन-कौन आएगा और किस-किस को वह न्यूनतम आय प्राप्त होगी।
एक लेख में स्वराज्य ने केंद्र को दो विकल्पों का सुझाव दिया था कि किस तरह वह किसानों को मदद कर सकती है। जिनमें से पहला विकल्प यह था कि केंद्र किसानों को वित्तीय सहायता दे, जैसे तेलंगाना सरकार, प्रति एकड़ पर 8000 रुपये प्रति वर्ष किसानों को देती है। इस प्रावधान के तहत तेलंगाना सरकार अपने राज्य के 58 लाख किसानों की मदद कर रही है।
ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी सरकार ने तेलंगाना सरकार का मॉडल लिया है और उसे थोड़ी हद तक बदल दिया है।
पहली बात यह कि वित्तीय सहायता उन किसानों को मिलेगी जिनके पास 5 एकड़ से कम ज़मीन है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह प्रावधान देश के 12 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाएगा।
2015-16 की कृषि जनगणना के अनुसार, देश के 86 प्रतिशत सूक्ष्म और छोटे किसान हैं जिनके पास 5 एकड़ से भी कम ज़मीन है। हालाँकि यह किसान देश के 47.3 प्रतिशत फसल क्षेत्र के उत्तरदायी है।
अगर आप इन छोटे और सूक्ष्म किसानों की गिनती की तरफ राज्यनुसार देखेंगे तो दिखेगा की कितने अच्छे ढंग से मोदी सरकार ने हिसाब लगाया है। तथ्य यह बताते हैं कि, उत्तर प्रदेश में इन किसानों की गिनती 2.38 करोड़ है, और बिहार और महाराष्ट्र में 1.64 और 1.47 करोड़ है।
राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रावधान किसानों को आत्महत्या करने से रोकेगा। हालाँकि किसान आत्महत्या के पीछे और भी बहुत कारण है।
5.45 लाख गांवों को ओडीएफ बनाने से लेकर गांवों के लोगों के लिए रसोई गैस पहुंचाना और अब यह प्रत्यक्ष आय का प्रावधान एनडीए के लिए लाभकारी साबित होगा आने वाले लोक-सभा चुनावों में, जो कि इसी साल मई में होंगे।
यह घोषणा बाकी सब्सिडियों पर अभी शांत है जो पहले से देश भर के किसानों को दी जाती है। माना जा सकता है कि अभी बाकी सब्सिडियों को छुआ ना हो।
प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के लिए, पीयूष गोयल ने दो प्रतिशत की ब्याज दर की माफी का प्रावधान भी किसानों के हक में लिया है।  इससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के किसानों को बहुत मदद मिलेगी।
अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सरकार किसानों को समय पर लोन और ब्याज के भुगतान के लिए प्रोत्साहित कर रही है। समय पर लोन राशि और ब्याज पर भुगतान करने वाले किसानों को 3 प्रतिशत ब्याज दर में माफी मिलेगी, जो कि समय पर भुगतान करने वाले किसानों के लिए बहुत हितकारी बात है।
दूसरी महत्त्वपूर्ण घोषणा इस अंतरिम बजट में कि, लम्बे समय से चले आ रहे मछली-पालन विभाग के हित में। अब तक मछली-पालन छेत्र पशुपालन विभाग में आता था।
एक अलग विभाग का मतलब इस क्षेत्र पर ज़्यादा सूक्ष्म ध्यान, और यह बाकी देशों से होने वाली व्यापारिक रुकावटों से लड़ने के लिए भी मददगार रहेगा।
सीफूड क्षेत्र आज का सबसे लाभकारी उद्योग है, पिछले वर्ष इससे 7.8 बिलियन डॉलर कमाए इसके निर्यात से, तो मछली-पालन के लिए एक नया विभाग बहुत ही उचित कदम है।
केंद्र ने पशुपालन और मछली-पालन छेत्र में भी कामगारों के लिए दो प्रतिशत की छूट ब्याज दर में दी है, जो की पशुपालक किसानों और मछुआरों के लिए मददगार साबित होंगी।
750 करोड़ राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए जिसमें गायों के पैदावार और उनकी उत्पादकता बढ़ाई जाएगी। दूसरे उपक्रम जैसे राष्ट्रीय कामधेनु आयोग जिसमें गायों की नस्ल पर ध्यान दिया जाएगा, यह सभी भाजपा की विचारधारा से मेल खाता है।
अगर अंतरिम बजट में कर राहत इतना अच्छा कारक है, तो कृषि और किसानों के हक में उठाए गये, कदम भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाएंगे।
जितनी भी विपक्ष और कांग्रेस मोदी सरकार की आलोचना कर रही थी,  वित्त मंत्री की प्रतिक्रियाओं ने सबको हक्का-बक्का कर दिया।