अर्थव्यवस्था
पीएलआई योजना की अवधि बढ़ाने की मोबाइल, दूरसंचार उपकरण निर्माता उठा रहे माँग

17 फरवरी को भारत सरकार ने दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के विनिर्माण के लिए 12,195 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की घोषणा की थी जिसे 1 अप्रैल से क्रियान्वित होना था लेकिन कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के बीच कंपनियाँ इसके लिए तैयार नहीं दिख रहीं।

वहीं, 1 अप्रैल 2020 को शुरू हुई मोबाइल विनिर्माण पीएलआई योजना के साथ भी ऐसा ही है। इस कारण से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है योजना का शुरुआती वित्तीय वर्ष 2021 की बजाय 2022 कर दिया जाए।

19 मई को पत्र लिखकर उद्योग ने महामारी के कारण कुशलतापूर्वक काम न कर पाने की ओर मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया था। इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स असोसिएशन ने अपने पत्र में कहा था कि उद्योग को अधिकतम आठ माह ही मिलेंगे इस वर्ष का लक्ष्य पूरा करने में जो बहुत कठिन होगा।

इस योजना में 16 प्रस्तावों को सरकार ने चयनित किया था। हालाँकि, 16 स्मार्टफोन कंपनियों में से सैमसंग ही एकमात्र ऐसी कंपनी है जो वित्तीय वर्ष 2021 के लिए अपना लक्ष्य पूरा कर पाई है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे भारत में संयंत्र या मशीनरी नहीं लानी थी, वह पहले से ही थी।

लेकिन सरकार सैमसंग का उदाहरण देकर ही उद्योग की माँग को इनकार कर रही है। योजना के अनुसार लाभ लेने के लिए आधार वर्ष के ऊपर उत्पादन मूल्य प्रथम वर्ष में 4,000 करोड़ रुपये और द्वितीय वर्ष में 8,000 करोड़ रुपये बढ़ाना है।

यदि वित्तीय वर्ष 2022 को आधार वर्ष मानने के लिए सरकार तैयार हो जाती है तो कंपनियों को इस वर्ष 4,000 करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन करना होगा लेकिन यदि सरकार तैयार नहीं होती है तो 8,000 करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन करना होगा जो कंपनियों के अनुसार महामारी के बीच कठिन होगा।

स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र

योजना का लाभ उठाने के लिए तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम वर्ष में उत्पादन मूल्य क्रमशः 15,000 करोड़ रुपये, 20,000 करोड़ रुपये और 25,000 करोड़ रुपये बढ़ना चाहिए। भारतीय कंपनियों को योजना का लाभ उठाने के लिए शुरू में 500 करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन और 50 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।

36,440 करोड़ रुपये की योजना के लिए सरकार ने ऐप्पल आईफोन के ठेका विनिर्माताओं- फॉक्सकॉन हॉन हाय, विस्ट्रोन और पेगाट्रोन, सेमसंग और राइज़िंग स्टार को चुना था। वहीं, लावा, माइक्रोमैक्स, पैडगेट इलेक्ट्रॉनिक्स, यूटीएल नियोलिंक्स और ऑप्टीमस इलेक्ट्रनिक्स जैसी भारतीय कंपनियों को भी चुना गया है।

अप्रैल में आई रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल विनिर्माताओं ने दिसंबर 2020 तिमाही में 1,300 करोड़ का निवेश करके 35,000 करोड़ रुपये के उत्पाद बनाए। वहीं, दूरसंचार उपकरणों की पीएलआई योजना में कंपनियों को आशा नहीं है कि वे अगली तिमाही में भी उत्पादन शुरू कर पाएँगे।

दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रोत्साहन की आधारभूत संरचना और इच्छुक कंपनियों के नामों की घोषणा की जा चुकी है। हालाँकि, कंपनियों को अपेक्षा नहीं है कि जुलाई से पहले उन्हें स्वीकृति पत्र प्राप्त होंगे क्योंकि चयन प्रक्रिया में समय लगेगा।

वहीं, अधिकारी का कहना है कि दिशानिर्देश अंतिम चरणों में हैं व शीघ्र ही जारी कर दिए जाएँगे। पिछले कुछ सप्ताह में कोविड-19 के अत्यधिक फैलते संक्रमण के कारण विभाग का काम तय समय से पीछे चल रहा है।

ऐसे में सिस्को, सिएना, सैमसंग, फॉक्सकॉन, फ्लेक्स, नोकिया और एरिकसन जैसी कंपनियों को भय है कि इस देरी के कारण वे वित्तीय वर्ष के चार माह खो देंगे और इस प्रकार तय लक्ष्य को पूरा कर पाना उनके लिए कठिन हो जाएगा।

भारत में नोकिया कार्यालय

अंतिम दिशानिर्देशों के बिना कंपनियाँ स्थानीय विनिर्माण के लिए योजना भी नहीं बना पा रही हैं। दिशानिर्देश के बाद ही वे व्यापार संभावनाओं को समझकर अपनी उत्पादना प्रतिबद्धता प्रकट कर सकते हैं। हालाँकि, अधिकारी ने उद्योग की इस चिंता पर कोई टिप्पणी नहीं की।

दूरसंचार मंत्रालय ने अप्रैल में जानकारी दी थी कि एरिकसन और नोकिया भारत में अपने वर्तमान परिचालनों का विस्तार करके वैश्विक आपूर्ति शृंखला में योगदान देना चाहते हैं। वहीं, सैमसंग, सिस्को, सिएना और जबिल यूएसए, फॉक्सकॉन ताइवान, सनमिना यूएसए, फ्लेक्स यूएसए जैसे विनिर्माता अपनी इकाइयाँ भारत में स्थापित करना चाहते हैं।

एचएफसीएल, कोरल टेलीकॉम, स्टरलाइट, डिक्सॉन और वीवीडीएन टेक्नॉलोजी जैसी भारतीय कंपनियाँ भी अपनी सुविधाओं का विस्तार कर करना चाहती हैं। पीएलआई योजना के तहत वृद्धिशील उत्पादन का 4-6 प्रतिशत प्रोत्साहन के रूप में कंपनियों को मिलेगा।

लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए 4-7 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन तय किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थापित कंपनियों को इस योजना में कम सहयोग मिलेगा क्योंकि नई कंपनियाँ शून्य से शुरू करेंगी और उनके लिए हर उत्पादन वृद्धिशील उत्पादन की श्रेणी में ही गिना जाएगा जिससे उन्हें आसानी से सब्सिडी मिल जाएगी।

सरकार को अपेक्षा है कि इस योजना से 3,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और 2.4 लाख करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन होगा। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 40,000 लोगों को रोजगार मिलने व 17,000 करोड़ रुपये के कर राजस्व आय की संभवाना भी सरकार ने व्यक्त की है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।