अर्थव्यवस्था
लिथियम-आयन बैटरी को पीएलआई से मिलने वाले प्रोत्साहन का लाभ कैसे उठा रहा टाटा

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन के लिए जो प्रोत्साहन दिया जा रहा है वह लिथियम-आयन बैटरी के बिना निरर्थक है। संभवतः इसी सोच के साथ सरकार ने उन्नत रसायन सेल (एसीसी) के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 18,000 करोड़ रुपये दिए हैं।

स्वराज्य ने पड़ताल की तो पाया कि कई कंपनियाँ हैं जो सरकार की इस योजना के माध्यम से सब्सिडी का लाभ उठाकर लिथियम-आयन बैटरी के विनिर्माण में विस्तार करना चाहती हैं। इनमें से एक है टाटा केमिकल्स लिमिटेड जो पिछले वर्ष ही गुजरात के ढोलेरा में इस परियोजना के लिए 127 एकड़ की भूमि अधिग्रहित कर चुका है।

लगभग 4,000 करोड़ रुपये के निवेश से लिथियम-आयन बैटरी के विनिर्माण के लिए संयंत्र लगेगा जिसमें से 1,000 करोड़ रुपये पहले चरण पर खर्च किए जाएँगे। तकनीक के विकास के लिए पुणे स्थित केंद्र पर काम चल रहा था, साथ ही बैटरी वाहनों के लिए उपयुक्त हो इसके लिए दो-पहिया, तीन-पहिया और चार-पहिया वाहन कंपनियों से भी टाटा समूह संपर्क में था।

कंपनियाँ चाहती हैं कि अगले दो वर्षों में वे विनिर्माण शुरू कर सकें और टाटा का लक्ष्य है कि सरकारी सहायता का लाभ उठाकर वह सेल का निर्यातक भी बन सके। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण टाटा केमिकल्स अपनी योजना पर आगे नहीं बढ़ा पाई थी, इस विकास से परिचित लोगों ने लाइवमिंट  को बताया।

लिथियम आयन बैटरी में सबसे बड़ी चुनौती रीसाइकलिंग और पदार्थ पुनः प्राप्ति की होती है। वर्ल्ड बैंक के एक अधिकारी के अनुसार कंपनियाँ पीएलआई योजना से उत्साहित हैं लेकिन कच्चे माल की आपूर्ति चुनौती बनी रहेगी। “50-60 प्रतिशत काम भारत में हो सकता है लेकिन कच्चे माल का आयात करना पड़ेगा।”, मज़ूमदार ने कहा।

वर्तमान में भारत के अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता बैटरी का आयात चीन से करते हैं जो विश्व की सबसे बड़ी लिथियम-आयन बैटरी निर्माता है। गलवान झड़प के बाद से चीन के साथ व्यापार पर सख्ती बरतने के लिए सरकार ने कई नियम पास किए और देश में ही विनिर्माण प्रोत्साहित करने के लिए 10 नए क्षेत्रों को पीएलआई योजना के अधीन लाया गया।

“21वीं सदी के कई वैश्विक विकास क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, अक्षय ऊर्जा में एसीसी बैटरी विनिर्माण सबसे बड़े आर्थिक अवसरों में से एक है। पीएलआई योजना से बड़ी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को देश में एसीसी बैटरी स्थापित करने का प्रोत्साहन मिलेगा।”, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा।

अमिताभ कांत

पीएलआई योजना के तहत कुल 50 गीगावाट आर क्षमता के एसीसी बैटरी विनिर्माण को सरकारी सब्सिडी मिलेगी जिसमें एक लाभार्थी अधिकतम 20 गीगावाट आर की विनिर्माण क्षमता विकसित कर सकता है। ऐसे में टाटा केमिकल्स जो ढोलेरा में 10 गीगावाट आर का संयंत्र लगाने की योजना में है, वह इस दायरे में आकर लाभान्वित हो सकता है।

रीसाइकलिंग की समस्या को भी टाटा केमिकल्स सुलझाने में सफल हो रही है। वह भारत की एकमात्र कंपनी है जिसने रीसाइकल का काम शुरू किया है। कोबाल्ट सल्फेट और लिथियम कार्बोनेट के रूप में वह पदार्थ की पुनः प्राप्ति करती है। ढोलरा में ही यह सुविधा भी होगी।

बड़ी कंपनियाँ विकसित हों इसलिए सरकार ने न्यूनतम क्षमता सीमा 5 गीगावाट आर की रखी है जो 5 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में स्वराज्य  ने एचबीएल पावर सिस्टम लिमिटेड से बात की तो पाया कि 5 गीगावाट आर की सीमा के कारण वे पीएलआई योजना के लिए कार्य करना “एक बड़ा खतरा” मानते हैं।

ई-मेल के माध्यम से स्वराज्य  को उत्तर में एचबीएल के अध्यक्ष व प्रबंधन निदेशक डॉ एजे प्रसाद ने बताया कि बड़ी कंपनियाँ ही पीएलआई का लाभ उठा पाएँगी। हालाँकि एचबीएल बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी बनाने के लिए छोटा संयंत्र स्थापित कर रहा है जो अप्रिल 2021 तक शुरू हो जाना चाहिए। उन्हें आशा है कि वे ऐसा करने वाली भारत की पहली कंपनी बन सकेंगे।

अपेक्षा की जा रही थी कि एक्साइड बैटरीज़ और अमर राजा भी पीएलआई योजना से प्रोत्साहित होकर लिथियम-आयन बैटरी विनिर्माण में आगे बढ़ेंगे लेकिन संवाददाता ने अमर राजा के जन संपर्क विभाग से बात कर पाया कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है। हालाँकि इसका कारण उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है।

एक्साइड के कार्यालय में संपर्क करके स्वराज्य को कोई जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन पिछले सप्ताह ही एक्साइड ने स्विस कंपनी लेकलैन्चे के साथ संयुक्त उद्यम में 33.17 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करके अपनी भागीदारी 80.15 प्रतिशत कर ली है। यह संयुक्त उद्यम लिथियम-आयन बैटरी के लिए ही है जो इस दिशा में कंपनी की रुचि को दर्शाता है।

इस क्षेत्र में पीएलआई योजना के क्रियान्वयन का कार्यभार नीति आयोग पर है। पिछले वर्ष कांत ने ढोलेरा को बैटरी विनिर्माण का केंद्र बनाने की बात की थी। इसके अलावा गुजरात के ही हंसलपुर में सुज़ुकी मोटर्स, तोशिबा और डेन्सो का संयुक्त लिथियम-आयन बैटरी संयंत्र प्रस्तावित है जो विश्व में सबसे बड़ा हो सकता है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।