अर्थव्यवस्था
कैसे पैन और आधार में विनिमय भारत की कर क्षमता को बढ़ा सकता है

आशुचित्र- अगर हर आधार क्रमांक के साथ मुफ्त में पैन दिया जाए तो भारत के पास प्रत्यक्ष करदाताओं का एक अभूतपूर्व डाटा होगा।

आयकर क्रमांक (पैन) और पहचान क्रमांक (आधार) के मध्य की रेखा को मिटाकर भारत कर और सामाजिक स्तर के लिए एक क्रमांक की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अपने बजट अभिभाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा ता कि जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, वे आधार कार्ड के सहारे आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। जहाँ बड़े सामानों जैसे गाड़ियों और आभूषण के क्रय के लिए पैन आवश्यक होता है, वहाँ भी आधार मान्य होगा।

इसे करदाताओं के लिए सुलभता बढ़ाने के प्रयास की तरह देखा जा रहा है। लेकिन वास्तविकता में यह लाखों आधार कार्ड धारकों के लिए पैन क्रमांक निर्मित करेगा जो संभवतः रिटर्न फाइल नहीं कर रहे हैं।

हर बार जब कोई व्सतु के क्रय के लिए आधार कार्ड का उपयोग होगा तो पिछले तौर पर उस धारक के लिए एक पैन क्रमांक निर्मित किया जाएगा और व्यक्ति को भेजा जाएगा। इस प्रकार बिना अधिक प्रयासों के पैन धारकों की संख्या बढ़ती जाएगी। जहाँ आप आधार का प्रयोग करेंगे, वहाँ आपको मुफ्त में पैन मिलेगा।

वहीं दूसरी ओर जो भी राज्य से लाभ लेना चाहता है, उसके लिए आधार अनिवार्य है। और यदि उनके लिए भी पैन क्रमांक उत्पन्न किया जाएगा तो हम एक सामाजिक सुरक्षा क्रमांक की बात कर रहे हैं जहाँ करदाताओं और लाभार्थियों की जानकारी एक मंच पर उपलब्ध होगी।

वित्तीय वर्ष 2017-18 के अंत में भारत में 5.43 करोड़ कर रिटर्न दाखिलकर्ता और 7.41 करोड़ करदाता थे। 36 प्रतिशत करदाताओं ने कर भरा था लेकिन आयकर रिटर्न दाखिल नहीं की थी। इनमें से अधिकांश कर स्रोत पर कटौती से इकट्ठा किए गए होंगे।

बजट वक्तव्य में निर्मला ने कहा कि 2018-19 में 8.44 करोड़ करादाता थे और पुराने अनुपात के अनुसार 2.05 करोड़ करदाताओं ने रिटर्न नहीं भरा होगा। कम से कम पहले चरण में तो पैन बेस में बहुत लोग जुड़ेंगे, जब आधार कार्ड धारकों को पैन क्रमांक आवंटित होंगे।

अगर हर आधार क्रमांक के साथ मुफ्त में पैन दिया जाए तो भारत के पास प्रत्यक्ष करदाताओं का एक अभूतपूर्व डाटा होगा। इसके अच्छे और बुरे निहितार्थों पर नज़र डालते हैं-

भविष्य में जो भी कर देने के योग्य है, उसका कर फुटप्रिंट से बचना असंभव हो जाएगा। कर से बचने का कोई विकल्प नहीं रहेगा, भले ही आप नकद में सारा लेन-देन करते हों, अन्यथा आप प्राथमिक आवश्यकताओं से अधिक कुछ नहीं खरीद रहे।

हर पैन क्रमांक सकारात्मक कर योगदान और ऋणात्मक कर संख्या (सब्सिडी, वृद्धा भत्ता, आदि) दे सकता है और आज के लाभार्थी इससे नेट करदाता वर्ण में जोड़े जा सकेंगे। राज्य के पास पूरा विवरण होगा कि आप कर के रूप में क्या दे रहे हैं और लाभ के रूप में आपको क्या मिल रहा है। यह आपकी नेट कर स्थिति बता पाएगा।

इस प्रकार यदि लाखों व्यापारी और सर्विस करदाता भी आधार के माध्यम से जोड़े गए तो हमारे पास एक छोर से दूसरे छोर तक की जानकारी होगी कि पैसा कहाँ से आ रहा है और जा कहाँ रहा है।

एक अतिरिक्त लाभ- कभी किसी करदाता को यह बोला जा सकता है कि उसकी देय राशि किस गरीब वर्ग की सहायता कर रही है, कुछ उस प्रकार से जैसा कुछ समाजसेवी संस्थान अपने दानकर्ताओं को बताते हैं कि उनकी राशि से कौन-सा बच्चा शिक्षा ग्रहण कर रहा है या कितने लोगों को भोजन मिल रहा है।

आपकी कर राशि कहाँ जा रही है, यह जानकारी अनुपालन के लिए प्रेरित करेगी। जब आपको नहीं पाता कि आपके द्वारा भरा गया कर किसी गरीब की झोली में जा रहा है या किसी नौकरशाह की जेब भर रहा है तो आप कर देने से पहले सोचेंगे। यदि सरकार अपनी योजनाओं की लागत और प्रशासनिक लागत का डाटा सार्वजनिक करेगी तो नागरिक जानेंगे कि कौन-सी योजनाएँ व्यर्थ हैं।

वित्तीय निगरानी के लिए सरकार पैन-आधार विनिमयशीलता स्थापित कर सकती है और करदाताओं को विशेष हितों में योगदान की मीठी बातों से मना सकती है।

भविष्य में संभव हो सकता है कि करदाता विशेष हितों के लिए कर दें, बजाय कर दरों के। इसका अर्थ यह कि हम निम्न अिवार्य कर शासन की ओर जा सकते हैं और नागरिकों से विशेष हितों के लिए अतिरिक्त कर देने को कह सकते हैं।

उदाहरण के लिए यदि आप अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए अधिक कर देना चाहते हैं तो आप सामान्य कर दर के अतिरिक्त ऐसा कर सकते हैं और इस बात को लेकर निश्चित रहेंगे कि आपकी कर राशि किस लिए प्रयुक्त होगी।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।