अर्थव्यवस्था
मुद्रा योजना से उद्यमियों को लाभ- एनबीएफसी ने लक्ष्य से तीन गुना अधिक दिए ऋण

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा व्यापारिक बैंकों से अधिक ऋण देने की दर में वृद्धि हुई है, मिंट  ने रिपोर्ट किया। एनबीएफसी अपने ग्राहकों से जमा स्वीकार नहीं करता और ना ही चेक बुक जारी करता है। एक सामान्य बैंक और एक एनबीएफसी में यही मुख्य अंतर है।

2017-18 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार एनबीएफसी द्वारा दिए गए मुद्रा ऋण में पाँच गुना की वृद्धि हुई है और 2018 वित्तीय वर्ष में यह आँकड़ा 21,562.63 करोड़ रुपए से बढ़ा है। उन्होंने अपने लक्ष्य के अनुसार 9,050 करोड़ रुपए से अधिक का आँकड़ा प्राप्त कर लिया है।

हालाँकि व्यापारिक बैंकों द्वारा दिए गए ऋण का आँकड़ा 92,492.68 करोड़ रुपए का है जो एनबीएफसी के 27,000 करोड़ के आँकड़े से अधिक है लेकिन उनकी वृद्धि दर एनएफबीसी से कम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्यमियों की आर्थिक सहायता के लिए 2015 में मुद्रा योजना शुरू की थी जिससे लाखों नौकरियाँ उत्पन्न की जा सकें। मई 2018 में मोदी ने बताया था कि 12 करोड़ लाभार्थियों को 6 करोड़ रुपए से ज़्यादा का ऋण दिया जा चुका है जिनमें से 28 प्रतिशत पहली बार उद्योग की शुरुआत कर रहे थे।