अर्थव्यवस्था
एमएसपी पर खरीदा गया पंजाब का 50% अनुमानित कपास उत्पाद लेकिन विरोध जारी

झूठा प्रचार किया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार कई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना बंद करने जारी है लेकिन वह अनाज की सरकारी खरीद को उच्चतर स्तर पर लेकर गई है। इसने रिकॉर्ड 50 करोड़ टन धान एमएसपी पर खरीदी है जिसका लाभ 64.24 लाख किसानों को मिला है।

इसके अलावा पूरे देश में उगने वाले अनुमानित कपास के पाँचवें भाग का क्रय भी सरकार ने किया है। पंजाब इसमें सबसे बड़ा लाभार्थी है जहाँ से उत्पादन का 40 प्रतिशत धान खरीद लिया गया है और साथ ही भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा एमएसपी पर कपास के क्रय का भी सबसे बड़ लाभार्थी यही राज्य है।

सीसीआई के (क्रय) महाप्रबंधक अतुल काला के अनुसार 1 अक्टूबर से अब तक पंजाब से एमएसपी पर कपास के 5.3 लाख गट्ठर (प्रत्येक का वजन 170 किलोग्राम) खरीदे गए हैं। इसका अर्थ हुआ कि पंजाब से कपास उत्पादन की जितनी अपेक्षा थी, उसका 50 प्रतिशत एमएसपी पर सीसीआई द्वारा खरीदा गया है।

भारतीय कपास व्यापार का शीर्ष निकाय, भारतीय कपास संघ (सीएआई) के अनुसार देश भर में होने वाले कपास के 356 लाख गट्ठर में से 10.5 लाख का उत्पादन पंजाब में होने की अपेक्षा था। कपास का उत्पादन करने वाले 11 राज्यों में से पंजाब 10वें स्थान पर है।

सीएआई अध्यक्ष अतुल गणतरा ने बताया कि कपास उद्योग का अनुमान था कि इस मौसम में सीसीआई लगभग 125 लाख गट्ठर खरीदेगा। लेकिन काला के अनुसार कल (4 जनवरी) तक सीसीआई ने इस मौसम में 78 लाख गट्ठर खरीदे हैं।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार 2 जनवरी तक 76.6 लाख कपास के गट्ठर खरीदे गए थे जिसका लाभ 14.82 लाख किसानों को मिला है। मंत्रालय ने बताया कि माहाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक से खरीदे गए कपास का मूल्य 22,410 करोड़ रुपये है।

प्रति क्विटल 5,515 रुपये की एमएसपी दर पर जुलाई 2020-जुलाई 2021 के मौसम में कपास की खरीद हो रही है। सीसीआई के बयान के अनुसार 11 कपास उगाने वाले राज्यों के 140 जिलों में निगम ने एमएसपी पर खरीद के लिए 440 केंद्र खोले हैं।

कपास उत्पाद के साथ मंडी में बैठा किसान

कहा जा रहा है कि कपास खरीद पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक है जिसके कारण भारी संख्या में किसान अपना उत्पाद बेचने आ रहे हैं इसलिए उन्हें चरणबद्ध तरीके से आने के लिए कहा गया है। पंजाब में सीसीआई द्वारा कपास की खरीद साक्ष्य है कि राज्य को एमएसपी खरीद में इसके हिस्से से अधिक मिल रहा है।

यह खरीद तब हो रही है जब राज्य के किसान सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि सुधार विधेयकों का महीनों से विरोध कर रहे हैं। ये कानून किसानों को अधिक स्वतंत्रता देते हैं लेकिन कांग्रेस, आम आदमी पार्ची और वामपंथ जैसे विपक्षी दल किसानों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों में यह भ्रम फैला रहे हैं कि इन कानूनों से एमएसपी प्रणाली समाप्त हो जाएगी और लाभ कुछ कॉरपोरेट घरानों को मिलेगा।

विशेष रूप से ये पार्टियाँ कह रही हैं कि अडानी और रिलायंस समूह इन कानूनों का लाभ उठाएँगे लेकिन इन कंपनियों ने सभी आरोपों को नकार दिया है। केंद्र निरंतर किसानों को समझाने का प्रयास कर रही है कि इसमें लाभ उन्हीं का है और ये सुधार किसानों की आय को दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य के अनुकूल ही हैं।

लेकिन निहित स्वार्थों से प्रेरित लोग किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं जिसके कारण दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन का आज 41वाँ दिन हो गया है। राजकोट आधारित कपास का व्यापार करने वाले आनंद पोपट के अनुसार अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात में कपास की सरकारी खरीद कम हुई है।

“इसके दो कारण हैं। एक तो सीसीआई खरीद का गुजरात के लिए दैनिक आरक्षित भाग जल्दी समाप्त हो जाता है। दूसरा यह कि खरीददार सीधे किसानों के खेत पर जाकर ही अपनी आवश्यकतानुसार उत्पाद खरीद ले रहे हैं।”, उन्होंने कहा।

सीसीआई वेबसाइट मुखपृष्ठ

सीसीआई के काला का कहना है कि निजी कंपनियाँ कपास के लिए एमएसपी से अधिक मूल्य दे रही हैं, ऐसे में हो सकता है कि निगम को अपनी खरीद कम करनी पड़े। “सरकारी खरीद कुछ कम हो सकती है क्योंकि निजी खिलाड़ी बेहतर मूल्य प्रस्तावित कर रहे हैं।”, उन्होंने कहा।

“निजी खिलाड़ी कपास को खेत पर आकर 5,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर ले जा रहा हैं।”, पोपट ने बताया। यह दर एमएसपी से थोड़ी कम है लेकिन खेत से ही उत्पाद बिक जाने की दृष्टि से उपयुक्त है क्योंकि परिवहन में भी किसानों का काफी खर्चा हो जाता है।

देश में सर्वाधिक कपास के उत्पादक गुजरात के राजकोट जिले की कृषि उत्पाद व्यापार समिति (एपीएमसी) की मंडियों में कपास की प्रति क्विंटल दर 5,200 से 5,700 रुपये के बीच है। एमसीएक्स में कपास की दर 21,120 प्रति गट्ठर (170 किलोग्राम) है जो कल से 40 रुपये गिरी है।

व्यापार मानकों के अनुसार यदि इसे कैन्डी (356 किलोग्राम) की दर में परिवर्तित किया जाए तो यह 44,225 रुपये होगा। न्यू यॉर्क में कपास की दर 8.5 सेन्ट की उछाल के साथ 78.97 सेंट पर आई यानी प्रति कैन्डी 45,675 रुपये।

भारत के घरेलू मूल्य भी अब वैश्विक ट्रेड को प्रतिबिंबित कर रहे हैं और वियतनाम, बांग्लादे, तुर्की व चीन जैसे देश कपास के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। निर्यात से बड़े भंडारण को कम किया जा सकता है। पिछले वर्ष भारत ने 50 लाख गट्ठर का निर्यात किया, फिर भी 107.5 लाख गट्ठर भंडारण में बच गए।

इस वर्ष 55-60 लाख गट्ठर के अनुमानित निर्यात के बाद 93.5 लाख कपास के गट्ठर भंडारण में बच जाएँगे। कृषि सुधारों के समर्थक कहते आ रहे हैं कि पंजाब के किसानों के विरोध के बावजूद सरकार उन्हें उनके हिस्से से अधिक दे रही है। धान और कपास की सरकारी खरीद, इस दावे के साक्ष्य हैं।