अर्थव्यवस्था
माल्या ने अपनी परेशानियां खुद बढ़ाई हैं: इंडिया आईएनसी उनकी परेशानियों से दो सबक सीख सकती है

प्रसंग
  • एक मजबूत संदेश भेजा जा रहा है कि भारत उन लोगों को क्षमा नहीं करेगा जो बैंकों को धोखा देकर भाग जाते हैं।

दो सबक जो भारत के पूँजीपतियों को मोदी शासन के चार सालों से सीखने चाहिए, ये हैं: यदि आपका व्यवसाय विफल रहता है तो अपनी गलतियों के लिए कुछ भी भुगतान नहीं करने की अपेक्षा न करें। यथासंभव सीमा तक आपकी बकाया राशि वसूलने के लिए इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड है। दूसरा सबक कठोर है: यदि आपके पास पैसा है, और आपके पास भारत में अच्छी संपत्ति है, तो भागने के बारे में सोचिए भी मत। लंदन आपके बचाव में नहीं आएगा।आप और भी गहरे संकट में पड़ जाएंगे।

इस संदर्भ में माल्या का मामला एक उदाहरण है। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने अपने आप को कुछ यूं चित्रित किया कि जैसे वह “बैंक से कर्ज लेने वालों के पोस्टर बॉय” के रूप में सरकार की इच्छा का शिकार हैं।

यह तो होना ही था क्यूँकि उनको यह घमंड था कि लंदन में भारत का क़ानून उनका उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।या ब्रिटिश अदालतें उनकी रक्षा करेंगी चाहे उन्होंने कोई भी कथित अपराध किए हों। ब्रेक्सिट के बाद, ब्रिटिश सरकार अब घमंड नहीं कर सकती है और भारत को यह नहीं बता सकती है की आपकी जेलें बहुत खराब हैं और कानून दोषपूर्ण है।

मोदी सरकार द्वारा माल्या पर बहुपक्षीय हमले,उनके खिलाफ देश लौटने की कार्यवाही शुरू करने, ब्रिटेन में उनकी संपत्ति पर रोक लगाकर अपनी बकाया ऋण राशि वसूलने के लिए भारतीय बैंकों द्वारा सफल नीलामी और भगौड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 यह सुनिश्चित करता है कि माल्या के पास सांस लेने के लिए कम ही जगह बचे।

मई में, भारतीय ऋण रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) के आदेश को पंजीकृत करके माल्या की अंतरराष्ट्रीय संपत्ति को जब्त करने के लिए 13 भारतीय बैंक लंदन में वाणिज्यिक न्यायालय क्वींस बेंच डिवीजन से ऑर्डर प्राप्त करने में सफल रहे।इस महीने, एक अपील कोर्ट ने उन्हें उस आदेश को चुनौती देने की अनुमति से इंकार कर दिया और कहा कि उनकी अपील में “सफलता की कोई वास्तविक संभावना नहीं” थी।माल्या ने दावा किया था कि ब्रिटेन में ऋण वसूली पर बेंगलुरू डीआरटी के आदेश लागू नहीं किए जा सकते थे।

अब, भगौड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक का उपयोग कर प्रवर्तन निदेशालय भारतीय अदालतों से भारत में उनकी संपत्ति जब्त करने को कह रहे हैं,अब माल्या के पास केवल दो ही विकल्प बाकी हैं: पहला है अदालत के सभी आदेशों को अंदेखा कर और उमीद करें की उनके वकील इस मुद्दे को यथासंभव लंबे समय तक खींचने में कामयाब हो, और दूसरा भारत लौटकर संभवतः कुछ समय के लिए जेल जाए और उसके बाद कानूनी रूप से अपने मामलों और ऋण वसूली प्रक्रियाओं से हुए जमानत लेने की कोशिश करें।

माल्या ने भारत से भाग करबहुत बड़ी गलती की, 2016 की शुरुआत में, उनको उनके द्वारा की गई ऋण धोखाधड़ी और बैंक राशि को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के आरोप  गिरफ्तारकिया जा सकता था। देश में सरकार को बड़ी राजनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा,यहां तक कि उनके ऋण और अवैधताओं पर कड़ी कार्यवाही करते हुए मोदी सरकार ने उन्हें ब्रिटेन से प्रत्यर्पित करने के लिए सारे प्रयास किए। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम तब और अधिक अनिवार्य हो गया जब पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी के चलते दो और व्यवसायी,नीरव मोदी और मेहुल चोकसी,देश से भाग गए।

अधिनियम के तहत, भारतीय एजेंसियां कथित आर्थिक अपराधों के लिए कानून से भाग रहे लोगों की घरेलू संपत्ति को जब्त करने के लिएप्रासंगिकअदालतों में जा सकती हैं।

उनकी इस गलतफहमीं भरी सोच का धन्यवाद कि भारतीय कानून के लंबे हाथ कभी उनको पकड़ नही पाएंगे, जिसकी वजह से माल्या अब अपनी वैश्विक और घरेलू संपत्तियों को जब्त होने असली संभावना का सामना कर रहे हैं।एक विशेष अदालत, जो मनी लॉंडरिंग अधिनियम की रोकथाम के तहत मामलों को सुनती है, ने माल्या को 27 अगस्त तक अदालत के सामने उपस्थित होने के लिए एक सम्मन जारी किया, या फिर उनको भाग्यशाली आर्थिक अपराधियों के कानून के तहत परिणामों का सामना करना पड़ा।

एक विशेष अदालत ने माल्या को 27 अगस्त से पहले उपस्थित होने के लिए एक सम्मन जारी किया, या फिर उनको भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

कुछ समाचार रिपोर्टों से पता चला है कि माल्या पहले से ही भारत लौटने के लिए औरगिरफ्तार होकर पूछताछ होने के बाद जमानत प्राप्त करने के बारे में अधिकारियों से गुप्त रूप से चर्चा कर रहे हैं।

जाहिर है, माल्या केपास कम विकल्प बचे हैंऔर मोदी सरकार को माल्या जैसे एक भगौड़े आर्थिक अपराधी को गिरफ्त में लेकर उसकी पहली सफलता मिल सकती है,यदि वह खुद लौटते हैंतो ठीक नहीं तो वह भारत और विदेशों में अपनी सारी संपत्तियों को को खो बैठेंगे।

वापस लौटना और कानून का सामना करनाउनके अपने हित होगा।भारतीय कानूनी व्यवस्था की धीमी कार्यवाही को देखते हुए, उनके बचने की उमीद कहीं और से ज्यादा यहाँ पर है। लेकिन अगर वह दोषसिद्धि से बचते हैं, तो एक बात निश्चित है: वह अपनी परिसंपत्ति खोकर भारी कीमत चुकाएंगे क्योंकि उन्होंने भागना चुना था।

एक मजबूत संदेश भेजा जा रहा है कि भारत उन लोगों को क्षमा नहीं करेगा जो बैंकों को धोखा देकर भाग जाते हैं।

माल्या,बैंकों को चूना लगाने के लिए एक “पोस्टर बॉय” हो सकते हैं – यहां तक कि एक बलि का बकरा भी,लेकिन वह अपनी इस स्थिति के लिए सिर्फ़ स्वयं को ही दोषी ठहरा सकते हैं।

जगन्नाथस्वराज के संपादकीय निदेशकहैं। वह @TheJaggiपर ट्वीट करते हैं।