अर्थव्यवस्था
रेपो को बचत जमा दर से जोड़कर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने दिया यह संकेत

आशुचित्र- बचत दर की घोषणा के साथ स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से यह संकेत मिलता है।

अगर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) कोई संकेत भेजता है तो उसपर ध्यान देना चाहिए लेकिन यदि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) संकेत देता है तो उसपर और अधिक ध्यान देना चाहिए। इसका अर्थ कुछ अधिक है।

पिछले सप्ताह एसबीआई ने घोषणा की थी कि इसकी बचत दर आरबीआई की रेपो रेट के साथ-साथ चलेगी, वह दर जिसपर बैंक केंद्रीय बैंक से उधार लेते हैं। 1 लाख से ऊपर के बचत जमा पर रेपो रेट से 2.75 प्रतिशत कम ब्याज मिलेगा जो कि वर्तमान में 6.25 प्रतिशत है। इस प्रकार बचत दर 3.5 प्रतिशत है।

ऋण देने पर बैंक का इरादा ब्याज दर को रेपो रेट से 2.25 प्रतिशत अधिक रखने का है जिससे यह 8.5 प्रतिशत होता है। अन्य दरों में सभी चलायमान दरें एमसीएलआर (मार्जिनल मूल्य आधारित ऋणदेय दर) शासन का पालन करती हैं, इससे आए लचीलेपन का प्रभाव धीरे-धीरे कुल ऋणदेय दर पर पड़ेगा।

जहाँ बैंक प्रबंधन ने कहा है कि उनका विचार है कि देनदारी की दरों को ऋण दरों की दरों की तरह लचीला बनाया जाए, वहीं इससे कुछ और संकेत प्राप्त हो रहे हैं।

पहला, एसबीआई खुद को अप्रिल या जून में होने वाली संभावित दर कटौती के लिए तैयार कर रहा है जिसका अर्थ यह है कि बंधी हुई जमा राशि- लगभग एक-तिहाई- पर प्रभाव पड़ेगा और ऋण के दर में कमी आएगी। रेपो रेट की कटौती हो भी सकती है और नहीं भी लेकिन दोनों की ही संभावना बराबर की है क्योंकि मुद्रास्फीति (महंगाई) कम है।

दूसरा, यह तथ्य कि एसबीआई ने बचत दरों से संबंध किया है, जो कि ऋण दर से स्वतंत्र हैं, न कि फिक्स्ड डिपोज़िट दर से जिसका अर्थ यह है कि जमाकर्ता बैंक की अस्थाई दरों को स्वीकार नहीं करेंगे। वे निश्चित दर को पसंद करेंगे, भले ही यह दर कम हो। इसका अर्थ यह हुआ कि एसबीआई की फिक्स्ड डिपोज़िट दर बैंक की खुद की फंड आवश्यकताओं के विश्लेषण पर आधारित होगी, न कि आरबीआई के दर संकेतों पर। देय दरें 1 अप्रिल से अनिवार्य रूप से लचीली हो जाएँगी और बैंक दर या रेपो रेट से सीमित होंगी।

तीसरा, एसबीआई का अनुसरण एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, ऐक्सिस जैसे बड़े निजी बैंक भी करेंगे जो फंड के मूल्य को कम कर लाभ मार्जिन को बढ़ाना चाहते हैं। उसके बाद राष्ट्रीयकृत बैंक बी ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हो जाएँगे क्योंकि सभी को इस चैन की साँस की आवश्यकता है।

एसबीआई की घोषणा का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू लचीले बचत जमा दर और न्यूनतम देय दर में बड़ा अंतर है- यह 5 प्रतिशत जितनी बड़ी संख्या है (3.5 प्रतिशत बचत दर व 8.5 प्रतिशत देय दर)। हालाँकि फिक्स्ड डिपोज़िट दर और बचत का कुल मूल्य कई अधिक होगा लेकिन देय दर के लिए भी यह सत्य है। और इसलिए यह अंतर बड़ा ही रहने वाला है क्योंकि अशोध्य ऋणों से निजात पाने के लिए बैंक अपनी कुल दर अंतर को अधिकाधिक बढ़ाना चाहते हैं।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।