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ई-कॉमर्स बाज़ार 2025 में 120 अरब डॉलर का होगा, समझें ग्लोबलडाटा का विश्लेषण

2020 में भारत में ई-कॉमर्स वृद्धि धीमी पड़ गई थी लेकिन इस वर्ष के लिए अनुमान और 2022 के लिए लगाए जा रहे पूर्वानुमान एक तीव्र वृद्धि का संकेत देते हैं जो 2025 तक जारी रहेगी और फिर समान गति पकड़ लेगी।

लंदन आधारित डाटा और विश्लेषण कंपनी ग्लोबलडाटा के शोध के अनुसार ई-कॉमर्स बिक्री 2021 से 2025 के बीच 18 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 120.1 अरब डॉलर (88 खरब रुपये) हो जाएगी।

कार्ड द्वारा भुगतानों और ग्लोबलडाटा के ई-कॉमर्स विश्लेषकों के अनुसार अब ई-कॉमर्स माध्यम गतिवर्धक रूप से ऊपर जाएगा। 2017 से 2020 के बीच वार्षिक वृद्धि दर 30 प्रतिशत से गिरकर पिछले वर्ष 12 प्रतिशत पर आ गई थी।

इस बार पुनः वृद्धि दर बढ़ेगी और 17 प्रतिशत की दर से बढ़कर बाज़ार 60 अरब डॉलर के आँकड़े को पार कर जाएगा। फिर 2022 में 20 प्रतिशत वृद्धि दर होगी। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कुल मुलाकर उपभोक्ता खर्च घट रहे हैं और अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेंड पर कोविड-19 वैश्विक महामारी की छाप भी है। 2020 में भले ही लहर लंबे समय तक चली थी लेकिन उसका प्रभाव कम पड़ा था लेकिन 2021 में आई दूसरी लहर का शिखर मई में आया था जिसमें दैनिक मामले 4 लाख के पार चले गए थे।

2020 में सरकार ने बचाव को अधिक प्रथमिकता दी थी जिससे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और भीड़भाड़ वाले एवं सार्वजनिक क्षेत्रों को बंद कर दिया गया था। ऐसे समय में कई उपभोक्ताओं ने नए माध्यम चुने और ऑनलाइन क्रय किया।

ग्लोबलडाटा के बैंकिंग और भुगतान क्षेत्र के शीर्ष विश्लेषक रवि शर्मा ने बताया, “कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण कई बाज़ारों में उपभोक्ताओं ने तेज़ी से डिजिटल भुगतानों को चुना, ऐसा ही भारत में भी देखा गया।”

“सामाजिक दूर नियमों और दुकानों के बंद होने पर अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए भी उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन माध्यमों का रुख किया।”, उन्होंने आगे कहा। बढ़ते स्मार्टफोन उपयोग के कारण भारत में ई-कॉमर्स का उज्ज्वल भविष्य है।

बेंगलुरु में स्मार्टफोन का उपयोग करता भारतीय

वर्तमान में स्मार्टफोन 42 प्रतिशत भारतीयों के बीच पैठ बना चुका है जो 2025 तक 51 प्रतिशत हो जाएगा। डिजिटल भारत पर सरकार के ज़ोर के साथ-साथ उपभोक्ताओं के बीच भी डिजिटल साक्षरता बढ़ रही है।

हाल के वर्षों में इंटरनेट के विस्तार, ई-कॉमर्स के प्रति जागरूकता और नकद-रहित भुगतान की स्वीकार्यता बढ़ने के साथ-साथ दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में भी ऑनलाइन खरीददारों की संख्या बढ़ी है।

यूनिकॉमर्स की 2020 की ई-कॉमर्स ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार भारत में दो-तिहाई ऑनलाइन उपभोक्ता माँग दूसरे स्तर और उससे छोटे शहरों से आती है। कोविड के कारण यात्रा और हाउसिंग जैसे क्षेत्र प्रभावित हैं तथा किराना, इलेक्ट्कॉनिक्स और स्वास्थ्य सुविधा जैसे खुदरा सामानों की ऑनलाइन खरीद बढ़ी है।

भुगतान माध्यम

ग्लोबलडाटा का विश्लेषण रेखांकित करता है कि फ्लिपकार्ट, अमेज़ॉन और बिगबास्केट जैसे ई-कॉमर्स बाज़ार के बड़े खिलाड़ियों ने देखा कि जब से महामारी शुरू हुई, तब से हर माह उनकी ऑर्डर संख्या में वृद्धि हो रही है।

अपने उपभोक्ता आधार को बढ़ाने के लिए इन मंचों ने डिजिटल भुगतान विकल्पों को भी बढ़ाया है। उदाहरण स्वरूप, 30 करोड़ पंजीकृत उपभोक्ताओं वाले फ्लिपकार्ट ने डिलिवरी के समय क्यूआर कोड आधारित भुगतान को लागू किया।

फ्लिपकार्ट के वित्त-तकनीक और भुगतान समूह के प्रमुख रणजीत बोयनपल्ली ने बताया, “डिलिवरी के समय भुगतान तकनीक से उपभोक्ताओं को मन की शांति मिलती है और इसी के साथ वे अपनी घर की सुरक्षा से खरीददारी कर पाते हैं।”

इसी प्रकार बाद में भुगतान का विकल्प भी भारत में लोकप्रिय होता जा रहा है। अमेज़ॉन के पे लेटर के 20 लाख उपभोक्ता हैं। इसकी शुरुआत अप्रैल 2020 में हुई थी और यह उपभोक्ताओं को खरीददारी करने के बाद किश्तों में भुगतान करने की अनुमति देता है।

इसी प्रकार ईपेलेटर और लेज़ीपे जैसी भुगतान सेवाएँ भी ऐसा सुविधाएँ देती हैं। ग्लोबलडाटा के शर्मा ने बताया कि महामारी के कारण डिजिटल भुगतान की ओर भारत तेज़ी से बढ़ा है जिससे ई-कॉमर्स को नए उपभोक्ता और व्यापारी मिले हैं।

उन्होंने आगे कहा, “ऑनलाइन खरीददारी को उपभोक्ता प्राथमिकता देने लगे हैं, ई-खुदरा व्यापारियों की संख्या बढ़ी है और नई भुगतान प्रणालियों के आने के साथ-साथ वृद्धि जारी है।” यूनिकॉमर्स के अनुसार भारत के भीतरी क्षेत्रों से ई-कॉमर्स को सर्वाधिक वृद्धि मिल रही है।

छोटे शहरों में युवा भारतीय उपभोक्ता इस वृद्धि के परिचालक बने हुए हैं और तीसरे स्तर तथा उससे छोटे शहर वृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। ग्लोबलडाटा की रिपोर्ट उज्ज्वल भविष्य को चित्रित करती है लेकिन इंडो-अमेरिकन चैम्बर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) ने एक चिंता व्यक्त की है।

आईएसीसी का कहना है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के उद्देश्य से उपभोक्ता सुरक्षा (ई-कॉमर्स) नियम 2020 में नियोजित परिवर्तन ई-कॉमर्स व्यापार पर कुछ लगाम कस सकते हैं जो क्षेत्र के लिए हानिकर होगा।

आईएसीसी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ ललित भसीन ने उपभोक्ता मामले मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनुपम मिश्रा को 2 जुलाई को पत्र लिखकर कहा था, “इस प्रयास से वैश्विक रूप से निवेशकों की भावना प्रभावित होगी, विशेषकर देश में ईज़ ऑफ डुइंग बिज़नेस की दृष्टि से।”