अर्थव्यवस्था
कंपोज़िट स्कीम से एमएसएमई राहत- जीएसटी परिषद बैठक के मुख्य बिंदु
हाल ही में 10 जनवरी 2019 (गुरुवार) को संपन्न हुई जीएसटी परिषद की बैठक में दूरगामी परिणाम वाले महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों की घोषणा की गई है।
हालाँकि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में संवैधानिक निकाय ने एमएसएमई पर अनुपालन बोझ को दूर करने के लिए व्यापक उपाय किए लेकिन अभी भी सीमेंट और निर्माणाधीन फ्लैटों पर कर की दरों में कमी जैसे प्रमुख मुद्दों पर सर्वसम्मति नहीं बनी है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के ‘सर्विसेज़’ के हिस्से को भी इसका उचित हिस्सा मिला। जीएसटी परिषद ने केरल सरकार को 2018 की बाढ़ के बाद राज्य के पुनर्निर्माण के लिए उपकर (सेस) लगाने की अनुमति भी दी।
इस बैठक में मिली कुछ खास रियायतों का सारांश-
1.  सीमा रेखा को बढ़ाना
परिषद ने माल के आपूर्तिकर्ताओं के लिए पंजीकरण और जीएसटी के भुगतान के लिए सीमा तय करने के लिए दो विकल्प- 20 लाख रुपए और 40 लाख रुपए प्रदान किए हैं। इस प्रकार इन सीमाओं से कम टर्नओवर वाले व्यवसाय जीएसटी से बाहर हो सकेगें।
वे न तो अपने ग्राहकों को जीएसटी चालान जारी करने के लिए उत्तरदायी होंगे और न ही उन्हें कर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता होगी। लेकिन इस बात पर यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जो व्यवसाय जीएसटी ढाँचे के तहत पंजीकृत नहीं हैं वे इनपुट टैक्स क्रेडिट तक नहीं पहुँच सकते हैं।
परिषद ने सेवा प्रदाताओं के लिए छूट की सीमा सीमा 20 लाख रुपए और विशेष श्रेणी के राज्यों जैसे पूर्वोत्तर (एनई) में 10 लाख रुपए रखी है।
छूट सीमा बढ़ाने के कारण कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने अपने एक बयान में कहा कि 10 लाख व्यापारियों को अब अनुपालन बोझ से राहत मिलेगी।
2. कंपोजिशन स्कीम में बदलाव
परिषद ने कंपोजिशन स्कीम की टर्नओवर सीमा बढ़ा दी है जो पहले 1 करोड़ रुपए थी। 1.5 करोड़ रुपए से कम टर्नओवर वाले वस्तु आपूर्तिकर्चता 1 अप्रैल 2019 से इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
कंपोज़िशन स्कीम में व्यक्तिगत बिक्री प्राप्तियों पर जीएसटी का भुगतान करने के बजाय एक विक्रेता को अपनी कुल बिक्री पर एक निश्चित दर का भुगतान करना होगा। निर्माताओं और व्यापारियों के लिए यह वर्तमान में बिक्री का 1 प्रतिशत है। यह विभिन्न टैक्स ब्रैकेट के बारे में कागजी कार्रवाई और भ्रम को आने वाले समय में कम करेगा।
पहली बार कंपोज़िशन स्कीम सेवा प्रदाताओं और मिश्रित आपूर्तिकर्ताओं (जो सामान और सेवाओं दोनों की आपूर्ति करते हैं) को उपलब्ध कराई गई है। उन्हें कुल बिक्री पर 6 प्रतिशत (तीन सीजीएसटी+तीन एसजीएसटी) की दर से कर का भुगतान करना होगा। उनके लिए इस योजना का लाभ उठाने के लिए वार्षिक टर्नओवर की सीमा 50 लाख रुपए तक है।
उद्योग संगठन सीएआईटी ने कहा कि इन परिवर्तनों से 20 लाख से अधिक छोटे व्यवसायों को मदद मिलेगी।
3. त्रैमासिक भुगतान करें, सालाना फाइल करें
कंपोज़िशन स्कीम के तहत पंजीकृत लोगों को अब साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा। हालाँकि, उन्हें हर तीन महीने में टैक्स देना होगा। ये स्थानीय व्यापारियों और निर्माताओं की लंबे समय से चली आ रही माँगें हैं।
4. मुफ्त बिलिंग
विनियामक लागतों को और नीचे लाने और छोटे व्यवसायों की प्रतिस्पर्धा में सुधार करने के लिए जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) छोटे करदाताओं को मुफ्त बिलिंग और लेखा सॉफ्टवेयर प्रदान करेगा।
5. केरल बाढ़ राहत
केरल सरकार द्वारा किए गए एक प्रस्ताव से सहमत होकर परिषद ने राज्य को दो साल तक के लिए माल और सेवाओं में इंट्रा-स्टेट (केरल के भीतर) व्यापार पर एक प्रतिशत सेस लगाने की अनुमति दी है।
सेस टैक्स एक कर पर एक और कर है। इस प्रकार केरल के उपभोक्ताओं को बिल पर देय कुल कर पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर देना होगा। यह सेस राज्य सरकार की 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की लागत को पूरा करने में मदद करेगा जिसने राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया।
6. ‘निर्माणाधीन’ निर्णय
जीएसटी परिषद ने निर्माणाधीन फ्लैट्स और सीमेंट जैसे रियल एस्टेट वस्तुओं पर कर की दरों को कम करने के निर्णय को इस 33वीं बैठक में स्थगित कर दिया।
वर्तमान में निर्माणाधीन फ्लैटों के लिए जीएसटी 12 प्रतिशत और आठ प्रतिशत की प्रभावी दरों पर उन फ्लैट्स पर लगाया जाता है जिसके लिए पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान नहीं किया गया है। इस इंडस्ट्री ने पाँच फीसदी की दरों में कमी की माँग की है। इसके अलावा सीमेंट 28 प्रतिशत के उच्चतम कर दायरे में है।