अर्थव्यवस्था
मूल्य में नहीं आया अंतर, 1991 के बाद खाद्य महंगाई न्यूनतम स्तर पर, जानें कारण

क्राइसिल नामक एक एजेंसी के अनुसार ग्राहक मूल्य सूचकांक से नापने पर वित्तीय वर्ष 2018-19 में खाद्य पदार्थों का मूल्य मात्र 0.1 प्रतिशत बढ़ा। 27 वर्षों में ऐसा पहली बार देखा गया है कि दो वर्षों में खाद्य पदार्थों का दाम समान ही रहा हो। 2017-18 और 2018-19 में औसत खाद्य दरें लगभग बराबर ही थीं।

आखिरी बार 1999-2000 में हुआ था जब खाद्य दर में वृद्धि 1 प्रतिशत से कम रही थी, टाइम्स ऑफ़ इंडिया  ने बताया। अर्थशास्त्री इसका कारण अधिक फसल उत्पाद, कम मांग, निचली वैश्विक खाद्य दरों और न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को बता रहे हैं।

“मैं इसके दो कारण मानता हूँ- पिछले तीन-चार सालों में कृषि उत्पाद बढ़ा है और वैश्विक खाद्य मूल्य भी अनुकूल रहे।”, क्राइसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने बताया। 2013-14 से बाद से खाद्य महंगाई लगातार कम हो रही है।

“पिछले दो वर्षों से लगातार महंगाई निचले स्तर पर रही थी। इसका कारण बेहतर आपूर्ति प्रबंधन, अधिक उत्पादन और मांग में परिवर्तन है।”, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के मुक्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने बताया। “खाद्य से लोगों का रुझान सेवाओं की ओर जा रहा है और यही मांग में परिवर्तन का कारण है।”, उन्होंने जोड़ा।