अर्थव्यवस्था
जीएसटी रिटर्न दाखिल न करने वालों के लिए वित्त मंत्रालय की एमनेस्टी योजना

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) परिषद एक ऐसी योजना पर विचार कर रही है जिससे शून्य कर (निल फाइलर्स) जमा कराने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके और नॉन फाइलर्स को अप्रत्यक्ष कर प्रारूप के भीतर लाया जा सके, हिंदुस्तान बिज़नेस लाइन  ने रिपोर्ट किया। यह परिषद संवैधानिक संस्था है और जीएसटी संबंधित मामलों पर निर्णय के सर्वाधिकार इसके पास सुरक्षित हैं।

“लगभग 25 लाख निल फाइलर हैं और औसत रूप से 10 प्रतिशत ने कभी भी कर नहीं दिया है। इन्हें बाहर करने की योजना से करदाताओं का बोझ हलका हो जाएगा क्योंकि इससे अनुपालन मूल्य में कमी आएगी और जीएसटी तंत्र पर भी दबाव कम होगा।”, एक कर अधिकारी ने बताया।

निल और नॉन फाइलर्स दोनों ही कर जमा नहीं करते लेकिन फिर भी आयकर विभाग इनकी जाँच करता है। इससे सरकार पर अनावश्यक अनुपालन बोझ आता है और देशवासियों से कर वसूली का औसत मूल्य बढ़ जाता है।

जीएसटी तंत्र में हर पंजीकृत ईकाई को रिटर्न फाइल करना आवश्यक है। हालाँकि शुरुआती परेशानियों और अस्पष्टता से कई लोग ऐसा करने से बच गए। इस नए एमनेस्टी (आम क्षमा) प्रस्ताव से अपेक्षा है कि सभी इकाईयाँ नियमानुसार टैक्स भरें।