अर्थव्यवस्था
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के पाँच वर्षों के लक्ष्य को तीन वर्ष में कैसे पूरा किया योगी सरकार ने

चार साल पहले जंगलराज की छवि के बोझ के तले दबा उत्तर प्रदेश आज सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने निकल पड़ा है।

पिछड़ों में गिने जाने वाले प्रदेश को विकास पथ पर ले जाने और तकनीकी क्षेत्र में सक्षम बनाने की बाबा गोरक्षनाथ पीठ के भगवाधारी पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ महाराज की “हठ साधना” फलीभूत होती नजर आ रही है।

आँकड़े बताते है कि योगी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के पाँच साल में हासिल करने वाले लक्ष्य को केवल तीन वर्षों में ही प्राप्त कर लिया। गत तीन वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश को उत्तर प्रदेश के शहरों में आकर्षित किया है जिससे 3 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार पैदा हुआ है।

योगी सरकार की नीतियों ने आपदा को अवसर में बदल दिया। कोरोना कालखंड में, चीन, ताइवान, कोरिया समेत कई और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने प्रदेश में निवेश की रुचि दिखाई है।

प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर भी स्थापित किया गया है, जिनमें ओप्पो जैसी विदेशी कंपनियाँ, तीन भारतीय कंपनियाँ और चार ताइवान की कंपनियाँ 2000 करोड़ रुपये के अपेक्षित निवेश के साथ अपनी इकाइयों की स्थापना कर रही हैं।

लक्ष्य था 2022 तक 20,000 करोड़ रुपये का निवेश और 3 लाख लोगों का रोजगार जिसे योगी सरकार ने दो वर्ष पूर्व ही हासिल कर लिया। योगी की नीतियों के चलते अभी 30 से अधिक और अंतर्राष्ट्रीय निवेशक प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

सत्ता संभालते ही योगी ने एक विज़नरी नेता की तरह “उप्र इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति 2017” लागू की। इस नीति का ही परिणाम था कि इस क्षेत्र में निवेश के लिए निजी क्षेत्र को आकर्षित और प्रोत्साहित करने का कार्य हुआ।

परिणाम सबके सामने है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित हुए। दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन विनिर्माण इकाई के साथ सैमसंग भी नोएडा में ही स्थित है।

योगी 2017 की इस नीति की सफलता के बाद अब सरकार ने इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाया है और एडवांस “उप्र इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2020” को अगस्त 2020 में इस सेक्टर की उन्नति के लिए शुरू किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में सफल निवेश परिदृश्य से प्रोत्साहित हो कर उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले पाँच वर्षों के लिए नए लक्ष्य 40,000 करोड़ रुपये का निवेश और 4 लाख से अधिक लोगों को रोजगार को निर्धारित किया है।

मिशन 2020 के अंतर्गत तीन नए मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर जिसमें यमुना एक्सप्रेस-वे स्थित नोएडा हवाई अड्डे के पास इलेक्ट्रॉनिक सिटी, बुंदेलखंड में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और लखनऊ-उन्नाव-कानपुर क्षेत्र में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।

इसके अतिरिक्त, सरकार का उद्देश्य बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योग स्थापित करना भी है, जिसके लिए नई नीतियों के तहत विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहनों की घोषणा भी की है। इतना ही नहीं हीरानंदानी समूह की कंपनी योट्टा ने ग्रेटर नोएडा में 20 एकड़ में फैले 7,000 करोड़ रुपये के डाटा सेंटर पार्क की आधारशिला रखी है।

असंभव संभव कैसे हुआ

योगी की सबसे बड़ी सफलता कारोबार सुधार कार्ययोजना के माध्यम से एक इन्वेस्टर-फ्रेंडली (निवेश अनुकूल) वातावरण का निर्माण करना रहा। इससे नए निवेशक ‘नए उत्तर प्रदेश’ में आश्वस्त महसूस करते हैं। योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ‘कारोबार सुगमता’ ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में ऊपर की ओर बढ़ा है और आज देश में दूसरे नंबर पर है।

मार्च 2017 को शपथ ग्रहण के बाद ही भगवाधारी महंत ने “नए उत्तर प्रदेश” के निर्माण का संकल्प लिया जिसका मंत्र था “जनकल्याण ही प्रतिज्ञा, विकास ही पहचान”। उनका संकल्प, उनकी कार्यप्रणाली, कर्तव्य निष्ठा, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’, बाहुबलियों को उखाड़ फेंकने की नीति के साथ उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हो रहा है।

पिछले चार वर्षों में योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने अग्रिम राज्य जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश आदि को “विकास के एक्सप्रेस-वे” पर आसानी से पार कर लिया है। नए उत्तर प्रदेश की उड़ान के रास्तों में आने वाले सभी रोड़ो को हटाना का कार्य शुरू हो गया।

युवाओं में कौशल विकास को रफ्तार देने की योजना हो या रोजगारपरक एमएसएमई सेक्टर में जान फूँकने की, योगी ने वह सब कुछ किया जो पहले नहीं हुआ जिससे सर्वसंपन्न होने के बाद भी उत्तर प्रदेश पिछड़ा रहा, मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा, अपर्याप्त रोज़गार के अवसर की वजह से युवा पलायन को मजबूर हुआ।

योगी ने कई ऐसे कदम उठाए जो सिर्फ कल्पना मात्र थे, जिनमें  2018 में ‘इन्वेस्टर्स सम्मिट’, 2019 का ‘डिफेंस एक्सपो’, 2019 में भव्य ‘कुंभ मेले’ का आयोजन आदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन शामिल था।

उत्तर प्रदेश के पौराणिक वैभव को वापस लाकर नए उत्तर प्रदेश को देश की सांस्कृतिक राजधानी की तरह स्थापित करने के साथ औधोगिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य योगी के नेतृत्व में जारी है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास के नए सफर पर निकल पड़ा है।

महेंद्र कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषक हैं। पार्थ श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार हैं।