अर्थव्यवस्था
बजट 2020 पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से स्वराज्य की विशेष चर्चा के प्रमुख 10 बिंदु

स्वराज्य के संपादकीय निदेशक आर जगन्नाथन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बजट के अगल दिन ही चर्चा कर बजट और इसके पीछे की सोच के बारे में जाना जिसके प्रमुख बिंदु यहाँ प्रस्तुत हैं-

  1. बजट की तैयारी जुलाई 2019 से ही शुरू हो गई थी और इसमें विभिन्न हितधारकों से हुई चर्चा को भी ध्यान में रखा गया है। वित्त मंत्री का मानना है कि समस्या का समाधान कुछ नौकरशाहों के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि जो उन समस्याओं का सामना करते हैं उनके दृष्टिकोण से होना चाहिए इसलिए कई प्रतिक्रियाओं को बजट में सम्मिलित किया गया था।
  2. सीतारमण ने बताया कि उन्होंने बजट में अधिकाधिक क्षेत्रों को सम्मिलित करने का प्रयास किया ताकि उन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन मिल सके।
  3. नई कर प्रणाली के विषय में उन्होंने बताया कि आँकलन किया गया है कि कितने लोग नई प्रणाली की ओर रुख करेंगे लेकिन वे विश्वास से नहीं कह सकतीं कि इसकी संख्या और परिमाण कितना होगा।
  4. वित्त मंत्री ने बताया कि कम आय वालों के लिए छूट के साथ कर से अधिक आकर्षक होगा कर से मुक्ति और कुछ छूटें भी उन्हें मिलेंगी।
  5. कर के बोझ को कम करने और कर प्रावधानों को सरल करने के लिए छूटें कम की गई हैं।
  6. कर के विभिन्न स्तरों को बनाने का कारण बताते हुए सीतारमण ने कहा कि कर प्रतिशत में वृद्धि को निर्विघ्न बनाने के लिए ऐसा किया गया है।
  7. वित्त मंत्री ने बताया कि उनकी प्राथमिकता है कि लोगों के हाथ में अधिक पैसा रहे। इसलिए वे चाहती हैं कि भारतीय शेयर बाज़ार खुदरा व्यापारियों के लिए खुले। उन्होंने नागरिकों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डीडीटी हटाया है।
  8. दीर्घ अवधि पूंजी लाभ (एलटीसीजी) से हुई बाज़ार की निराशा के विषय में उन्होंने बताया कि वे इसे और समय देकर देखना चाहती हैं ताकि उचित निर्णय लिया जा सके।
  9. विनिवेश के लक्ष्य के विषय में सीतारमण ने कहा कि वे लक्ष्य को पूरा करने के प्रति सकारात्मक हैं। एलआईसी के विषय में उन्होंने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में इसके विनिवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  10. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2020 से आयकर रिटर्न की नई रूपरेखा सामने आएगी जो अधिकाधिक लोगों को अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करेगी। जीएसटी के विषय में सीतारमण ने कहा कि परिषद निर्णय लेगा लेकिन उन्होंने परिषद को निर्देश दिया है कि कर दर में परिवर्तन बड़ी अवधियों में किया जाए जैसे वर्ष में एक बार।

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