अर्थव्यवस्था
वित्त मंत्रालय की विजय- आरबीआई के पास संभवतः 7.9 लाख करोड़ अतिरिक्त रुपए

लंबे समय से चल रहे वित्त मंत्रालय के साथ विवाद में एक महत्त्वपूर्ण बात सामने आई है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम तथा तीन अन्य अर्थशास्त्रियों, अभिषेक आनंद, जोश फेल्मन तथा नवनीरज शर्मा द्वारा लिखे गए एक पेपर में यह प्रमाणित हुआ है कि आरबीआई के पास पर्याप्त अतिरिक्त संपत्ति है तथा यह कम से कम 4.5 लाख करोड़ रुपए तक बताई गई है।

वित्त मंत्रालय लंबे समय से कहता आया है कि नोट छापने और सिक्के बनाने से आरबीआई ने बहुत मुनाफा एकत्रित कर लिया है जो कि सीमा से अधिक है।

साप्ताहिक समाचार-पत्र इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली  में “संविभ्रम या विवेक- आरबीआई के लिए कितना धन पर्याप्त है?” शीर्षक से प्रकाशित शोध पत्र में लेखकों ने कहा है कि अनुमान के मुताबिक आरबीआई के पास 4.5 लाख करोड़ अतिरिक्त कोष में है।

वहीं पेपर में कहा गया है कि जमा धन, सरकारी योजनाओं अथवा घाटे के लिए नहीं अपितु सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सशक्त करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

पेपर में कठोरतापूर्वक पूर्व आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल तथा वाचाल स्वभाव के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की बात का विरोध किया गया है तथा लिखा है कि जमा संपत्ति सामान्य ज़रूरतों के लिए नहीं अपितु अधिक दबाव के समय में उपयोग करने के लिए होती है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के पास अधिक संपत्ति का आकलन दो तरीकों से किया गया-

  1. प्रमुख केंद्रीय बैंकों की कार्यप्रणाली तथा जोखिम सहिष्णुता के पैमानों से आरबीआई की बैलेंस शीट का आकलन किया गया।
  2. एक अर्थमितीय तंत्र जो कि इष्टतम संपत्ति तथा निर्धारकों का संबंध स्पष्ट करता है।

शोध पत्र में जून 2018 तक की आरबीआई की बैलेंस शीट का जो आकलन किया गया है, उसमें बताया है कि 36 लाख करोड़ की कुल संपत्ति जिसमें 73 प्रतिशत विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, 17 प्रतिशत भरतीय मुद्रा संपत्ति तथा 4 प्रतिशत सोना है।

देयता में नोट तथा जमा संपत्ति 71 प्रतिशत है तथा 27.7 प्रतिशत मूलधन है। इस मूलधन में 8.2 प्रतिशत इक्विटी तथा प्रतिधारित कमाई और 19.6 प्रतिशत मध्यवर्ती मूल्यांकन शामिल है।

पत्र में कहा गया है कि एक केंद्रीय बैंक जिसके पास ब्याज उपार्जित करने वाली कई परिसम्पत्तियाँ हैं, उसकी बैलेंस शीट में कई आंतरिक विषमताएँ हैं लेकिन उसकी कई देनदारी ब्याज मुक्त है।

अत: कई आरबीआई समेत कई केंद्रीय बैंक अधिक ब्याज उत्पन्न करते हैं। उसका एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय सरकार को जाता है तथा कुछ हिस्सा आरबीआई के पास रहता है जैसा आरबीआई अधिनियम के खंड 47 में प्रावधान है।

अंत में पेपर में दर्शाया गया है कि आरबीआई के पास बहुत अधिक संपत्ति है। यदि अन्य बैंकों की तरह ही अवलोकन किया जाए तो पता चलेगा कि आरबीआई के पास पाँच लाख करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति है।

अधिक महत्त्वपूर्ण बात जो पत्र में कही गई है कि यदि अन्य अर्थमितीय आकलन का अन्य तरीका अपनाया जाए तो यह संपत्ति 5.7 लाख करोड़ से 7.9 लाख करोड़ रुपए आ सकती है।