अर्थव्यवस्था
जहाँ अभी भी 24 लाख सरकारी पद रिक्त हैं, वहीँ एक हल्की सी रेखा कृषि ऋण में छूट और मुफ्त उपहार की संस्कृति को ‘बेरोजगार’ विकास से जोड़ रही है

प्रसंग
  • जो लोग बेरोजगारविकास की खिल्ली उड़ाते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि अंतहीन चुनाव चक्र इसका एक सहायक कारण है।
  • कहने के लिए लाखों नौकरियां हैं, लेकिन रिक्तियों को भरने के लिए नकद (वेतन) या राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है।

ऐसा लगता है कि राज्यसभा में दायर जवाबों के एक मिलान के मुताबिक, लगभग 24 लाखसरकारी पदों कीरिक्तियां खाली हैं।यदि केवल राज्य-नियंत्रित क्षेत्रों में रिक्तियों का यह स्तर है, तो कोई भी आश्चर्य कर सकता है कि केंद्र और राज्य सरकारें नौकरियों के उच्च विकास का दावा करने के लिए उन्हें भर क्यों नहीं रही हैं?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसारइन रिक्तियों में से सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा विभाग का (10 लाख से अधिक) है, इसके बाद पुलिस बल विभाग का (अर्धसैनिक बलों सहित 6 लाख), रेलवे विभाग का (2.4 लाख), सामाजिक सेवा विभाग का (2.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री) और स्वास्थ्य सेवा विभाग का (1.5 लाख) है।

लेकिन सरकारें प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी नहीं कर रही हैं,इससे संबंधित हमारे किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले दो बिन्दु काम के हैं।

सबसे पहला, ये रिक्तियाँ व्यापक रूप से उन क्षेत्रों में हैं जिन्हें हम उच्च क्षेत्र भी कह सकते है, जहाँ मानव श्रम अपरिहार्य है।इन्हें आसानी से स्वचालित नहीं किया जा सकता है। ये रिक्तियाँ स्पष्ट रूप से सुझाव देती हैं कि सामाजिक क्षेत्रों में मौजूद कौशल की कमी (कौशल अंतराल) और त्वरित कौशल नौकरी सृजन के लिए एक बड़ा अंतर बना सकते हैं।

दूसरा,कई चिंताओं की तरह यह भी एक वास्तविक चिंता है कि इनमें से कई नौकरियों के अधिकांश पदों पर भर्तियाँ नहीं की जा रही हैं क्योंकि इससे राज्य के बजट पर असर पड़ सकता हैं।इस प्रकार, केंद्र और राज्यों दोनों की वित्तीय सीमाओं को देखते हुए पद रिक्त छोड़ दिए गए हैं।

तार्किक रूप से, यदि इतनी सारी नौकरियोंके पद रिक्त हैं, तो इसका अर्थ है कि चुनाव समय में सरकारें, नौकरियों के विकास का दावा करने के लिए आगे आएंगी। लेकिन तथ्य यह है किवे इन रिक्तियों का न भरा जाना हमें एक गंभीर समस्या की ओर इंगित करता है।

जब राज्य अपने वित्तीय विस्तार को प्रभावी रूप से कम करते हुए या अपने आप को दिवालिया करते हुए कृषि ऋण को माफ कर देते हैं (पिछले दो वर्षों में सामूहिक ऋण माफी में लगभग 1.5 लाख करोड़ रूपये तक की वृद्धि हुई है) और अन्य लाभ प्रदान करते हैं, तब खर्च में कटौती करने के सबसे स्पष्ट क्षेत्र दोगुने होते हैः रिक्तियों को खाली छोड़ देना या परियोजनाओं को कम धनराशि प्रदान करना। पहले से अल्पकालिक रोजगार सृजन प्रभावित होता है और दूसरे से भविष्य का रोजगार प्रभावित होता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने पिछले साल बताया था कि ऋण छूटकर्ता सकल घरेलू उत्पाद के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे। सलाहकार के पास इसके लिए एक बहुत अच्छा कारण भी था।

माफ कर देना (मुफ्त में देना) और छोड़ देना “निजी मामले” हैं, इनको वस्तुओं के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता है जिनकी खपत एक दूसरे से अलग होती है। किसानों की ऋण माफी का मतलब है कि उस धनराशि से दूसरों को वंचित कर देना। दूसरी ओर कानून और व्यवस्था या शिक्षा या स्वाश्थ्य पर खर्च करना एक“सार्वजनिक मामला” है – इन क्षेत्रों में खर्च करने से सभी वर्गों को लाभ होता है। एक वर्ग द्वारा “शिक्षा” सेवाओं का लाभ लेना किसी अन्य वर्ग को समान लाभ से वंचित नहीं करता है।

अभी तक 24 लाख निरस्त रिक्तियाँ इस बात का सबसे स्पष्ट सबूत हैं कि सभी सरकारों को निजी मामलों के बजाय सार्वजनिक मामलों पर अपना खर्च बढ़ाने की जरूरत है। ऐसा न होने का राजनीतिक कारण यह है कि मतदाताओं के एक संकीर्ण खंड में सब्सिडी और मुफ्त का लाभ अगला चुनाव जीतने के लिए पार्टी को सक्षम कर सकते हैं। लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है। सार्वजनिक मामलों पर गैर-प्रावधान भविष्य के विकास और रोजगार के लिए आधार को गहरा आघात पहुँचाते हैं।

इस प्रकार एक सतत और वार्षिक चुनाव चक्र यह तय करता है कि सभी राजनीतिक दल अपने चहेते वर्गों को सार्वजनिक खर्च पर निजी लाभ प्रदान करके अधिक से अधिक अल्पकालिक वोट प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। यह सभी प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य चुनावोंको एक समय पर आयोजित करने के लिए बनाया गया सबसे मजबूत मामला है– याफिर अधिकतम दो चरणों में करना ठीक रहेगा, जो किप्रत्येक ढाई साल में आयोजित होगा।

जो लोग “बेरोजगार” विकास दर की निंदा करते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि अंतहीन चुनाव चक्र इसमें एक सहायक कारण है। कहने के लिएलाखों नौकरियां हैं, लेकिनयहां रिक्तियों को भरने के लिए नकद या राजनीतिक इच्छाशक्तिनहीं है।

जगन्नाथस्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। वह @TheJaggiपर ट्वीट करते हैं।