अर्थव्यवस्था
नोटबंदी के प्रभाव पर पढ़िए वित्त मंत्री अरुण जेटली के विचार

आशुचित्र-

  • आज के दिन, दो साल पहले, 8 नवंबर 2016 प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की थी।
  • उससे दो साल बाद अरुण जेटली इस कदम के देश पर प्रभाव के बारे में अपने विचार रख रहे हैं।

आज हमने नोटबंदी के दो साल पूरे कर लिए। सरकार द्वारा आर्थिक सुधार के महत्त्वपूर्ण निर्णयों की कड़ी में नोटबंदी एक अहम फैसला है।

सरकार ने पहले भारत के बाहर के काले धन पर निशाना साधा था। संपत्ति धारकों से दंड कर चुकाकर पैसा वापस लाने को कहा गया। जो ऐसा करने में असफल हुए उन पर काला धन अधिनियम के तहत कार्यवाही हो रही है। सभी खातों और संपत्तियों की सूचना सरकार के पास है और उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध कदम उठाया जा रहा है।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में रिटर्न फाइल करने और टैक्स बेस बढ़ाने के लिए तकनीक का प्रयोग किया गया।

आर्थिक समावेश एक और महत्त्वपूर्ण कदम था जिससे समाज के निचले हिस्से के लोग भी औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने। जन धन खातों के माध्यम से बहुत से लोग बैंकिंग सेवाओं से जुड़े। आधार कानून ने सुनिश्चित किया कि सरकार के समर्थन का लाभ सीधा बैंक खातों तक पहुँचे। जी एस टी ने यह सुनिश्चित किया कि अप्रत्यक्ष कर प्रक्रिया आसान बने। अब कर प्रणाली से बचना मुश्किल हो गया है।

 

नकद की भूमिका

भारत एक नकद प्रभुत्व वाली अर्थव्वस्था थी। नकद से लेन-देन में नाम गुप्त रहता है। यह बैंक व्यवस्था से बाहर निकलकर कर से बचने का मौका देती है। नोटबंदी ने धारकों को नकद बैंक में जमा कराने के लिए मजबूर किया। इस नकद के जमा होने से 17.42 लाख संदिग्ध खातों का पता चला जिनसे ऑनलाइन माध्यम से जवाब माँगा गया। उल्लंघनकर्ताओं को दंड का सामना करना पड़ा। बैंको में पैसा जमा होने से बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ी। इस पैसे का बहुत बड़ा हिस्सा म्युचुअल फंड में निवेश किया गया। यह औपचारिक व्यवस्था का अंग बन गया।

 

मिथ्या तर्क

सूचना की अल्पता से ग्रसित आलोचना में कहा गया कि सारा पैसा बैंकों में जमा हो गया। नकद जब्त करना नोटबंदी का उद्देश्य नहीं था। इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाना और धारकों से कर का भुगतान करवाना इसका उद्देश्य था। भारत को नकद से डिजीटल तक लाने में व्यवस्था को हिलाने की ज़रूरत थी। इससे अधिक कर राजस्व आय और टैक्स बेस बढ़ने का लाभ मिला है।

 

डिजिटाइज़ेशन पर प्रभाव

2016 में यू.पी.आई. चालू किया गया था जिससे दो मोबाइल धारकों के बीच तुरंत पैसों का लेन-देन किया जा सके। डिजीटल लेन-देन अक्टूबर 2016 में 50 करोड़ रु. से बढ़कर सितंबर 2018 में 59,800 करोड़ रु. हो गया है। भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) एन पी सी आई द्वारा निर्मित एक ऐप है जिससे यू पी आई के माध्यम से तुरंत भुगतान किया जा सकता है। वर्तमान में इसका उपयोग 1.25 करोड़ लोग कर रहे हैं। भीम पर लेन-देन सितंबर 2016 में 2 करोड़ रु. से बढ़कर सितंबर 2018 में 7,060 करोड़ रु. हो गया है। जून 2017 में यू पी आई लेन-देन का 48 प्रतिशत भाग भीम के माध्यम से था।

रूपे कार्ड का प्रयोग दुकानों पर और ई-कॉमर्स दोनों के लिए किया जाता है। इसके द्वारा लेन-देन नोटबंदी से पहले 800 करोड़ रु. था जो अब बढ़कर 5,730 करोड़ रु. हो गया है।

आज वीज़ा और मास्टरकार्ड की माँग घट रही है और स्वदेशी भुगतान माध्यम जैसे रूपे कार्ड और यू पी आई का लेन-देन में भाग 65 प्रतिशत हो गया है।

 

प्रत्यक्ष कर पर प्रभाव

व्यक्तिगत आयकर भुगतान पर नोटबंदी का प्रभाव देखने को मिला है। पिछले साल की तुलना में 2018-19 के वित्तीय वर्ष में इसका कलेक्शन 20.2 प्रतिशत बढ़ा है। व्यापारिक कर में कलेक्शन 19.5 प्रतिशत बढ़ा है। नोटबंदी से दो साल पहले प्रत्यक्ष कर 6.6 प्रतिशत और 9 प्रतिशत से बढ़ा था। नोटबंदी के अगले दो सालों में यह कर क्रमशः 14 प्रतिशत और 18 प्रतिशत से बढ़ा।

2017-18 में दायर किया गया टैक्स रिटर्न 6.86 करोड़ था जो पिछले वर्ष से 25 प्रतिशत अधिक था। इस वर्ष, 31 अक्टूबर 2018 तक 5.99 करोड़ टैक्स रिटर्न दायर किए गए हैं जो इस तारीख तक पिछले वर्ष से 54.33 प्रतिशत अधिक हैं। इस वर्ष 86.35 लाख नए करदाता जुड़े हैं।

मई 2014, जब यह सरकार सत्ता में आई थी, तब 3.8 करोड़ करदाता थे। सरकार के चार सालों में ये बढ़कर 8.86 करोड़ हो गए हैं। जब तक इस सरकार की अवधि समाप्त होगी हम इस आँकड़े के दुगने तक पहुँच जाएँगे।

 

अप्रत्यक्ष कर पर प्रभाव

जी एस टी और नोटबंदी से नकद लेन-देन बहुत कम हो गए हैं। डिजीटल लेन-देन में वृद्धि देखी जा सकती है। अर्थव्यवस्था के इस औपचारीकरण से जी एस टी के पहले 64 लाख करदाताओं से जी एस टी के बाद 1.2 करोड़ करदाता हो गए हैं। जी एस टी का असली लाभ तब दिखता है जब हम देखें कि कुल कर में वृद्धि हुई है। अप्रत्यक्ष कर वृद्धि को इससे एक उछाल मिली है। इससे केंद्र और राज्य दोनों को फायदा मिला है। जी एस टी के बाद हर राज्य को आवश्यक रूप से प्रति वर्ष 14 प्रतिशत कर वृद्धि का लाभ मिल रहा है। इस तथ्य, कि अब संपत्ति धारकों को अपना व्यापारिक कारोबार घोषित करना होगा, से न केवल अप्रत्यक्ष कर को लाभ मिला है बल्कि कर मूल्यांकन में उनके आयकर का भी खुलासा होता है। 2014-15 में अप्रत्यक्ष कर का जी डी पी से अनुपात 4.4 प्रतिशत था जो जी एस टी के बाद 5.4 प्रतिशत हो गया है।

छोटे करदाताओं को 97,000 करोड़ रुपए की करमाफी और जी एस टी निर्धारितियों को 80,000 करोड़ रुपए की करमाफी के बावजूद कर संग्रह बढ़ा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों की दरों में कटौती की गई लेकिन कर संग्रह बढ़ा है। टैक्स बेस का विस्तार हुआ है। 334 वस्तुओं, जिनपर जी एस टी के पहले प्रभावी रूप से 31 प्रतिशत का कर देना पड़ रहा था, वे कर कटौती की साक्षी हैं।

सरकार ने इन संसाधनों का प्रयोग ग्रामीण व सामाजिक क्षेत्रों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया। अन्यथा सभी गाँवों की सड़क से संयोजकता, हर घर में बिजली, 92 प्रतिशत ग्रामीण सैनिटेशन, एक सफल आवास योजना, 8 करोड़ घरों में रसोई गैस, आदि का सपना कैसे पूरा होता? आयुष्मान भारत के अंतर्गत 10 करोड़ परिवारों को जोड़ा गया, कम दर पर भोजन के लिए 1,62,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, किसानों के लिए न्यूनतम राशि 50 प्रतिशत बढ़ा दी गई है और फसल बीमा योजना भी सफल हुई। यह अर्थव्यवस्था का औपचारीकरण है जिससे 13 करोड़ उद्यमियों को मुद्रा योजना के तहत ऋण मिला है। सातवाँ वेतन आयोग हफ्तों के भीतर लागू कर दिया गया था।

ज़्यादा औपचारीकरण, ज़्यादा राजस्व, गरीबों के लिए ज़्यादा संसाधन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिकों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन।

यह लेख वित्त मंत्री अरुण जेटली के फेसबुक पेज द्वारा प्रकाशित किया गया था।