अर्थव्यवस्था
सायबर सुरक्षा के लिए एयरटेल का समाधान क्या कंपनी में नई जान फूँक सकता है

सायबर सुरक्षा के प्रति सरकार की बढ़ती सजगता के साथ भारतीय निजी कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने लगी हैं जैसा कि इस सप्ताह की दो घटनाओं से स्पष्ट होता है। एक ओर है भारती एयरटेल जिसने बुधवार (31 मार्च) को ही घोषणा की कि कंपनी को सर्ट-इन की ओर से सूचीबद्ध कर लिया गया है जिससे अब एयरटेल सेक्यॉर के तहत कंपनी केंद्र व राज्य सरकारों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अपने सायबर सुरक्षा समाधान दे सकती है।

सर्ट-इन की सायबर सुरक्षा समाधान सूची में आना एयरटेल के लिए काफी बड़ी बात है क्योंकि हाल में ही कुछ सरकारी उपक्रमों पर सायबर हमले की घटना देखने को मिली है जिससे स्वाभाविक है कि वे ऐसे समाधानों की प्रति आकर्षित होंगे। 21 मार्च की ही बात है जब भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) से अलर्ट पाकर परिवहन मंत्रालय ने एनएचएआई समेत कई विभागों को सायबर सुरक्षा दुरुस्त करने को कहा था।

इससे पहले जब रिकॉर्डेड फ्यूचर जैसी कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मुंबई में अक्टूबर 2020 में कुछ घंटों के लिए बत्ती गुल होने का कारण चीन प्रायोजित हैकरों का सायबर हमला हो सकता है तब भारत सरकार ने भले ही इस बात का खंडन किया लेकिन ऊर्जा मंत्रालय ने माना कि ऐसे हमले होते हैं, हालाँकि उनके अनुसार इन हमलों को रोक दिया गया था और वे भारत की पावर ग्रिड को भेद नहीं सके थे।

भारत के महत्त्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए ही दूरसंचार क्षेत्र में सरकार ने उपकरणों को “विश्वसनीय” आपूर्तिकारों से ही खरीदने का आदेश जारी किया था जिसे चीन की हुआवे, ज़ेडटीई जैसी कंपनियों को रोकने की दृष्टि से देखा जा रहा था, हालाँकि अब हुआवे ने दावा किया है कि उसे विश्वास है, भारत की दूरसंचार सेवा में वह भागीदार होगा। सायबर सुरक्षा के ऐसे अनगिनत प्रयास हैं लेकिन बात करते हैं दूसरी घटना की।

विप्रो द्वरा आधिकारिक घोषणा

गुरुवार (1 अप्रैल) को विप्रो ने घोषणा की कि इसने एक ऑस्ट्रेलिया आधारित सायबर सुरक्षा प्रदाता कंपनी- ऐम्पियन का अधिग्रहण कर लिया है। 11.7 करोड़ डॉलर के सौदे से प्राप्त ऐम्पियन का गठन सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा प्रदाता रिवॉल्यूशन आईटी और शेल्ड के विलय से हुआ था। मेलबॉर्न स्थित मुख्यालय से काम करने वाली यह कंपनी विप्रो के साथ मिलकर सायबर सुरक्षा की बढ़ती माँग की आपूर्ति करेगी।

विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश जहाँ ग्राहक निकट हों, फूर्ति, स्तर और स्थानीयकरण विप्रो का नया परिचालन मॉडल बन गए हैं। ऐम्पियन का अधिग्रहण विप्रो को उसके ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड स्थित ग्राहकों को बेहतर सेवा देने में सहायता करेगा। 30 जून तक अधिग्रहण से संबंधित सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के साथ एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में प्रभाव डालने के लिए कंपनी तैयार होगी।

वहीं, भारत में एयरटेल ने एक अत्याधुनिक सेक्यॉरिटी इंटेलीजेंस सेंटर स्थापित किया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग टूल्स हैं जो किसी भी ऑनलाइन खतरे का भाँपकर उसका निपटारा कर सकते हैं। अंतिम छोर सुरक्षा, ईमेल सुरक्षा से लेकर क्लाउड डीडीओएस (डेडिकेटेड डिनायल ऑफ़ सर्विस) सुरक्षा तक एयरटेल सेक्यॉर कई प्रकार के समाधान उपलब्ध कराता है।

सिस्को, राडवेयर, वीएमवेयर और फोर्सपॉइंट जैसी कंपनियों से रणनीतिक साझेदारी करके एयरटेल ने सभी प्रौद्योगिकियों को प्राप्त किया है। एयरटेल बिज़नेस के निदेशक व सीईओ अजय चितकारा को विश्वास है कि डिजिटल संयोजकता वाले विश्व में जहाँ सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, वहाँ एयरटेल के लिए काफी अवसर खुले हैं। उनका दावा है कि 10 लाख से अधिक उद्यम एयरटेल पर विश्वास करते हैं।

एयरटेल व्यापार समाधान

100 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सुनील मित्तल के नेतृत्व वाली एयरटेल ने सेक्यॉरिटी इंटेलीजेंस सेंटर स्थापित किया था और अपने व्यापार ग्राहकों को उन्नत सायबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने के लिए कई कंपनियों के साथ साझेदारी में काम किया। अमेज़ॉन वेब सेवाओं के साथ भी एयरटेल ने एक समझौता किया है जिसके तहत भारत के छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को क्लाउड समाधान दिए जाएँगे।

हाल ही में भारत के सबसे बड़े कथित डाटा लीक का खुलासा हुआ था जिसके अनुसार फिनटेक के स्टार्ट-अप मोबिक्विक के 10 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं का डाटा डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध था। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि यह डाटा लीक उसके सर्वर से नहीं हुआ है। आरोपों का के खंडन करने के लिए कंपनी तीसरी पार्टी द्वारा फॉरेन्सिक डाटा सुरक्षा निरीक्षण करवाने के लिए भी तैयार है।

वहीं, दूसरी ओर इस लीक का खुलासा करने वाले राजशेखर राजहरिया का दावा है कि 20 जनवरी को जॉर्डन डेवन नामक हैकर ने फोन नंबर, ईमेल आईडी, पता, जीपीएस लोकेशन, पासवर्ड आदि निजी डाटा 8 टेराबाइट की मात्रा में डार्क वेब पर डाला था जो मोबिक्विक के मुख्य सर्वर से लिया गया है। इससे पहले बिगबास्केट, अनअकेडमी और जसपे जैसी बड़ी कंपनियाँ भी डाटा चोरी का निशाना बन चुकी हैं।

हाल की घटनाओं से स्पष्ट हो जाता है कि भविष्य में डाटा सुरक्षा और सायबर सुरक्षा पर ध्यान और निवेश दोनों बढ़ने वाला है। एयरटेल दूरसंचार के क्षेत्र में जियो को टक्कर देने का पूरा प्रयास कर रहा है लेकिन साथ ही अपनी डिजिटल सेवाओं को अलग उपक्रम के रूप में बढ़ाना चाहती है। उसके लिए एयरटेल पेमेन्ट्स बैंक के साथ एयरटेल सेक्यॉर एक अच्छी शुरुआत है जो कंपनी को वित्तीय संकट से उभारेगी।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।