अर्थव्यवस्था
गुजरात को ही मणिकरण पावर ने क्यों चुना देश की पहली लिथियम रिफाइनरी के लिए

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में वृद्धि के साथ लिथियम-आयन बैटरी की माँग भी बढ़ रही है लेकिन दुर्भाग्यवश भारत अब तक इस क्षेत्र में पीछे रहा है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लिथियम-आयन बैटरी को अपने दायरे में लेकर तो आई है लेकिन इनके लिए आवश्यक कच्चा माल यानी लिथियम के लिए अभी भी भारत अधिकांश रूप से आयात पर आश्रित है।

इस परिदृश्य में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के स्वप्न के लिए सुखद समाचार दिसंबर 2020 में आया जब गुजरात राज्य सरकार के अधिकारियों ने घोषणा की कि प्रदेश में देश का पहला लिथियम रिफाइनरी संयंत्र लगने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी पावर ट्रेडिंग और अक्षय ऊर्जा कंपनी मणिकरण पावर लिमिटेड ने इसका बीड़ा उठाया है।

स्वराज्य ने जब पूछा कि इसकी प्रेरणा मणिकरण को कहाँ से मिली तब कंपनी ने बताया कि लघु और मध्यम अवधि, विशेषकर अगले पाँच वर्षों में लिथियम की कुल माँग आपूर्ति से अधिक हो जाएगी। “वैश्विक स्तर पर ईवी की स्वीकार्यता बढ़ने के साथ-साथ लिथियम बैटरी की माँग हर पाँच वर्ष में दोगुनी होती जाएगी।”, परियोजना के प्रति उत्साहित मणिकरण ने बताया।

अपेक्षा है कि लिथियम कार्बोनेट इक्विवैलेंट की माँग 2025 तक 9 लाख टन व 2030 तक 22 लाख टन हो जाएगी। इस परियोजना पर आगे बढ़ने के लिए मणिकरण की दूसरी प्रेरणा है कि उच्च ऊर्जा घनत्व (यानी अधिक बैटरी क्षमता), लंबी आयु और बेहतर सुरक्षा कारणों से लिथियम रसायन-शास्त्र में लिथियम हाइड्रॉक्साइड की माँग बढ़ेगी।

लिथियम के क्षेत्र में दूसरा सुखद समाचार कर्नाटक के मांड्या से आया था जहाँ भारत की पहली लिथियम खदान जनवरी में मिली और संसद में मोदी सरकार ने 1,600 टन लिथियम भंडार के मिलने की पुष्टि भी कर दी। हालाँकि खनन परियोजनाओं को फलीभूत होने में काफी समय लग जाता है इसलिए मणिकरण पावर इसका उपयोग कर पाए, उसकी संभावना कम है।

लिथियम खदान

कंपनी के व्यापार विकास के उप-महाप्रबंधक संदीप दास ने स्वराज्य को बताया कि ऑस्ट्रेलियाई साझेदार पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में आधारित अग्रणी खनन कंपनी नियोमेटल्स लिमिटेड के साथ कंपनी का दीर्घ अवधि का आपूर्ति समझौता है। मणिकरण का उद्देश्य उच्च शुद्धता वाले बैटरी ग्रेड लिथियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन है जिसके लिए एससी6 ग्रेड स्पॉड्युमीन खदान की आवश्यकता होती है।

हालाँकि, दास ने आश्वासन दिया कि यदि भारतीय खदान की गुणवत्ता उपयुक्त पाई जाती है तो वे भविष्य में इसपर भी विचार करेंगे। जब पूछा गया कि लिथियम रिफाइनरी संयंत्र के लिए गुजरात को ही क्यों चुना गया तो उन्होंने बताया कि रासायनिक अभिकर्मक व गैस की उपलब्धता, अच्छे बंदरगाह, सड़क संयोजकता और आधारभूत संरचनाओं का लाभ प्रदेश में मिल जाता है जो परियोजना के लिए आवश्यक है।

इन सुविधाओं का लाभ उठाकर वे कच्चे धातु का आयात करके घरेलू रूप से लिथियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन कर सकते हैं। इसके अलावा भारत में ईवी और बैटरी उद्योग अभी प्राथमिक स्तर पर ही है, इसलिए वे शुरुआत के वर्षों में अपने लिथियम संयंत्र में बने लिथियम हाइड्रॉक्साइड का निर्यात करने के लिए भी इंफ्रास्ट्रक्चर चाहते थे।

गुजरात में कई लिथियम-आयन बैटरी संयंत्रों की योजना भी गतिशील है जिसमें से धोलेरा में टाटा केमिकल्स और हंसलपुर में मारुति सुज़ुकी, तोशिबा और डेन्सो का संयुक्त उद्यम अग्रणी हैं। ऐसे में गुजरात में एक प्रकार से ईवी या बैटरी का पारिस्थितिकी तंत्र उभर रहा है जिसका लाभ उठाने के लिए मणिकरण ने गुजरात को चुना है।

मणिकरण पावर लिमिटेड

“हमें अपेक्षा है कि गुजरात में हमारी लिथियम रिफाइनिंग परियोजना घरेलू ईवी मूल्य शृंखला के विकास में योगदान देगी। लिथियम के कच्चे माल की आवश्यकता के लिए वर्तमान में भारत चीन और अन्य देशों पर पूर्ण रूप से आश्रित है। हमारी यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है और आयात पर निर्भरता कम करने में भारत की सहायता करेगी।”, मणिकरण ने विश्वास जताया।

गुजरात के मुंदरा समेत कुछ अन्य स्थानों पर मणिकरण पावर रिफाइनरी के लिए उपयुक्त भूमि खोज रहा है लेकिन प्राथमिक व्यवहार्यता अध्ययन (पीएफएस) के बाद ही वे अधिक जानकारी साझा करेंगे और स्थान तय करेंगे। गुजरात में लिथियम संबंधित अन्य उद्योगों का होना भी उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है और वे अपना सकारात्मक योगदान देना चाहते हैं।

लिथियम के क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व है और चीनी कंपनियों की वित्तीय व्यवहार्यता को चुनौती देने के लिए मणिकरण पावर को सरकार से कुछ प्रोत्साहन और सहयोग चाहिए। कम लागत में अधिक उत्पादकता हो ताकि मणकरण वैश्विक लिथियम प्रसंस्करकों को टक्कर दे सके, इसके लिए कंपनी ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से बात की है।

गुजरात सरकार के समक्ष उन्होंने परियोजना के लिए आवश्यक विशिष्ट सहयोग जैसे पूँजी सब्सिडी, आयातित कच्चे माल पर शुल्क से विशेष छूट और कर में छूट जैसी कुछ माँगें रखी हैं। अपेक्षा है कि उद्योगों को मिलने वाले राज्य सरकार के जिस समर्थन के कारण आज गुजरात विकसित राज्यों में से एक है, वही समर्थन मणिकरण पावर को मिले और भारत में लिथियम का सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो सके।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।