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आपूर्ति पक्ष में सुधार भारत की कोविड प्रतिक्रिया की विशिष्ट विशेषता थी- आर्थिक सर्वेक्षण

दुनियाभर के देशों विशेष रूप से विकसित देशों ने कोविड-19 लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों से आए आर्थिक तनाव को कम करने के लिए मांग पक्ष के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया। ऐसे में भारत की प्रतिक्रिया थोड़ी अलग थी। समस्या से निपटने हेतु सरकार ने टूलकिट की विशिष्ट विशेषताओं में से एक आपूर्ति पक्ष सुधारा था। इन बातों के साथ आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 को आज संसद में पेश किया गया।

यह विचार दो कारकों से प्रेरित था। एक नीति निर्माताओं ने महसूस किया कि जहाँ लॉकडाउन और प्रतिबंधों ने मांग को कम किया, वहीं आपूर्ति शृंखला में भी व्यवधान और टूट-फूट हुई।

दूसरा, सरकार ने महसूस किया कि कोविड के बाद की दुनिया कई तरह के कारकों से प्रभावित होगी- प्रौद्योगिकी में परिवर्तन, उपभोक्ता व्यवहार, भू-राजनीति, आपूर्ति-शृंखला, जलवायु परिवर्तन और इसी तरह ये सभी कारक एक-दूसरे के साथ अप्रत्याशित तरीके से काम करेंगे। इस वजह से कोविड के बाद की अर्थव्यवस्था केवल पूर्व-कोविड अर्थव्यवस्था की फिर से मुद्रास्फीति नहीं होगी। केवल मांग के उपायों के साथ इसे वापस बनाना कोई समाधान नहीं है।

ऐसे में भारत की रणनीति, जहाँ तक आपूर्ति पक्ष के उपायों का संबंध था, उन सुधारों को शुरू करना था, जो अप्रत्याशित कोविड के बाद की दुनिया से निपटने के लिए लचीलेपन और नवाचार में सुधार करते हैं।

यह कारक बाज़ार सुधारों, अंतरिक्ष, ड्रोन, भू-स्थानिक मानचित्रण, व्यापार वित्त फैक्टरिंग आदि जैसे क्षेत्रों को नियंत्रित करने में चला गया और दूरसंचार क्षेत्र में प्रक्रिया सुधार भी शुरू कर दिया।

पिछली तिथियों से कर जैसे पुराने मुद्दों को अंततः सुलझा लिया गया, जबकि सरकार ने निजीकरण, मुद्रीकरण और भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया।

इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों की परिभाषाओं को संशोधित किया गया, विनिर्माण व सेवा एमएसएमई के मध्य के अंतर को हटा दिया गया और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया।