इन्फ्रास्ट्रक्चर
नया पीपीपी मॉडल लाकर निजी कंपनियों को पूर्वी डीएफसी में आकर्षित करने की योजना

पूर्वी समर्पित मालवाहक गलियारे (ईडीएफसी) के लिए सरकार ने तय किया है कि पश्चिम बंगाल के दानकुनी तक रेल गलियारा बनाने की बजाय पहले चरण में सोननगर (बिहार) से नया अंडाल (बंगाल) तक विकास किया जाए।

सूत्रों ने बताया कि समर्पित मालवाहक गलियारा निगम (डीएफसीसी) का कहना है कि सोननगर से नया अंडाल के बीच 374 किलोमीटर लंबे भाग के लिए उनके पास 95 प्रतिशत भूमि उपलब्ध है और इसलिए उसके लिए शीघ्र बोलियाँ आमंत्रित की जा सकती हैं। शेष भाग के लिए उनके पास मुश्किल से 55 प्रतिशत भूमि है।

जब से समर्पित मालवाहक गलियारे की परियोजना शुरू हुई है, तब ही से सरकार ने तय किया हुआ था कि सोननगर से दानकुनी के बीच का भाग निजी-सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के आधार पर बनाया जाएगा।

“किसी भी परियोजना में निजी क्षेत्र को आमंत्रित करने के लिए 95 प्रतिशत भूमि उपलब्धता होनी चाहिए और वह पहले खंड में है। इस प्रकार हम इसी वित्तीय वर्ष में पहले खंड के लिए बोलियाँ आमंत्रित कर लेंगे। नया अंडाल तक संयोजकता हो जाने से काफी आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँगी।”, सूत्रों ने कहा।

डीएफसीसी के प्रबंध निदेशक आरके जैन ने कहा कि नए पीपीपी मॉडल के तहत पहला खंड विकसित किया जाएगा जिसमें 12,000 करोड़ रुपये का निवेश लगेगा। निजी कंपनियों के साथ वार्ताएँ करके डीएफसीसी इस निर्णय पर पहुँची है।

“ट्रैफिक व 30 वर्षों की रियायत अवधि के दौरान मिलने वाले राजस्व को लेकर वे लोग शंकित थे। इसलिए हम एक नया मॉडल अपनाएँगे जिससे राजस्व व निर्माण में निवेशक के लिए कोई जोखिम न रहे।”, जैन ने आगे कहा।

ईडीएफसी के हितधारकों के साथ बैठक में बैठे (बीच में) जैन

नए मॉडल में अनुबंध की अवधि 35 वर्षों की होगी जिसमें पाँच वर्षों की निर्माण अवधि होगी। डीएफसीसी का प्रस्ताव है कि निर्माण अवधि के दैरान वह परियोजना की लागत का 25 प्रतिशत देगा। निर्माण के पहले वर्ष में 95 प्रतिशत भूमि दी जाएगी और शेष भूमि अगले वर्ष दी जाएगी।

“सुविधाओं के स्थानांतरण का दायित्व हमारा होगा।”, जैन ने कहा। निजी कंपनी डिज़ाइन, वित्तपोषण (परियोजना की लागत का 75 प्रतिशत), निर्माण, परिचालन और अनुबंध अवधि में रखरखाव के लिए उत्तरदायी होगी, उसके बाद परियोजना डीएफसीसी को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

“ट्रेनें हम चलाएँगे और इसलिए निजी कंपनी को मालवहन एवं राजस्व को लेकर चिंतित नहीं होना पड़ेगा। निर्माण के बाद 30 वर्षों की अवधि के रखरखाव व परिचालन के लिए वार्षिकी या किश्त की बोली निजी कंपनियाँ लगाएँगी।

वार्षिकी का भुगतान प्रदर्शन के आधार पर होगा और यदि प्रदर्शन अनुबंध के अनुकूल नहीं है तो कम वार्षिकी दी जाएगी। इस भाग के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के परिचालन एवं रखरखाव के लिए निजी कंपनी उत्तरदायी होगी इसलिए काम की गुणवत्ता बेहतर होगी।”, जैन ने कहा।

अपेक्षा है कि यह खंड हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बड़े ऊर्जा अधिष्ठानों, औद्योगिक गलियारों और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क्स (एमएमएलपी) को सेवा देगा। निर्मित स्टील उपभोग व उत्पादन के बढ़ते ट्रेंड के कारण इस मार्ग पर स्टील ट्रैफिक बढ़ेगा।

भारतीय और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, बैंकों, कन्सल्टेन्सी कंपनियों आदि से 40 प्रतिभागियों ने 23 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग एवं आमने-सामने हुई हितधारकों की बैठक में भाग लिया था।

23 सितंबर को हुई बैठक

आईएफसी जैसे बहुपक्षीय वित्तीय संगठन, राष्ट्रीय निवेश एवं इंफ्रास्ट्रक्चर कोष, एडेलवीस परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी जैसे वित्तीय संगठनों तथा टाटा प्रोजेक्ट्स, अडानी समूह, एल एंड टी, जीएमआर समूह, जीआर इंफ्रा, कल्पतरु पावर ट्रान्समिशन, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स जैसी भारतीय कंपनियों ने भाग लिया।

इसके अलावा साइमन्स, एबीबी पावर प्रोडक्ट्स एंड सिस्टम्स इंडिया, एल्सटम, सोजित्ज़-इंडिया और केईसी इंटरनेशनल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी बैठक में सम्मिलित हुई थीं। अधिक ट्रैफिक को आकर्षित करने एवं मालवहन में रेल की लक्षित भागीदारी को प्राप्त करने के लिए भी डीएफसीसी की कुछ योजना है।

खंड मार्गरेखा पर एमएमएलपी विकसित किए जाएँगे एवं अंतिम छोर की संयोजकता के लिए साइडिंग व फीडर मार्ग बनाए जाएँगे। इस क्षेत्र में आने वाले लोग जो खेती करते हैं या छोटे व्यापारी, कारीगर व औद्योगिक या व्यावसायिक अधिष्ठानों के कर्मचारी हैं, उन्हें इस परियोजना का बहुत लाभ मिलेगा।

इससे पहले जुलाई में सोननगर से झारखंड के गोमोह के बीच के खंड को पीपीपी मॉडल के आधार पर विकसित करने के लिए डीएफसीसी ने विभिन्न हितधारकों की बैठक बुलाई थी। हालाँकि, अब इस खंड को नया अंडाल तक बढ़ाकर विकसित करने की योजना है।

इससे पहले ईडीएफसी के न्यू खुर्जा-न्यू भाऊपुर खंड पर 99.3 किलोमीटर प्रति घंटा की उच्चतम गति का कीर्तिमान स्थापित किया जा चुका है। मई तक कुल 138 ट्रेनों ने 90 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति दर्ज की थी।

शुरुआत से मई तक ईडीएफसी पर कुल 3,397 ट्रेनें दौड़ चुकी हैं, वहीं अकेले मई में 836 ट्रेनें दौड़ी थीं। 31 मई को एक दिन में सर्वाधिक 40 ट्रेनों का कीर्तिमान बनाया गया था। यदि डब्बों की बात की जाए तो एक दिन में ईडीएफसी पर 2,987 डब्बे दौड़ते हैं।

अतिरिक्त जानकारी निष्ठा अनुश्री द्वारा जोड़ी गई है।
अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।