समाचार
एचएएल को अधिक ऊँचाई वाला छद्म उपग्रह विकसित करने हेतु शीघ्र अनुमति मिलेगी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एक स्वदेशी अधिक ऊँचाई वाला छद्म उपग्रह (एचएपीएस) विकसित करने के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तपोषण हेतु केंद्र सरकार की स्वीकृति की अपेक्षा कर रही है। यह परियोजना रक्षा बलों के लिए किए जा रहे ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का एक हिस्सा है।

एचएएल इस परियोजना को बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (एनएएल) के सहयोग से कार्यान्वित कर रहा है। एचएपीएस को विकसित करने में लगभग तीन से चार वर्ष का समय लगेगा, जबकि प्रारंभिक प्रतिकृति का मूल्य 50 करोड़ रुपये से कम होगा।

प्रवर्धित की गई प्रतिकृति में 70 फीट का विंग स्पैन होगा और एचएएल अक्टूबर तक राशि की स्वीकृति के लिए अनुमति की अपेक्षा कर रहा है।

परियोजना के साथ मिलकर काम कर रहे एक अधिकारी ने बताया, “हमें अक्टूबर में किसी भी समय स्वीकृति मिल जाएगी। पहले लगभग 70-फीट विंग स्पैन की एक छोटी प्रतिकृति होगी। शुरुआती प्रतिकृति का मूल्य 50 करोड़ रुपये से कम हो सकता है। एचएपीएस को विकसित होने में कम से कम 3 से 4 वर्ष लगेंगे। हम पहले से ही इसके डिज़ाइन पर काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त धन का उपयोग लंबी अवधि में किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “शीघ्र ही एक संस्थागत प्रतिकृति तैयार हो जाएगी। एचएपीएस के संपूर्ण विकास में कुछ वर्ष लगेंगे। शुरुआती निवेश की हमें आवश्यकता थी, वह 700 करोड़ रुपये था लेकिन यह कई वर्षों में खर्च किया जाएगा।”

एचएपीएस का वजन 500 किलोग्राम से अधिक होगा और यह 70,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ सकता है। यहाँ तक ​​कि महीनों तक वहाँ रह सकता है। यह सौर ऊर्जा का उपयोग करेगा और दूरसंचार एवं रिमोट सेंसिंग क्षेत्रों में उपयोग में लाया जाएगा, जो रक्षा व नागरिक दोनों उद्देश्यों की देखभाल करेंगे।

एचएपीएस को पारंपरिक उपग्रहों और यूएवी के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।