भारती
एक्सप्रेसवे से गुज़रती है योगी आदित्यनाथ के पुनर्निर्वाचन की राह

प्रसंग- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इंफ्रास्ट्रक्टर पर ज़ोर और भी मुखर हो गया है और वे इसके लिए अपने प्रयासों को भी दोगुना करने में लगे हुए हैं।

कमलेश कुमार धूरिया प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बाहर दशक भर से लइया चना बेच रहे हैं। “कुछ सालों पहले यहाँ शाम चार से रात नौ बजे तक ट्रैफिक जाम रहता था। यदि यहाँ कोई एंबुलेंस अटक जाए तो अस्पताल पहुँचने की उम्मीद न रहती थी। प्रायः लोग मार्ग में ही मर जाया करते थे। जबसे सड़क चौड़ी हुई है, कोई ट्रैफिक जाम नहीं हुआ।”, धूरिया ने कहा और संस्थान के अस्थाई कर्मचारी मनोज कुमार ने सहमति में हामी भरी।

“ज़मीन-आसमान का अंतर है।”, कुमार ने आगे कहा। धूरिया और कुमार की बातें आश्चर्यजनक नहीं थीं। लोकसभा चुनावों के समय जब संवाददाता उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र- पूर्वांचल से गुज़रे थे तो योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया जा रहा ज़ोर प्रत्यक्ष था। कई लोगों की भावनाओं में इसका प्रभाव भी देखने को मिला।

“क्या राज्य में कभी सड़कें इतनी अच्छी थीं।”, फूलपुर की भारतीय किसान खाद सहकारी मंडी में परिवहन का कारोबार चलाने वाले गणेश गोंड ने कहा। गोंड का संकेत राज्य राजमार्ग 7 की ओर था जो प्रयागराज और गोरखपुर को जोड़ता है।

इससे 250 किलोमीटर दूर गोरखपुर के कम्पियरगंज के निवासी और गल्फ में निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले फूल चंद निशाद ने कहा, “इस क्षेत्र में विकास कार्य की गति दोगुनी हो गई है। आप जहाँ भी देखें, नई सड़कों को बनता हुआ देख पाएँगे।”

यह समझ आ रहा था कि ये भावनाएँ मतों में फलीभूत होंगी क्योंकि मई के प्रथम सप्ताह में इन लोगों ने भाजपा का समर्थन करने की बात कही थी। निस्संदेह केवल अच्छी सड़कों के कारण ही भाजपा लोगों की पसंद नहीं थी लेकिन अवश्य ही यह एक महत्त्वपूर्ण कारण था।

सात माह बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इंफ्रास्ट्रक्टर पर ज़ोर और भी मुखर हो गया है और वे इसके लिए अपने प्रयासों को भी दोगुना करने में लगे हुए हैं। नवंबर में कैबिनेट ने 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के कई भागों को अनुमति दे दी। वहीं 340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है।

उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क है। 302 किलोमीटर लंबा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे- दो क्रियाशील एक्सप्रेसवे सबसे बड़ा नेटवर्क बनाते हैं।

उपरोक्त दो क्रियाशील, दो स्वीकृत और एक निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के अलावा गंगा के मार्ग पर 1,020 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे भी प्रस्तावित है। इन कार्यों की देखरेख करने वाली एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईडा) और भी कई प्रस्तावों पर कार्य कर रहा है।

विभिन्न एक्सप्रेसवे की संभाविक मार्गरेखा

संभवतः राज्य सरकार 2022 में योगी आदित्यनाथ के पुनर्निर्वाचन में एक्सप्रेसवे को एक उपलब्धि की तरह गिनाना चाहती है। लोकसभा चुनावों के बाद जुलाई में हुई बैठक में योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का कार्य पूरा होने की समय सीमा 2020 तय की।

राष्ट्रीय राजमार्ग 731 पर लखनऊ जिले के चांद सराय से यह शुरू होगा। बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर,  आज़मगढ़ और माऊ- बिहार सीमा पर पड़ने वाले जिलों से गुज़रकर यह एक्सप्रेसवे इन सात जिलों को राज्य की राजधानी से जोड़ेगा।

लखनऊ दिल्ली से लखनऊ-आगरा और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग को निर्बाध रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जोड़ देगा। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में पारित इस परियोजना को भाजपा सरकार ने बिल्कुल दरकिनार नहीं किया।

यदि और कुछ नहीं तो कम से कम यह योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता पर गोरखपुर तो है- गोरखनाथ पीठ की सीट जहाँ के वे अब भी महंत हैं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित है। 1998 से 2014 में उन्होंने लगातार पाँच बार संसद में गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रकार उनकी राजनीतिक व आध्यात्मिक दोनों ही शक्तियाँ राज्य के इस क्षेत्र में केंद्रित हैं।

हालाँकि शुरुआत में कुछ देरी हुई। जब आदित्यनाथ सरकार ने बागडोर संभाली तो पाया कि अखिलेश सरकार की बोलियाँ अधिक मूल्य पर तय की गई थीं। ऐसे में इन बोलियों को जून 2018 में निरस्त किया गया। नई बोलियाँ मंगवाई गईं और जुलाई 2018 में अनुबंधों पर हस्ताक्षर हुआ।

फलस्वरूप सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपये निर्माण कार्य में बचाए। पहले 11,836 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च अब 11,216 करोड़ रुपये पर आ गया है। अक्टूबर 2018 में एक्सप्रेसवे पर कार्य शुरू हुआ।

नवंबर के पहले सप्ताह में लखनऊ में यूपीईडा अधिकारियों ने संवाददाता को बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण का 20 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना को आठ भागों बाँटा गया है। गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पैकेज 1 व 2, ऐपको इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड पैकेज 3, जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स पैकेज 4 और 7, पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड पैकेज 5 तथा 6 एवं ओरिएंटल स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग पैकेज 8 पर काम कर रहे हैं।

अभी तक आवश्यक भूमि को 98 प्रतिशत अधिग्रहित कर लिया गया है। निर्माण के लिए भूमि को तैयार करने का 97 प्रतिशत कार्य किया जा चुका है जिसमें झाड़ियों को हटाना, मार्ग में आने वाली संरचनाओं को गिराना, आदि सम्मिलित होता है। भूमि को समतल करने का 58 प्रतिशत कार्य भी किया जा चुका है।

इन सब कार्यों की प्रगति को देखते हुए यूपीईडा अधिकारियों का कहना है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे समय पर पूरा हो जाएगा और 2020 की दीपावली तक इसपर वाहनों के आवागमन के आरंभ के प्रति वे आशावान हैं।

बाराबंकी जिले में निर्माणाधीन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

“2020 के उत्तरार्ध में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सड़क तैयार हो जाएगी। इसके बाद हम ट्रायल शुरू करेंगे। ट्रायल के बाद दीपावली 2020 तक मुख्य मार्ग वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।”, उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और यूपीईडा के प्रमुख अवनीश अवस्थी ने स्वराज्य  को बताया।

“मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक को खोलने के बाद हम अतिरिक्त कार्य अप्रैल 2021 तक पूरा करेंगे।”, अवस्थी ने कहा। उन्होंने आगे बताया, “परियोजना को पूरा करने की सामान्य समय-सीमा 36 महीनों की है और आशावादी समय-सीमा 30 महीनों की है। हम 30 महीनों में ही कार्य पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।”

राज्य के सबसे पूर्वी जिले बलिया तक इस एक्सप्रेसवे के विस्तार पर भी विचार चल रहा है। इससे एक्सप्रेसवे की लंबाई में 50-60 किलोमीटर और जुड़ जाएँगे। लेकिन वर्तमान में सरकार का ध्यान दूसरे विस्तार पर है- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे। अंबेडकर नगर और संत कबीर नगर जिलों से गुज़रकर यह एक्सप्रेसवे आज़मगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिलेगा।

नवंबर में गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की वित्तीय बोलियों को कैबिनेट स्वीकृति मिल गई व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए भी बोलियाँ मंगाई गईं हैं। 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। बांदा, हमीरपुर, जलाऊँ और औरैया जिलों से गुज़रते हुए यह उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से यमुना एक्सप्रेसवे तथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के माध्यम से जोड़ेगा।

चुनावी दृष्टि से यह क्षेत्र भाजपा के लिए महत्त्वपूर्ण है। बुंदेलखंड के सात जिलों में 19 विधानसभा सीटें पड़ती हैं जिनमें से सभी पर 2017 के चुनावों में भाजपा की विजय पताका लहरी थी। 2019 लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने 2014 का प्रदर्शन दोहराते हुए सभी चार सीटें जीती थीं।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे परियोजना महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में रक्षा गलियारा (डिफेन्स कॉरिडोर) विकसित करने पर केंद्र कार्य कर रहा है। दो अन्य एक्सप्रेसवे के साथ बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे छह क्षेत्रों- लखनऊ, आगरा, झाँसी, अलीगढ़, चित्रकूट और कानपुर- के बीच संयोजकता बढ़ाएगा।

बुंदेलखंड रक्षा गलियारे के क्षेत्र

यूपीईडा इन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहित कर रही है। पहले चरण में 5,000 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है जिसका 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य 93 प्रतिशत पूरा हो चुका है और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है।

यूपीईडा का कहना है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर इस साल के अंत से पहले काम शुरू हो जाएगा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर अगले वर्ष की शुरुआत में। “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर दिसंबर में ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर 2020 के शुरुआती महीनों में।”, अवस्थी ने स्वराज्य को बताया।

यूपीईडा के सूत्र बताते हैं कि दिसंबर के मध्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करेंगे। “हम बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का कार्य 2021 के अंत तक या अधिक से अधिक 2022 की शुरुआत तक पूरा करना चाहते हैं।”, अवस्थी ने आगे बताया।

2022 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। विकास में इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्त्व अवश्य ही है, विशेषकर एक्सप्रेसवे का और योगी आदित्यनाथ के पुनर्निर्वाचन की योजना स्पष्ट है।

प्रखर स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @prakharkgupta के माध्यम से ट्वीट करते हैं।