भारती
विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए उत्तर प्रदेश करे सुनियोजित शहरीकरण

कोविड-19 ने हमारे दैनिक जीवन के साथ-साथ कई क्षेत्रों के निर्णयों पर भी प्रभाव डाला है। कई विनिर्माण इकाइयाँ चीन को छोड़कर बेहतर विकल्प खोज रहीं हैं और राजनीतिक अर्थव्यवस्था के पंडितों का मानना है कि भारत विश्व का नया कारखाना बन सकता है।

भारत इस आपदा को अवसर बना सकेगा या नहीं, यह सुधार लाने की राजनीतिक इच्छशक्ति पर निर्भर करता है, विशेषकर श्रम सुधार जो भारत में श्रम आधारित विनिर्माण क्षेत्र के विकास में बाधा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए कुछ नियमों को छोड़कर उद्योगों को तीन वर्षों के लिए श्रम कानून से मुक्त कर दिया है।

भारत का कारखाना उत्तर प्रदेश कैसे बनाए

योगी आदित्यनाथ एक कुशल प्रशासक सिद्ध हुए हैं। कानून-व्यवस्था को सुचारु रखने और नौकरशाही को नियंत्रित करने से देशभर में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है।

महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे विनिर्माण राज्यों से प्रवासी अपने गृह राज्य को लौट चुके हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में 30 लाख से अधिक प्रवासी लौटे हैं।

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि कौशल-मानचित्रीकरण किया जा रहा है और लौटे हुए श्रमिकों को राज्य में ही रोजगार दिया जाएगा। इस प्रकार आवश्यकता भी सुधारों की माँग करती है।

अगर सही तरह से आगे ले जाकर इसका विस्तार कर सही तरीके से लागू किया जाए तो ये सुधार सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य को विनिर्माताओं के लिए सबसे लोकप्रिय राज्य बना देंगे।

अस्पष्ट शहरीकरण

औद्योगीकरण की प्रक्रिया में शहरीकरण अपरिहार्य है। औद्योगिक केंद्रों के साथ एक जीवंत विनिर्माण क्षेत्र नए टाउनशिप निर्मित करता है और वर्तमान शहरी समूहों का विस्तार करता है।

यह एक सहक्रिया है जहाँ औद्योगीकरण और शहरीकरण एक-दूसरे के सहायक बनते हैं। इसलिए यदि उत्तर प्रदेश विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है तो इसके शहरीकरण की योजना बनानी होगी।

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश सबसे कम शहरीकृत राज्यों में से एक है जहाँ शहरी जनसंख्या मात्र 22 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 31.14 प्रतिशत का है। यह आँकड़ा अब तक बढ़ा होगा लेकिन फिर भी यह राष्ट्रीय औसत (अनुमानित 40 प्रतिशत) से काफी कम है।

ब्राज़िल की जनसंख्या से भी अधिक जनसंख्या वाले राज्य में शहरी आबादी में थोड़ी वृद्धि भी ज़मीनी स्तर पर बड़ा असर दिखाती है। उदाहरण देखें, उत्तर प्रदेश की शहरी जनसंख्या में 5 प्रतिशत वृद्धि का अर्थ है कि 1 करोड़ अतिरिक्त लोग शहरों में रहने लगें।

यदि उत्तर प्रदेश सरकार वैश्विक विनिर्माताओं को आकर्षित करने में सफल होती है तो शहरीकरण बढ़ेगा जो शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व तनाव डालेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में शहरीकरण दुष्प्रभाव दिखाने लगेगा जो औद्योगीकरण की कुशलता के लिए नकारात्मक है। अर्थव्यवस्था भी इससे कम लाभ कमा पाएगी। इसलिए शहरीकरण के लिए पहले से योजना बनानी होगी।

एक्सप्रेसवे के साथ शहरी बस्तियों पर ध्यान दें

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में दूसरी सबसे बड़ी शहरी जनसंख्या है- 4.45 करोड़ लोगों की। भारत में शहरी समूहों (1 लाख से अधिक जनसंख्या वाली नगरीय बस्तियाँ) की संख्या 474 है जिसमें से सर्वाधिक- 67 उत्तर प्रदेश में है।

साथ ही उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक नगर भी हैं- 648 वैधानिक नगर और 267 जनगणना नगर। वर्तमान में झुग्गी-बस्ती में रहने वाले लोगों की संख्या में उत्तर प्रदेश की 9.5 प्रतिशत भागीदारी है, वहीं महाराष्ट्र की 18 प्रतिशत।

यदि उत्तर प्रदेश की शहरी बस्तियों के आसपास सरकार भौतिक और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान केंद्रित न करे तो झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली जनसंख्या तेज़ी से बढ़ेगी जो शहरीकरण पर दुष्प्रभाव डालेगी।

उत्तर प्रदेश की पश्चिमी सीमा पर बसे दिल्ली में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा शहरी समूह है जहाँ 2.6 करोड़ लोग (2015 का डाटा) रहते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की जनसंख्या 4.6 करोड़ (2011 का डाटा) है। एनसीआर में उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाज़ियाबाद, मेरठ और मुज़फ्फरनगर शहर आते हैं।

इस प्रकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीव्र शहरीकरण होना ही है। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पूरा किया गया 96 किलोमीटर लंबा पहुँच-नियंत्रित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे 14 लेनों के साथ भारत का सबसे चौड़ा एक्सप्रेसवे है जो निस्संदेह ही इस क्षेत्र में शहरीकरण को बढ़ावा देगा।

उत्तर प्रदेश में देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे नेटवर्क है। 302 किलोमीटर लंबा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे क्रियाशील है। 340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर तेज़ी से काम जारी है और 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे एवं 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी सरकार ने नवंबर 2019 में स्वीकृतियाँ दे दीं थीं।

2020-21 के बजट में 1,020 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इन एक्सप्रेसवे से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रभाव से आने वाली शहरी जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होगी। ये एक्सप्रेसवे शहरीकरण को एनसीआर से उत्तर प्रदेश के आंतरिक हिस्सों तक ले जाएँगे।

इसलिए इन एक्सप्रेसवे के किनारे बसी शहरी बस्तियों को उपयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जो राज्य के विनिर्माण व निर्यात केंद्र बनने की महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकें।

ऐतिहासिक शहरों में अवसर

उत्तर प्रदेश में कई तीर्थ शहर हैं जैसे वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज और अयोध्या जो इसे आध्यात्मिक राजधानी बनाते हैं। विश्व भर के लाखों लोग इन शहरों में जाते हैं। इसलिए इन तीर्थ केंद्रों पर पर्यटन उद्योग विकसित करने का अच्छा अवसर है।

राज्य और केंद्र सरकारों ने इसके लिए कई प्रयास किए हैं, विशेषकर वाराणसी के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करके। लेकिन पूरे सामर्थ्य तक पहुँचने के लिए काफी कुछ किया जाना शेष है।

पर्यटन श्रम आधारित उद्योग है जो बड़ी मात्रा में रोजगार उत्पन्न करता है। अगर प्रबंधन अच्छा रहे तो यह लगभग शून्य प्रदूषण वाला उद्योग है जो उत्तर प्रदेश जैसे घनी जनसंख्या वाले राज्य के लिए आवश्यक है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि इन तीर्थ केंद्र पर लघु उद्योगों के केंद्र भी है जैसे वाराणसी में कपड़ा उद्योग।

इसलिए योगी आदित्यनाथ सरकार को विनिर्माण के साथ-साथ राज्य को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का अवसर नहीं खोना चाहिए।

आगे की ओर लंबी छलांग

शहरीकरण लोगों की जीवन गुणवत्ता को बढ़ाता है। उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के ही लिए यह अवसर और बाज़ार खोलता है। शहरीकरण से अर्ध-रोजगार वाले कृषि क्षेत्र का अतिरिक्त श्रमबल भी विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में लगाया जा सकता है जो भारत जैसे देश के लिए आवश्यक है क्योंकि हमारी आधी जनसंख्या कृषि और इससे संबंधित रोजगार पर ही आश्रित है।

उत्तर प्रदेश में भारत की जनसंख्या का  1/6 भाग रहता है। इसलिए उत्तर प्रदेश में कोई भी सकारात्मक परिवर्तन भारत के परिदृश्य पर भी अच्छा-खासा प्रभाव डालेगा।

एक शहरीकृत उत्तर प्रदेश, शहरीकृत भारत के सपने को आगे बढ़ाएगा। केंद्र और राज्य सरकार को एक-दूसरे का सहयोग करके उत्तर प्रदेश के भावी शहरीकरण की योजना बनानी चाहिए।

चीन के शहरीकरण की गाथा अतुल्य है, इसके तट पर बड़े शहर काफी कम समय में विकसित हो गए हैं। इन शहरों ने चीन की प्रगति को बल दिया जिससे चीन विश्व का निर्यात बाज़ार बन सका। 1990 में 26 प्रतिशत 2020 तक 61 प्रतिशत हो गया चीन शहरीकरण स्तर।

यदि आज आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्टर उपलब्ध कराके शहरीकरण को सुनियोजित और अच्छी तरह से लागू किया जाए तो उत्तर प्रदेश इस अतुल्य गाथा को दोहरा सकता है। हालाँकि चीन में जहाँ यह विकास समुद्र तट पर हुआ, वहीं भारत में यह गंगा किनारे होगा।