भारती
माल ढुलाई परिवहन व इंफ्रास्ट्रक्चर का नगर नियोजन में समावेशन ट्रैफिक समस्या का हल

विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते शहरीकरण के बीच माल ढुलाई परिवहन एक महत्त्वपूर्ण भाग बन गया है लेकिन साथ ही नगरीय ट्रैफिक समस्या का एक कारण भी। दिल्ली में यह समस्या सबसे विकराल है जहाँ प्रतिदिन 1.5 लाख बाहरी वाहन शहर में प्रवेश करते हैं और ट्रैफिक जाम के साथ-साथ प्रदूषण भी करते हैं। इसके अलावा ये दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा को भी क्षति पहुँचाते हैं। एक रिपोर्ट का दावा है कि दिल्ली में 44 प्रतिशत दुर्घटनाएँ मालवाहकों के कारण होती हैं।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि परिधीय (पेरिफेरल) एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्ली में प्रदूषण 32 प्रतिशत कम हो गया है। पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से अनुमानित तौर पर 50,000 वाहनों को दिल्ली की सड़कों से दूर रखा जा सकेगा। इसी प्रकार ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहा बेंगलुरु भी पेरिफेरल रिंग रोड परियोजना पर कार्य कर रहा है। कई शहरों में रिंग रोड अस्तित्व में है और कई इसे विकसित कर रहे हैं।

लेकिन पेरिफेरल परियोजनाएँ सिर्फ वर्तमान समस्याओं का निवारण कर सकती हैं। भविष्य में ये परिधीय सड़कें बढ़ते शहरीकरण के साथ आंतरिक सड़कें बन जाएँगी। इसलिए हमें भविष्य के अनुसार नियोजन करना होगा।

भारतीय शहरों में माल ढुलाई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि यहाँ भूमि क्षेत्र असमान रूप से वितरित हैं। मिश्रित भूमि उपयोग पद्धति, मिश्रित ट्रैफिक और माल ढुलाई के लिए गैर-मोटर चालित वाहनों का प्रयोग भी अन्य कारणों में हैं। एक अध्ययन बताता है कि भारत रसद और परिवहन पर जीडीपी का 14.4 प्रतिशत व्यय करता है, जबकि अन्य विकासशील देश 8 प्रतिशत ही व्यय करते हैं।

मालवाहकों के कारण ट्रैफिक जाम

माल ढुलाई के लिए उपयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव सीधे तौर पर जीडीपी को हानि पहुँचाता है। इसकी महत्ता को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों भारत, चीन और ब्राज़िल जैसे प्रमुख विकासशील देशों में शोधकर्ताओं और नीति-निर्धारकों ने इसपर ध्यान देना शुरू किया है।

मात्र 31 प्रतिशत भारतीयों के शहरों में रहने के बावजूद भारत की शहरी जनसंख्या यूरोपीय संघ से अधिक है। भारत के 39 शहरों में 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं, जिसमें दिल्ली और मुंबई सबसे बड़े दो शहर हैं। साथ ही 388 शहरों की जनसंख्या 1 लाख से अधिक है। ऐसे में भारतीय शहर माल ढुलाई के लिए सुव्यवस्थित हों, यह आवश्यक हो जाता है।

विभिन्न गतिविधियों और हितधारकों के होने से यह अध्ययन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। समाधान को खोजने के लिए हम इसके छह आयामों को समझते हैं।

  • वस्तुओं एवं सेवाओं की संख्या- शहरी ट्रैफिक पर इसका प्रभाव माल ढुलाई की यात्रा संख्या से निर्धारित होता है। लेकिन जिन शहरों में कोई विशेष उद्योग माल ढुलाई का बड़ा भाग रखता हो, वहाँ केवल उस उद्योग का अध्ययन भी आवश्यक जानकारी दे सकता है। अध्ययन में घरेलू आवश्यकताओं जैसे त्वरित उपयोग वस्तुएँ (एफएमसीजी), बेकरी या दूध उत्पाद पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • अध्ययन क्षेत्र- कुछ अध्ययन केवल मुख्य बाज़ार क्षेत्र में किए जाते हैं तो कुछ पूरे शहर व उसके आसपास के क्षेत्र पर भी। नीति निर्धारण में अध्ययन क्षेत्र काफी महत्त्व रखता है।
  • हितधारक- इस अध्ययन में पाँच प्रमुख हितधारक हैं।

1. प्रशासन- स्थानीय सरकारी निकाय, राज्य या क्षेत्र के नीति निर्धारक, ट्रैफिक पुलिस आदि।
2. आपूर्तिकर्ता- अध्ययन क्षेत्र में विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन और आपूर्ति करने वाला।
3. वाहक- आपूर्तिकर्ताओं से उपयोगकर्ताओं तक वस्तुओं और सेवाओं का वितरण करने वाला जैसे परिवहन सेवा प्रदाता, आदि।
4. उपयोगकर्ता- अध्ययन क्षेत्र में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करने वाला या उन्हें पुनः वितरित करने वाला जैसे विक्रेता।
5. निवासी- शहरी माल ढुलाई में निवासियों की सीधी भूमिका नहीं होती है लेकिन वे इससे होने वाले ट्रैफिक जाम व प्रदूषण से प्रभावित होते हैं।

  • उद्देश्य- हितधारकों और अध्ययन क्षेत्र के अनुसार लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन मोटे तौर पर उद्देश्य है लॉजिस्टिक्स पर सामाजिक लागत को कम करना।

  • सर्वेक्षण प्रणाली- लक्ष्य और अध्ययन क्षेत्र के अनुसार प्रणाली बदलती है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में माल ढुलाई पद्धति का डाटा उपलब्ध है लेकिन भारत जैसे देश में यह डाटा प्राप्त करना कठिन है। अधिष्ठानों का सर्वेक्षण, सड़क किनारे सर्वेक्षण, व्यवसायिक वाहन-चालकों का सर्वेक्षण, संख्या सर्वेक्षण, आपूर्तिकर्ताओं का सर्वेक्षण, वस्तु परिवहन, माल ढुलाई संचालकों या सेवा प्रदाताओं का सर्वेक्षण, पार्किंग सूची, वाहन यात्रा डायरी, माध्यमिक डाटा स्रोतों जैसी विभिन्न पद्धतियाँ अपनाई जा सकती हैं।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में समस्या

    अध्ययन का प्रयोग- इस अध्ययन का चार तरह से प्रयोग किया जा सकता है-

1. ट्रैफिक नीति को उन्नत करना- अध्ययन के परिणाम हमें क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा प्रदान करेंगे जैसे व्यस्त घंटों में भारी वाहनों के प्रवेश को निषेध किया जाना, आदि।
2. नियोजन सिद्धांतों के सुझाव- अध्ययन से विश्लेषणात्म मॉडल विकसित किए जा सकते हैं जो नगर अधिकारियों को नियोजन की दिशा प्रदान करेंगे जैसे पार्किंग स्थल व सड़क नियोजन, आदि।
3. नई तकनीक को अपनाना- जीआईएस, जीपीएस और इंटेलिंजेंट ट्रांस्पोर्ट सिस्टम (आईटीएस) तकनीक से रियल टाइम ट्रैफिक के विषय में पता चल सकता है जो नगरीय मालवाहकों को दिशा दे सके हैं।
4. शहर और लॉजिस्टिक्स पा फैलाव- अलग-अलग काल में किए गए अध्ययन हमें बता सकते हैं कि गोदाम (वेयरहाउस) और समेकन केंद्र कहाँ विकसित हो रहे हैं जो दीर्घकालिक नियोजन को दिशा दे सकते हैं।

भावी शोध हेतु सुझाव

भारतीय परिस्थितियों में कुछ कारक अभी अनभिज्ञ हैं जैसे शहरी माल ढुलाई का सूक्ष्म सतत तंत्र। भावी शोध के लिए इन अनभिज्ञताओं को भरना होगा। यह भी देखा गया है कि ऐसे अध्ययन प्राय- दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों पर ही केंद्रित रहते हैं लेकिन अन्य मेट्रो और मध्यम शहरों में भी माल ढुलाई इंफ्रास्ट्रक्चर की उतनी ही आवश्यकता है।

दीर्घकाल में नगरीय माल ढुलाई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए शहर विशिष्ट या वस्तु विशिष्ट मॉडल विकसित किए जाने चाहिए। आने वाले समय में भारत के खुद के शहरी माल ढुलाई परिवहन विकास दिशानिर्देश होने चाहिए जिसमें ट्रिप जेनरेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर नियोजन और माल परिवहन केंद्रित शहरी विकास हेतु निर्देश हों। इसी प्रकार संस्थानिक स्तर पर परिवहन अभियंताओं के लिए निर्देश और राजमार्ग क्षमता दिशानिर्देश भी हों।

माल ढुलाई इंफ्रास्ट्रक्चर ती सफलता के लिए सभी हितधारकों का संगठित प्रयास आवश्यक है। तंत्र स्थिरता और कुशलता केवल प्रशासन के प्रयासों से नहीं आ सकती। किसी भी नीति को लागू करने से पहले हितधारकों के विचारों पर भी अध्ययन होना चाहिए।

भारत में माल ढुलाई इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के कई अवसर हैं और विकासशील देशों की क्षमताओं को ध्यान में रखकर किए गए अध्ययन इस अंतर को भरने में सक्षम भी होंगे। शोधकर्ताओं और नगर प्रशासन को साथ आकर इस नियोजन के लिए विशेष समूह स्थापित करना चाहिए जो इसपर विचार करके नए समाधान खोजे। अर्थव्यवस्था, सड़क सहजता व सुरक्षा एव पर्यावरण के लिए .ह अति आवश्यक है।