भारती
कानपुर मेट्रो निर्माण ने लॉकडाउन के बाद फिर पकड़ी गति, आगरा मेट्रो पर विराम

लॉकडाउन में थम चुके इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य पुनः गति पकड़ रहे दिख रहे हैं। आगरा और कानपुर मेट्रो के लिए सामान्य परामर्श (जेनरल कन्सल्टेन्सी) देने के लिए एक स्पैनिश और इटालियाई संयुक्त उद्यम को चुन लिया गया है।

स्पेन की टेक्निका वाई प्रोजेक्टोस एसए (टिप्सा) और इटली की इटैलफर एसपीए के संयुक्त उद्यम ने मूल्य व गुणवत्ता के आधार पर सर्वाधिक अंक प्राप्त किए थे। अब वे आगरा और कानपुर मेट्रो के प्रथम चरण के नियोजन, डिज़ाइन, खरीद, परियोजना क्रियान्वयन, परीक्षण और नियुक्ति से जुड़े परामर्श देंगे।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल निगम (यूपीएमआरसी) ने 12 दिसंबर 2019 को आवेदन मंगवाए थे और 13 मार्च 2020 को तकनीकी बोलियाँ खोली गई थीं। इसके बाद जून के तीसरे सप्ताह में हुए चुनाव के समय दो ही कंपनियाँ बची थीं जिसमें टिप्सा-इटैलफर को 7547.84 अंक मिले तो एकॉम एशिया-एजिस रेल-आरवी असोसिएट्स-एजिस कन्सल्टिंग इंजीनियर्स संयुक्त उद्यम को 6497.9 अंक।

यूपीएमआरसी के साथ जो अनुबंध हुआ है, वह पाँच वर्षों का व 4.3 करोड़ यूरो की लागत का है जिसमें से इटैलफर की 1.9 करोड़ यूरो की साझेदारी है। अनुबंध को पूरा करने की तिथि तय नहीं हुई है लेकिन इटैलफर के सीईओ का मानना है कि यह सितंबर 2020 से शुरू होकर 60 महीनों का रहेगा।

इस अनुबंध के बाद ज़मीनी स्तर पर भी कानपुर मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। कई कर्मचारी अपने गाँवों से शहर वापस लौट गए हैं एवं कास्टिंग यार्ड और गलियारे में 570 श्रमिक कार्यरत हैं। श्रमिक कास्टिंग यार्ड में ही रह सकें, इसके लिए शिविर बनाए जा रहे हैं। कुल 104 कक्ष बनाए जाएँगे जिनमें से 60 बन चुके हैं।

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने भी बताया कि कानपुर मेट्रो का कार्य शुरू हो चुका है। वे लॉकडाउन के कारण समय के हुए नुकसान की भरपाई करके तय समय सीमा तक ही परियोजना को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। 2021 के अंत कर इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

कानपुर मेट्रो

2011 में व्यापक मोबिलिटी योजना के तहत तो कानपुर विकास प्राधिकरण ने कुल 70 किलोमीटर के दो गलियारों का सुझाव दिया था लेकिन प्राथमिकता के आधार पर लगभग 24 किलोमीटर लंबे आईआईटी कानपुर से नौबस्ता के पहले गलियारे और कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8 तक लगभग 9 किलोमीटर लंबे दूसरे गलियारे को स्वीकृति मिली है।

11,076 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 2019 के केंद्रीय बजट में स्वीकृति मिली थी। पहले गलियारे का पहला उपखंंड लगभग 9 किलोमीटर लंबा आईआईटी कानपुर से मोती झील तक व ज़मीन से ऊपरी स्तर (एलिवेटेड) पर होगा। इस मार्ग में नौ स्टेशन होंगे।

इस उपखंड के स्टेशनों एवं वायाडक्ट के कार्य का अनुबंध ऐफकॉन्स इंफ्रा ने सितंबर 2019 में 735 करोड़ रुपये की बोली लगाकर जीता था। इस मार्ग पर स्तंभ बनाए जा चुके हैं व अब पीयर कैप्स का काम शुरू हो गया है। लॉकडाउन से पहले 20 पीयर कैप ढाल लिए गए थे व कुछ महीनों के ठहराव के बाद 19 जून को 21वाँ पीयर कैप ढाला गया।

पहले गलियारे का डिपो पॉलिटेक्निक महाविद्यालय परिसर में होगा व महाविद्यालय स्थानांतरित किया जाएगा। तीन छात्रावासों का विध्वंस कार्य की भी किया जा चुका है। अधिकारियों का मानना है कि पीयर कैप के ऊपर गर्डर रखने का काम भी जुलाई से शुरू हो जाएगा। गर्डर के ऊपर ही मेट्रो रेल की पटरी बिछाई जाएगी।

चुन्नीगंज से ट्रांसपोर्ट नगर का भाग भूमिगत होगा व इसमें आठ स्टेशन होंगे। चुन्नीगंज स्टेशन पर उतरकर यात्री चुन्नीगंज अंतर-राज्यीय बस स्टैंड भी जा सकेंगे। बड़ादेवी चौराहे से नौबस्ता तक के अंतिम उपखंड, जो एलिवेटेड होगा, में पाँच स्टेशन होंगे।

एलिवेटेड भाग के लिए टेंडर तो 2019 में ही सौंप दिए गए थे लेकिन जून में भूमिगत भाग के लिए भी टेंडर मंगाए गए हैं। जुलाई की शुरुआत में ही इन्हें तय करके कार्य शुरू करने की संभावना जताई जा रही है। कहीं-कहीं पर भूमिगत मेट्रो ज़मीन से 20 मीटर नीचे भी स्थित है।

8.6 किलोमीटर लंबे दूसरे गलियारे में 4.2 किलोमीटर लंबा भाग भूमिगत होगा व 4 किलोमीटर भाग एलिवेटेड। पहले गलियारे से दूसरा गलियारा रावतुपर में मिलेगा। इस गलियारे में कुल नौ स्टेशन होंगे जिनमें से चार भूमिगत और पाँच ज़मीन से ऊपर होंगे। भविष्य में इस गलियारे को बढ़ाकर गंगा पार भी ले जाया जा सकता है।

आगरा मेट्रो

आगरा मेट्रो के प्रथम चरण में भी दो गलियारे होंगे- सिकंदरा से ताज पूर्वी गेट तक 14 किलोमीटर लंबा पहला गलियारा और आगरा कैन्ट से कालिंदी विहार तक 16 किलोमीटर लंबा दूसरा गलियारा। हालाँकि 8,379 करोड़ रुपये की इस परियोजना के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।

याचिकाकर्ता डॉ शरद गुप्ता का कहना है कि ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (टीटीज़ेड) प्राधिकरण, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, वन विभाग, भूगर्भ जल विभाग, भूजल आयोग समेत कई संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) नहीं मिला है। इसके बाद सीपीसीबी ने यूपीएमआरसी से अनुमतियों की जानकारी माँगी है।

गुप्ता का यह भी दावा है कि आगरा मेट्रो के लिए स्मारक एवं पर्यावरण पर प्रभाव का विश्लेषण भी नहीं किया गया है जबकि लखनऊ मेट्रो में ऐसा हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी माना था कि टीटीज़ेड के कारण आगरा मेट्रो का कार्य रुका हुआ है एवं बताया था कि राज्य सरकार पूरी ताकत से अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में रख रही है।

नियम और कानून जब इस परियोजना को आगे बढ़ने देंगे तब हम इसकी प्रगति के बारे में जानेंगे, अभी के लिए हम परियोजना को समझ लेते हैं। पहले गलियारे का पाँच उपखंड हैं जिसमें दो ज़मीन से ऊपरी स्तर पर है, एक भूमिगत और दो अलग स्तरों (भूमिगत और एलिवेटेड) को जोड़ने वाले।

सिकंदरा से शास्त्री नगर तक का पहला उपखंड 3.6 किलोमीटर लंबा है जिसपर चार स्टेशन होंगे। साथ ही प्राचीन स्मारक व पुरातत्व अधिनियम 1958 का ध्यान रखते हुए अकबर के मकबरे से मार्गरेखा 105 मीटर दूर होगी।

विश्वविद्यालय से ताज महल तक के भूमिगत भाग में आठ स्टेशन होंगे। 7.2 किलोमीटर लंबे इस भाग के लिए ध्यान रखा गया है कि कोई भी अंश सड़क के नीचे न हो जिससे निर्माण कार्य के कारण ट्रैफिक में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। 2.3 किलोमीटर लंबा आखिरी उपखंड भूमि से ऊपरी स्तर पर होगा व इसमें तीन स्टेशन होंगे।

दूसरा गलियारा पूर्ण रूप से ज़मीन के ऊपर ही होगा। इस मार्गरेखा पर 15 स्टेशन होंगे। दोनों गलियारे आपस में आगरा कॉलेज मेट्रो स्टेशन पर मिलेंगे। साथ ही आगरा कैन्ट रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्री भी दूसरे गलियारे की सेवा ले सकते हैं।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।