भारती
सच्चा ज्ञान विचार और आचार को नियंत्रित करके इन्हें बुराई से दूर रखता है- कुरल भाग 17

प्रसंग- सी राजगोपालाचारी द्वारा तमिल से भावार्थ किए गए कुरल की श्रृंखला में पढ़ें सच्चा ज्ञान और सुनने से प्राप्त की गई शिक्षा के विषय में। 

सच्चा ज्ञान

1. सच्चा ज्ञान आपका भीतरी गढ़ है जिसे शत्रु ध्वस्त नहीं कर सकते, यह अभेद्य सुरक्षा है।

2. सच्चा ज्ञान विचार और आचार को नियंत्रित करके इन्हें बुराई से दूर रखता है और आपको सही पथ पर चलाता है।

3. सच्चा ज्ञान हमें सीखी हुई बातों का महत्त्व समझाता है ताकि हम किसी भी परिस्थिति में विचलित न हों।

4. यह हमारे विचारों को सरल और बेहतर तरीकों से व्यक्त करने में सहायता करता है। साथ ही दूसरों की गूढ़ बातों को भी हमारी समझ के लिए सहज बनाता है।

5. संसार में ज्ञान ही सच्चा मित्र है। यह हमें उत्साह और अवसाद में समान व्यवहार करने का बल देता है।

6. सच्चे ज्ञान वाला व्यक्ति समझता है कि यह संसार कैसे चलता है और उस अनुसार ढल जाता है।

7. अज्ञानी व्यक्ति की तरह नहीं, सच्चे ज्ञान वाले व्यक्ति जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है। इसलिए वे खुद को शोक से बचा पाते हैं।

8. ज्ञानी व्यक्ति उससे डरता है जिससे सच में भयभीत हुआ जाना चाहिए। डरने वाली वस्तुओं से न डरना मूर्खता होती है।

9. अच्छे-बुरे में अंतर समझने वाले मस्तिष्क का स्वामी होना ही एक उपलब्धि है। इसके बिना आपकी सारी उपलब्धियों का कोई औचित्य नहीं है।

श्रवण से ज्ञान

हमारे प्राचीन तंत्र में अध्ययन से प्राप्त की गई विद्या के अलावा विद्वानों की सीखों और प्रतिपादन को सुनने से प्राप्त की गई विद्या का भी महत्त्वपूर्ण स्थान था। इसे तमिल में केल्वी  कहा जाता है।

10. ज्ञान को लिए श्रवण अशिक्षितों के लिए नियत किया गया है। यह दिव्यांग के लिए बैसाखी के सहारे की तरह है।

11. शिक्षक को न सिर्फ ज्ञानी होना चाहिए, अपित सदाचारी भी होना चाहिए। यहाँ तक कि सदाचार ज्ञान से अधिक आवश्यक है। सदाचारी शिक्षक का मौखिक ज्ञान कमज़ोर के लिए सहारा बनता है।

12. केवल सीखना ही ज्ञान नहीं है। ज्ञानी व्यक्ति वह है जिसके पास शिक्षा है और वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जाता है।

शायद कवि उनकी निराशा समझते हैं जो सुनकर शिक्षा प्राप्त करते हैं और मानों उन्हें आश्वासन देने के लिए कहते हैं-

13. भले ही यह कम हो लेकिन सुनें और आत्मसात करें। इससे बड़ा लाभ होगा।

14. पूछ-पूछकर और शिक्षित व्यक्तियों को सुनकर प्राप्त की गई शिक्षा विषम परिस्थितियों में भी व्यक्ति को मूर्खतापूर्ण कथनों से बचाएगी।

15. शिक्षित व्यक्तियों के प्रतिपादन को सुनने से वचन में नम्रता आती है जो कि ज्ञानियों के व्यवहार से जुड़ा हुआ गुण है। केवल अध्ययन से अभिमान आ सकता है।

अगले अंक में जारी…

पिछला भाग- दुर्भाग्य बाढ़ की तरह आ सकता है लेकिन मस्तिष्क के विचार से नष्ट भी हो सकता है- कुरल