भारती
सेना का युवाओं के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ प्रस्ताव क्यों जल्द से जल्द लागू होना चाहिए

भारतीय सेना युवाओं को फौज में तीन वर्षों की सेवा का अवसर देने के लिए टूर ऑफ ड्यूटी (टीओडी) एक प्रस्ताव लेकर आई है। यह प्रस्ताव नवाचार युक्त है और यह सिर्फ किसी व्यक्ति के लिए नहीं अपितु सेना और समाज के लिए भी लाभदायक है।

“युवा की दृषि में सेना बहुत उच्च पद पर आसीन होती है लेकिन बहुत इसे अपना पूरा जीवन नहीं देना चाहते। ऐसे में सेना में लघु कार्यकाल के लिए काम करके वे रोमांच, साहस और वर्दी के गर्व का अनुभव करके प्रसन्न हो सकेंगे।”, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के एनसीसी निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।

अधिकारी का कहना है कि सेना में काम करके व्यवसायिक प्रशिक्षण, अनुशासन, दायित्व और कर्तव्य बोध, नीतिगत दृष्टि से सोचने की क्षमता, समूह भावना, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्य निष्ठा एवं देशप्रेम व त्याग की भावना विकसित होगी जो व्यक्ति को सेना की टूर ऑप ड्यूटी की समाप्ति पर सरकारी या कॉर्पोरेट क्षेत्र की नौकरियों के लिए प्रबल दावेदार बनाएँगी।

इस पाइलट परियोजना में 100 युवाओं को अधिकारी और 1,000 को जवान के पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव सेना ने दिया है। इस प्रयास से देश के सैन्यबल के बढ़ते हुए वेतन और पेंशन का बोझ कम हो सकेगा और रक्षा व्यय में भी बचत की जा सकेगी।

टीओडी अधिकारियों और जवानों के चयन के वर्तमान योग्यताओं और मान्यताओं का ही पालन किया जाएगा। वे एक वर्ष के प्रशिक्षण से भी गुजरेंगे। तीन वर्षों की अवधि के समाप्त होने पर उन्हें एक आकर्षक पैकेज राशि दी जाएगी परंतु वे किसी पेंशन के अधिकारी नहीं होंगे। साथ ही टीओडी अधिकारी या जवान का पारिश्रमिक निजी या सरकारी नौकरी के पारिश्रमिक से अधिक होगा।

सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, जो प्रस्ताव बनाने में सहायक रहे थे, ने बताया कि एक स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त व्यक्ति शुरुआती स्तर पर 30-40,000 रुपये मासिक कमाता है जबकि टीओडी अधिकारी को 80-90,000 मासिक मिलेंगे।

सेना ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने पर टीओडी अधिकारी को 5-6 लाख रुपये और टीओडी जवान को 2-3 लाख रुपये मिलेंगे। साथ ही प्रस्ताव है कि टीओडी अधिकारियों और जवानों की आय कर-मुक्त होगी।

“एक युवक टीओडी अधिकारी या जवान के पद से 26 या उससे कम की आयु में भी सेवानिवृत्त हो जाएगा और सरकारी या कॉर्पोरेट नौकरी के लिए एक आकर्षक अभ्यर्थी होगा। ऐसे व्यक्ति को अन्य अभ्यर्थियों से अधिक महत्त्व दिया जाएगा।”, अधिकारी ने कहा।

“हमने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ऐसे युवक-युवतियों को सरकारी या पीएसयू की नौकरियों में सरकार प्राथमिकता दे और यदि वे सेना की सेवा अवधि समाप्त होने के बाद उच्चतर शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें आरक्षण मिले।”, अधिकारी ने बताया।

100 अधिकारियों और 1,000 जवानों की शुरुआती नियुक्ति एक पाइलट परियोजना होगी। लेकिन सेना को लघु सेवा आयोग (10 वर्षों की एसएससी) या स्थाई आयोग (पीसी) का विकल्प भी असाधारण टीओडी अधिकारियों के लिए खुला रखना चाहिए। साथ ही तीन वर्षों की अवधि की समाप्ति पर टीओडी के अधिकारी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त होने चाहिए।

इसके अलावा यदि कोई टीओडी अधिकारी या जवान सेवा के दौरान वीरगति को प्राप्त हो जाए तो उसक परिवार को वही लाभ मिलने चाहिए जो एसएससी या पीसी कर्मियों को मिलते हैं जैसे सेना मेडिकल व सीएसडी सुविधाएँ।

सेना के प्रस्ताव में कहा गया है कि टीओडी योजना के कई युवा इच्छुक होंगे क्योंकि देश में बेरोजगारी उच्च स्तर पर है और हाल ही में देश के युवाओं में “देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति के भाव” का भाव का पुनः संचार हुआ है।

सेना के लिए कई लाभ हैं। सेना में 50,000 अधिकारी पद तय हैं लेकिन कनिष्ठ अधिकारी पदों में 7,500 रिक्तियाँ हैं। इस कमी को टीओडी अधिकारी पूरा कर सकेंगे।

सेना मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एक एसएससी अधिकारी पर सेना प्रशिक्षण, वेतन, भत्ते, लाभ, उपदान, सेवा समाप्ति का पैकेज, अवकाश नकदीकरण और अन्य लागतों को मिलाकर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च करती है।

यह लागत कई गुना तब बढ़ जाती है जब एसएससी अधिकारी की स्थाई नियुक्ति हो जाती है और वह 54 वर्ष की आयु (कर्नल पद की सेवानिवृत्ति आयु) तक सेना को अपनी सेवा देता रहता है।

हालाँकि सेना ने गणना की है कि एक टीओडी अधिकारी पर इसे 83 लाख रुपये खर्च करने होंगे लेकिन सेना के वेतन और पेंशन पर खर्च हाल के वर्षों में कई गुना बढ़ गया है और इसके बजट आवंटन 60 प्रतिशत इसी पर व्यय होता है।

भले ही 2014 में आवंटित रक्षा बजट 2.33 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2020 में भले ही 3.37 लाख करोड़ रुपये हो गया हो लेकिन इसी अवधि में रक्षा पेंशन में 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

सेना ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) से भी सात वर्षों के लिए अधिकारियों को सेना में सम्मिलित करने का प्रस्ताव दिया है। ये सैन्य अधिकारी अपने पुरान बल में लौट सकते हैं और ये सैन्य बल सात वर्षों की सैन्य सेवा में रहे अधिकारियों के प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे अधिकारियों को उनकी पेंशन केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिलेगी न कि रक्षा मंत्रालय से।

सीएपीएफ के विभिन्न पद

चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने जवानों की सेवानिवृत्ति आयु को 38 वर्ष से बढ़ाकर 58 वर्ष करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसे कार्यबल का पूर्ण सुनिश्चित हो सकेगा और साथ ही सेना का वेतन भार भी कम होगा।

जनरल बिपिन रावत

इससे भी अधिक जब टीओडी प्रस्ताव को बड़े स्तर पर अपनाया जाएगा तो यह सुनिश्चित करेगा कि आपातकाल के समय देश के पास एक आरक्षित तैयार बल रहे। अनुशासित, प्रतिबद्ध, पेशेवर, देशप्रेमी और परिश्रमी युवकों की एक बड़ी संख्या (पूर्व टीओडी अधिकारी व जवान) होना देश के लिए कितना लाभदायक है इसे अधिक व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि कुख्यात असैनिक नौकरशाह सेना के इन प्रस्तावों को टाले नहीं और न ही इनमें खोट निकालें। ध्यान रखना होगा कि “सेना के प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय की अस्वीकृति” का यह एक और मामला बनकर न रह जाए।

नौकरशाही भूलभूलैया से इस प्रस्ताव को जल्द बाहर निकालने के बाद सिंह को इसे केंद्रीय कैबिनेट से भी पास करवाना होगा जिससे शीघ्र अति शीघ्र इस प्रस्ताव को लागू किया जा सके। सेना के प्रति उनका इतना कर्तव्य तो बनता ही है।

जयदीप मज़ूमदार स्वराज्य में सहायक संपादक हैं। वे @joyincal09के माध्यम से ट्वीट करते हैं।