भारती
सूरत ने कचरे का ढेर हटाकर, तो मैसुरु ने जागरूकता से पाए कचरा मुक्त होने में 5-स्टार

प्रसंग- सूरत और मैसुरु की कचरा मुक्त शहर में 5-सितारा प्राप्त करने की यात्रा।

मंगलवार (19 मई) को केंद्रीय शहरी मामले एवं आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) के अंतर्गत कूड़ा प्रबंधन के लिए शहरों की स्टार रेटिंग की घोषणा की। इस रेटिंग में छह शहरों को 5-सितारा, 65 शहरों को 3-सितारा और 70 शहरों को 1-सितारा रेटिंग मिली जबकि 7-सितारा रेटिंग पाने में कोई भी शहर सफल न हो सका।

इस रेटिंग को तय करने में द्वार से कूड़ा एकत्रीकरण, वॉर्ड स्तर व शहर स्तर पर कूड़ा पृथक्करण, सार्वजनिक, व्यवसायिक एवं आवासीय क्षेत्रों में झाड़ू लगाया जाना, कचरा पात्र, उपभोक्ता शुल्क, गंदगी फैलाने पर चालान, एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रतिबंध को लागू करना, वैज्ञानिक कूड़ा प्रसंस्करण, नागरिक समस्या निवारण, कचरे के बेतरतीब ढेरों को हटाना तथा कूड़ा निपटान में सुधार, वर्षा नालों, जल निकायों की सतह व नालों की सफाई, शहर का सौंदर्यीकरण और गीले कचरे के स्थल पर प्रसंस्करण को आँका जाता है।

कचरा मुक्त शहर में 5-सितारा प्राप्त करने वाले छह शहर हैं- इंदौर, राजकोट, सूरत, मैसुरु, नवी मुंबई और अंबिकापुर। हमने इन सभी छह शहरों के नगर निगम अधिकारियों से इस सफलता यात्रा के विषय में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया और प्रस्तुत है दो शहरों की विस्तृत रिपोर्ट-

सूरत- स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष 20 में बने रहने वाले सूरत को 5-सितारा रेटिंग मिलने का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है खजोद में स्थित कचरे के पहाड़ का हटाया जाना। बायोमाइनिंग तकनीक से कूड़ा निपटान स्थल खजोद से 10 मीटर ऊँचा कचरे का पहाड़ हटाया गया। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से पहले 37 टन पुराने कूड़े का निस्तारण किया गया और फिर 25 टन कूड़े को हटाने का भी कार्य जारी है।

दैनिक भास्कर  ने सूरत महानगर पालिका के आयुक्त बंछानिधि पाणी के उद्धरण से बताया कि खजोद में जो डंपिंग मैदान खाली हुआ, वहाँ उद्यान बनाया जाएगा। वहाँ पर साइकल ट्रैक, पैदल चलने के लिए सड़क और अन्य सुविधाएँ भी होंगी।

सूरत के खारवरनगर में पे एंड यूज़ शौचालय का निरीक्षण करते महानगर पालिका के अधिकारी

अब प्रतिदिन नेशन ग्रीन ट्रिब्युनल के दिशानिर्देश के अनुसार 1500-1700 टन कूड़े का निस्तारण किया जाता है। लैंडफिल कोशिकाओं में केवल निष्क्रिय कूड़े का ही निपटान किया जाता है। साथ ही कूड़ा प्रबंधन के लिए सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। होटलों, उद्योगों आदि सार्वजनिक उपक्रमों के लिए स्थल पर ही कूड़ा प्रसंस्करण अनिवार्य कर दिया गया है।

कचरा मुक्त शहर का दर्जा पाने के लिए जो स्थल पर ही गीले कचरे के प्रसंस्करण की योग्यता है, उसे पूरा करने के लिए 22,000 गृह कम्पोस्टिंग इकाइयाँ शुरू की गईं। प्लास्टिक कूड़े के प्रबंधन के लिए भटार में एक पृथक इकाई है। यहाँ पर ही बायोमेडिकल कूड़े के निस्तारण के लिए भी एक अलग इकाई है। 2022 तक कूड़े से ऊर्जा प्राप्त करने की भी योजना है।

सूरत महानगर पालिका के कर्मचारी जेएन नाइक ने स्वराज्य  को बताया कि निर्माण कार्यों से उपजे कूड़े के लिए कोसाद में अलग प्रबंधन इकाई है। सब्ज़ी बाज़ारों, मांस बाज़ारों व एपीएमसी पर गीला कचरा अधिक उत्पन्न होता है इसलिए ऐसी मंडियों पर विकेंद्रीकृत जैविक कूड़ा संयंत्र स्थापित किया गया।

नाइक का दावा है कि संयंत्रों में 100 प्रतिशत कूड़ा प्रसंस्करण हो रहा है और कूड़ा पृथक्करण भी 100 प्रतिशत हो रहा है। कोविड-19 के कारण घरेलू खतरनाक कूड़े को भी अलग से एकत्रित किया जा रहा है और उनका उपचार भी अलग ही हो रहा है। सभी हस्तांतरण स्थलों (ट्रांसफर स्टेशन) पर पदार्थ पुनः प्राप्ति (मटीरियल रिकवरी) की सुविधा उपलब्ध है।

मैसुरु- स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष 10 में रहने वाले मैसुरु को कचरा मुक्त शहर के रूप में 5-सितारा रेटिंग मिलने का श्रेय मैसुरु नगर निगम के आयुक्त गुरुदत्ता हेगड़े ने नागरिकों, कर्मचारियों, गैर-सरकारी संगठनों व महापौर के सम्मिलित प्रयास को दिया।

स्वराज्य  से दूरभाष पर वार्ता में उन्होंने बताया कि अन्य शहरों की तुलना में मैसुरु के लोग अधिक जागरूक हैं। मैसुरु के 30 वार्डों में 100 प्रतिशत कूड़ा पृथक्करण किया जाता है, हेगड़े ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनवरी के माह में कर्मचारी अतिरिक्त समय के लिए भी काम कर रहे थे।

कई जागरूकता अभियान चलाए गए जिसमें मैसुरु के राजपरिवार समेत कई ब्रांड प्रचारकों ने नागरिकों को स्वच्छता का महत्त्व बताया। कूड़े प्रबंधन में विकेंद्रीकरण की भूमिका रही जिसमें तीन-चार वार्डों का कूड़ा एक जगह एकत्रित करके शून्य कूड़ा संयंत्र पर ले जाया जाता है यानी वहाँ 100 प्रतिशक पृथक्करण किया जाता है। ये संयंत्र आर्थिक दृष्टि से भी व्यवहार हैं, हेगड़े ने बताया।

उनके अनुसार उनका मॉडल माना हुआ और परीक्षित है लेकिन फिर भी नगर निगम कई सुधारों पर भी कार्य कर रहा है जैसे वर्तमान में वर्षा जल नाले को वर्ष में एक बार साफ किया जाता था लेकिन अब से यह सफाई साल में तीन बार होगी। सार्वजनिक स्थलों को विशेष महत्त्व दिया जाता है जैसे सार्वजनिक शौचालयों और उद्यानों को स्वच्छ रखा जाता है।

मैसुरु के सार्वजनिक शौचालय में सैनिटाइज़ेशन

आधा कचरा लैंडफिल स्थल के निकट ही प्रसंस्कृत किया जाता है और उसके पश्चात ही इसका निपटान होता है। अब वे एक प्रस्ताव लेकर आ रहे हैं जिससे केवल कचरे के जैविक अवशेषों का ही मात्र प्रकृति में निपटान किया जाए। इसके अलावा हेगड़े ने बताया है कि वे दो और स्थानों पर कम्पोस्ट संयंत्र बना रहे हैं जो अगले 10-15 वर्षों की आवश्यकता को पूरा करेगा।

वहीं गीले कचरे के लिए विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग को भी बल दिया जा रहा है। 10,000 घरों में ही कम्पोस्टिंग की व्यवस्था की गई है। निवासियों में खाद बनाने के लिए पाउडर का भी वितरण किया गया है।

सार्वजनिक स्थलों को गंदा करनेऔर खुले में शौच करने पर नागरिकों से जुर्माना वसूला जाता है। कोरोनावायरस महामारी के समय मास्क न पहनने और थूकने वालों पर भी जुर्माना लगाया जा रहा है। खुदरा दुकानों से संधि करके प्लास्टिक के उपयोग को भी न्यूनतम किया जा रहा है, हेगड़े ने बताया।

अन्य शहरों को कचरा मुक्त बनने की राह बताते हुए हेगड़े ने कहा, “दीर्घावधि और वैज्ञानिक योजना होनी चाहिए। कूड़ा प्रबंधन एक जटिल प्रक्रिया है। प्रयास किया जाना चाहिए कि एक प्रक्रिया पर अत्यधिक भार न आए।” उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जितना कम कचरा उत्पन्न होगा, उतना उसका प्रबंधन आसान होगा।

विकेंद्रीकरण का महत्त्व बताते हुए उन्होंने कहा कि दूर तक कूड़े का परिवहन न करना पड़े, वह बेहतर होगा। उन्होंने माना कि भविष्य में कूड़ा प्रबंधन एक बड़ी समस्या होगी और पहले तैयारी नहीं की गई तो उससे निपटना काफी कठिन हो जाएगा। सरकार अकेले काम नहीं कर सकती, विशेषज्ञों, अनुभवियों, ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिकों आदि को कूड़ा प्रबंधन से जोड़ना उन्होंने आवश्यक बताया।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।