भारती
गुप्तचर और अच्छे मंत्री के गुण व कौशल बताते तमिल कवि तिरुवल्लुवर के कुरल भाग- 30

प्रसंग- अच्छे मंत्री और गुप्तचर के विषय में 12 जुलाई 1969 के स्वराज्य अंक में प्रकाशित तिरुवल्लुवर के चयनित कुरलों का हिंदी अनुवाद।

अच्छे मंत्री

1. एक अच्छे मंत्री के हृदय में लोगों का कल्याण और कृत्यों में दृढ़ता होनी चाहिए। उसे ज्ञानी और सदैव सक्रिय होना चाहिए।

2. उसके पास शत्रुओं को विभाजित, सहयोगियों को एकत्रित और खोई हुई मित्रताओं को पुनः स्थापित करने का कौशल होना चाहिए।

3. अगर मंत्री के पास स्वाभाविक बुद्धि और शासन संबंधी बातों की समझ हो तो कोई भी परिस्थिति ऐसी नहीं होती जिसे वह सुलझा न पाए।

4. पढ़ी और लिखी जाने वाली बातों के ज्ञान के अलावा मंत्री को दुनिया की समसामयिक गतिविधियों की भी समझ होनी चाहिए और वह उचित कदम उठाने के योग्य होना चाहिए।

5. हो सकता है कि राजा नासमझ हो और दूसरों की ज्ञानवर्धक बातें सुनना भी न चाहे लेकिन एक मंत्री का कर्तव्य है कि वह सच्ची और सही बात कहे।

गुप्तचर

प्राचीन समय में गुप्त विभाग को सार्वजनिक सेवा का एक प्रमुख विभाग माना जाता था। गुप्तचरों का काम सिर्फ शत्रु की गतिविधियों की सूचना देना नहीं होता था बल्कि आंतरिक मामलों में भी सहायता करना होता था।

6. शास्त्र और गुप्तचर, ये किसी राजा की दो आँखों की तरह होते हैं।

7. राजा का कर्तव्य है कि वह जाने की हर समय हर व्यक्ति के साथ क्या हो रहा है।

8. गुप्तचरों को सभी कार्यकारी अधिकारियों और राजा के संबंधियों पर नज़र रखनी चाहिए, उन संबंधियों पर भी जो राजा के प्रति अच्छे भाव नहीं रखते हैं।

9. इस सेवा में वही लोग आ सकते हैं जिनमें बिना संदेह के कोई भी वेश धर लेना का कौशल हो। उसमें रहस्यों को छुपाए रखने का भी सामर्थ्य होना चाहिए।

10. किसी भी राज्य में प्रवेश पाने के लिए संन्यासी या धार्मिक व्यक्ति का वेश धरना सबसे उचित रहता था।

11. गुप्तचरों की संख्या व गुणवत्ता, दोनों का ही द्यान रखा जाना चाहिए। किसी गुप्तचर की सूचना पर आँख मूंदकर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए बल्कि उस बात की पुष्टि अन्य सूत्रों से भी करनी चाहिए।

12. गुप्तचर सेवा के सदस्यों की जान-पहचान एक-दूसरे से नहीं होनी चाहिए ताकि अलग-अलग स्रोतों से सूचनाएँ मिलें।

यह बात गौर करने योग्य है क्योंकि संभवतः आज की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसा नहीं होता है।

13. गुप्तचरों की प्रशंसा सार्वजनिक रूप से नहीं की जानी चाहिए क्योंकि ऐसा करके आप वह भेद खोल देंगे जो लोगों से छुपाया जाना है।

अगले अंक में जारी…

पिछला भाग- अन्यायी राजा के शासन में धनवान होना, निर्धन होने से बड़ा दुर्भाग्य है- कुरल भाग 29