भारती
तिरुवल्लुवर बताते हैं कार्यकारी का चयन करने में क्या योग्यताएँ देखें- कुरल भाग 27

प्रसंग- तमिल कवि तिरुवल्लुवर द्वारा तिरुकुरल में ‘कार्यकारी के चयन’ विषय पर लिखे गए कुरलों का जो भावार्थ सी राजगोपालाचारी ने 21 जून 1969 के स्वराज्य पत्रिका अंक में प्रकाशित किया था, उसका हिंदी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत है।

1. किसी व्यक्ति पर विश्वास करने से पहले उसकी वफादारी को जीवन, धर्म, धन और सुखों से उसके लगाव के समक्ष तौलें।

अर्थात् देखें कि क्या उसकी कार्य-निष्ठा इन लगावों के कारण खंडित होती है क्योंकि यही किसी व्यक्ति के कृत्यों को संचालित करते हैं।

2. अच्छे परिवार में जन्म, विकृतियों से मुक्ति, जनता की और बौद्धिक और नैतिक संवेदनशीलता- ये गुण उच्च पद संभाने के लिए आवश्यक हैं।

3. किसी व्यक्ति का परीक्षण कर देखें कि उसके सद्गुण अधिक हैं या दुर्गुण और उसके बाद निर्णय लें।

4. योग्य और अयोग्य में अंतर करने का यदि एक कोई कारक है तो वह है आचरण।

5. उस व्यक्ति को न चुनें जिसके संबंधी नहीं हैं। संबंधी न होने से उसे सामाजिक निंदा का भय नहीं रहेगा।

6. अन्य योग्यताओं का ध्यान रखे बिना प्रेम के आधार पर किसी को चुनना आपदा लेकर आता है।

7. परीक्षण के बाद ही व्यक्ति को नियुक्त करें लेकिन नियुक्ति के बाद उनकी सेवाओं पर भरोसा रखें। ध्यान से व्यक्ति को न चुनना गलत है और उतना ही गलते चुने हुए व्यक्ति पर विश्वास न करना है।

8. राष्ट्र के लिए काम करने वाले लोगों को वफादार होना, अच्छे-बुरे में अंतर समझना, स्पष्ट मस्तिष्क और लालच से मुक्त होना आवश्यक है।

यदि इनमें से एक गुण भी नहीं हुआ तो इस नियुक्ति पर पछताना पड़ेगा।

9. किसी व्यक्ति को वही कार्य सौंपा जाना चाहिए जो करने में वह योग्य हो और संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए उसके पास संसाधन हों। केवल मित्रता और प्रशंसावश किसी को नियुक्त करना गलत है।

10. किसी व्यक्ति को नियुक्त करने के बाद उसे पूर्ण दायित्व दें। पूरा विश्वास किए बिना हम उस व्यक्ति का पूरा लाभ नहीं उठा सकते हैं।

11. जो अपने परिश्रमी और कुशल व्यक्ति पर विश्वास और उससे प्यार नहीं करता, उसे सौभाग्य जल्द ही छोड़ देता है।

12. यदि राजा सदाचारी होगा तो लोग गलत मार्ग पर नहीं जाएँगे।

अगले अंक में जारी…

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