भारती
सफाई कर्मचारी भी कोविड-19 योद्धा, उचित व्यवस्था से सुनिश्चित हो उनकी कुशलता

कोरोनावायरस के फैलते संक्रमण की चपेट में कई सफाई कर्मचारी भी आए हैं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के अधीन कार्यरत जो दो सफाईकर्मी कोविड-19 रोगी के संपर्क में आए थे उनमें से एक का निधन मंगलवार (21 अप्रैल) को हो गया वहीं दूसरा लोक नायक अस्पताल में भर्ती है।

इस घटना के बाद दिल्ली सफाई कर्मचारी संघ के प्रमुख संजय गहलोत ने कहा, “हमें कम गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं और धमकाया जा रहा है कि यदि हम काम नहीं करेंगे तो नौकरी से निकाल दिए जाएँगे। हम अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं लेकिन हमारा ध्यान नहीं रखा जा रहा। हमें प्रतिदिन नई किट दी जानी चाहिए। सुरक्षा उपकरणों का पुनः उपयोग कैसे करें।”

वहीं ईडीएमसी के अधिकारियों ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस  से बातचीत में इस बात की विस्तृत जानकारी नहीं दी कि उनकी ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले सोमवार को ईडीएमसी के लिए ही कार्य करने वाली 35 वर्षीय महिला सफाई कर्मचारी कोरोनावायरस से सकारात्मक पाई गई थी। उनके परिवार ने भी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की कमी को ही इसका दोषी बताया।

“कर्मचारियों को ग्लव्स और मास्क नहीं दिए गए हैं इसलिए उन्हें खतरा अधिक है। मेरी पत्नी की जाँच हमने बुखार की शिकायत के बाद ही करवा ली थी इसलिए उसकी बीमारी का शीघ्र पता चल गया लेकिन अस्पताल में उसे उचित सुविधाएँ नहीं मिल रहीं।”, संक्रमित महिला सफाई कर्मचारी के पति ने दावा किया।

इस घटना पर अनाम रहने की शर्त पर एक ईडीएमसी अधिकारी ने बताया कि उन्हें पूरे सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे क्योंकि वे क्वारन्टाइन क्षेत्रों के निकट काम नहीं कर रहीं थीं। वहीं अस्पताल द्वारा सुविधा न पहुँचाने वाली बात पर लोक नायक अस्पताल की तथ्य जाँच कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि ये दावे “तथ्य आधारित नहीं हैं” व “भावनात्मक तनाव” के कारण ऐसा कहा गया है।

लोक नायक अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक डॉ जेसी पासी

सफाई कर्मचारियों के संक्रमित होने की घटनाओं से आहत सफाईकर्मी संघों ने दावा किया कि उन्हें केंद्र सरकार की 50 लाख रुपये की बीमा योजना में सम्मिलित नहीं किया गया है। दरअसल केंद्र की योजना में सफाई कर्मचारियों को सम्मिलित तो किया गया है लेकिन यह सिर्फ उन तक सीमित है जो कोविड-19 रोगियों के संपर्क में आते हैं जबकि उपरोक्त मामले में ऐसा नहीं हुआ।

इस घटना के बाद उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के नगर निगम (एसडीएमसी) नेताओं ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव को पत्र लिख नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को भी बीमा योजना में सम्मलित करने की माँग की। एसडीएमसी के पूर्व मेयर नरेंद्र चावला ने कहा, “हमारे कर्मचारी प्रतिदिन अपने प्राण जोखिम में डाल रहे हैं। वे कम से कम उचित बीमा कवर के अधिकारी तो हैं ही।”

कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई में अग्रणी मोर्चा संभाले हुए सफाई कर्मचारियों के खतरे को समझते हुए केंद्र सरकार ने सफाईकर्मियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों को परामर्श जारी किया है। लॉकडाउन अवधि के दौरान सफाई कर्मचारियों के लिए कार्य नियम और मानक कार्यविधि जारी करने को कहा गया है।

सोमवार को जारी इस परामर्श में कोविड-19 के प्रति सफाईकर्मियों का अनिवार्य उन्मुखीकरण और उनके लिए विशेष पास/पहचान-पत्र/अनुमति-पत्र जारी करने, जो लॉकडाउन के दौरान उनके कार्य में खलल न डाले, की बात कही गई। साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, सैनिटाइज़र और डिसिन्फेक्टेन्ट की व्यवस्था को कहा।

“नगर निगमों और अन्य स्थानीय निकायों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की भूमिका कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में अहम है। वे इस लड़ाई की अग्रिम पंक्ति में हैं इसलिए उनकी कुशलता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।”, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग द्वारा जारी परामर्श में कहा गया।

इस परामर्श के तहत हर राज्य को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना है जो विभागीय और शहरी निकाय स्तर पर सफाई कर्मचारियों के लिए जारी मानक कार्यविधि का नेतृत्व और उसके लागू होने का निरीक्षण करेगा।

मानक कार्यविधि के लिए केंद्र ने कुछ सुझाव भी दिए हैं जैसे श्रेष्ठ प्रथाओं का पालन। इसके लिए सफाई कर्मचारी प्रतिदिन काम शुरू करने से पहले एक निर्धारित स्थान पर वस्त्र बदलें। उन्हें मास्क, ग्लव्स, फूटवियर और उचित वस्त्र जैसे पूरी बाजुओं वाली शर्ट, लंबे पजामे और ऐप्रन पहनना चाहिए।

किसी भी कूड़े को खाली हाथों से न छुआ जाए। कूड़ा एकत्रित करने के पहले और बाद में व हर बार ग्लव्स उतारने पर साबुन से हाथ धोए जाएँ। यदि मोबाइल का प्रयोग करना हो तो स्पीकर पर रखा जाए। एक-दूसरे और सामान्य जन से कर्मचारी 1 मीटर की दूरी बनाए रखें व छोटे समूह में ही काम करें।

सफाई के बाद कर्मचारी अपने औजारों और पीपीई को पानी व डिसिन्फेक्टेन्ट से धोएँ व उन्हें धूप में सुखाएँ। पुनः निर्धारित स्थान पर नहाकर, अपने कार्यवस्त्रों को धोकर दूसरे वस्त्र पहनकर ही घर जाएँ।

बायोमेडिकल कूड़े के लिए पहले ही दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं लेकिन पिछली रिपोर्ट में भी लेखिका ने यह मुद्दा उठाया था कि इसमें नगर निगमों के लिए विशिष्ट निर्देश नहीं हैं और उपरोक्त परेशानियाँ उसी का फल हैं।

सीपीसीबी दिशानिर्देशों का प्रारंभिक अंश

हाल ही में 19 अप्रैल को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इन दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार कर एक बात जोड़ी है जो कूड़ा उपचार सुविधाओं, स्वास्थ्य केंद्रों, क्वारन्टाइन घरों व अन्य घरों से मास्क एव ग्लव्स जैसे कूड़े के प्रबंधन के लिए विशेष आवश्यकताओं और व्यक्ति विशेषों के दायित्व को स्पष्ट करती है।

इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने देश की बायोमेडिकल कूड़ा प्रबंधन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है। संस्था का कहना है कि देश के 2.7 लाख स्वास्थ्य केंद्रों में से मात्र 1.1 लाख केंद्र ही बायोमेडिकल कूड़ा प्रबंधन नियमों के अनुसार अधिकृत हैं। संसदीय रिपोर्ट के अनुसार भी 750 जिलों के अनुसार क्रियाशील 200 सामान्य बायोमेडिकल कूड़ा उपचार सुविधाएँ कम हैं।

क्षमता बढ़ाने के लिए संबंधित संस्थान और विभाग को अपनी ओर से काम करना ही होगा लेकिन तत्काल आवश्यकता है सफाई कर्मचारियों का ध्यान रखने की। अपेक्षा है कि केंद्र के परामर्श के अनुसार राज्य शीघ्र ही मानक कार्यविधि तैयार कर उनका पालन शुरू कर देंगे।

देश के विभिन्न भागों में नागरिकों ने सफाई कर्मचारियों के प्रति विभिन्न तरीकों से आभार व आदर व्यक्त किया है लेकिन इस भावनात्मक समर्थन के अलावा कर्मचारियों को नियमों व विधान के समर्थन की भी आवश्यकता है। ऐसा समर्थन ही संकट की घड़ी में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को ढाढ़स बंधाकर प्रोत्साहित कर सकता है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।