भारती
विश्लेषण- भारत और पाकिस्तान के बीच हुई ताजा हिंसा से क्या झलकता है

पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर की गई बमबारी के बाद यह अंदेशा था कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ जो परोक्ष युद्ध चला रहा था, उसको लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करेगा। पाक फौज नए सिरे से गुणा-भाग करेगी कि भारत के विरूद्ध आतंकवाद का इस्तेमाल कितनी तीव्रता और किस प्रकार से करते रहना है। पाक फौज को भारत की जवाबी कार्रवाई में मारे जा रहे आतंकियों फिक्र कम और पाक जनता के समक्ष अपनी छवि की फिक्र ज्यादा है।

जब भारतीय थल सेना ने उड़ी आतंकी हमले के बाद जमीनी रास्ते से नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी तो घरेलू मोर्चे पर पाक फौज को उसे नकारने में ज्यादा मुश्किल नहीं हुई थी। पर बालाकोट में भारतीय वायु सेना के द्वारा की गई कार्रवाई को नकारने में पाकिस्तान को कहीं अधिक जुगत लगाने पड़े और कम से कम इतना तो मानना ही पड़ा कि भारतीय लड़ाकू विमान नियंत्रण रेखा पार कर बम गिराकर सकुशल वापस जाने में सफल रहे।

भारतीय विमानों के पाकिस्तान की हवाई सीमा में यूँ आकर चले जाने पर पाकिस्तान में बहुत से सवाल भी उठे थे। हालाँकि अगले दिन विंग कमांडर अभिनंदन के विमान के पाक वायु सेना से मुठभेड़ के दौरान गिर जाने के चलते पाकिस्तान के वायु रक्षा तंत्र की नाकामी की बात दब कर रह गई।

जहाँ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान पाक वायु क्षेत्र में गहरे जाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पार बालाकोट में बमबारी करने में सफल रही, अगले दिन पाक वायु सेना भारतीय क्षेत्र में इस प्रकार गहरे घुसने में विफल रही और उसे एफ 16 भी खोना पड़ा। विंग कमांडर अभिनंदन से पाक वायु सेना की मुठभेड़ हुई वो पाक अधिकृत कश्मीर के आसमान में हुई। अभिनंदन के पाकिस्तान की गिरफ्त में आ जाने के चलते बड़े युद्ध के हालात बन गए जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान को कई देशों की खुशामद करनी पड़ी।

स्पष्ट है कि भारत की जवाबी कार्रवाई का दायरा इस तरह बढ़ रहा है कि पाकिस्तान भी समझ रहा है कि आने वाले समय में उसे नकारना और संभालना मुश्किल हो सकता है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत उसे युद्ध तो दूर भारत से हथियारों की होड़ की इजाजत तक नहीं दे रही है। इस साल पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में कटौती की है। ऐसे में आतंकी हमलों कि सूरत में फिलहाल पाकिस्तान ने अपना पल्ला झाड़ने की दिशा में कुछ प्रयास शुरू किए जान पड़ते हैं।

इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब पिछले महीने पाकिस्तान की ओर से भारत के साथ पुलवामा जैसे आतंकी हमले की चेतावनी साझा की गई। आश्चर्यजनक रूप से यह जानकारी आधिकारिक स्तर पर नहीं साझा की गई बल्कि पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग को एक गुमनाम फोन काॅल के जरिए द्वारा प्राप्त हुई। हालाँकि यह जानकारी सही साबित हुई क्योंकि कुछ ही दिन बाद आतंकियों द्वारा पुलवामा के अरिहाल में सेना के काफिले को वाहन बम (वीबीआईइडी) के जरिए निशाना बनाने की कोशिश की गई जिसमें दो सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए और 17 सैनिक घायल हो गए।

पहले से मौजूद खुफिया एलर्ट के अभाव में अधिक क्षति भी हो सकती थी। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा अजीबोगरीब तरीके से इस हमले की पूर्व जानकारी साझा करने के पीछे की मंंशा समझना आवश्यक हो जाता है। ज़ाहिर है कि आईएसआई की आतंकी संगठनों में इतनी गहरी पैठ बनी हुई है कि उनकी एक-एक योजना की पूरी जानकारी उसके पास रहती है।

इसके बावजूद आईएसआई के आकाओं ने न तो शीर्ष आतंकी नेताओं पर दबाव डालकर इस आतंकी हमले को रोकने की कोशिश की और न ही सीधे भारत को ही इस बारे में बताया। गुमनाम फोन काॅल के जरिए जानकारी साझा करना भारत को अपनी सदाशयता दिखाने का प्रयास तो था ही साथ ही यह संकेत भी था कि पाक फौज आतंकी संगठनों पर कोई सीधा दबाव बनाने का इरादा नहीं रखती है या सीधे तौर पर उनसे टकराव मोल नहीं लेना चाहती है। खासतौर पर तब जब जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन भारत के प्रति बदले की आग में जल रहे हैं।

दूसरे यह कि इस फोन काॅल के जरिए जो खुफिया जानकारी साझा की गई थी वह सच निकली तो ऐसे में आगे से भारत ऐसी फोन काॅल्स को गंभीरता से लेगा जिससे आईएसआई आवश्यकता पड़ने पर किसी मौके पर भारतीय सुरक्षा तंत्र को गुमराह भी कर सकता है।

तीसरा यह कि पाक फौज के द्वारा यह दिखाने की भी कोशिश है कि आतंकी संगठन उसके मोहरे की तरह हैं जिनके जरिए वह एक से अधिक तरीके से खेल कर सकती है। उनका इस्तेमाल वह शांति और युद्ध का संदेश देने के लिए एक साथ भी कर सकती है। मंशा यह है कि भारत के विरुद्ध आतंकी युद्ध फिलहाल के लिए मध्यम तीव्रता के साथ जारी रखा जाए। बस फिलहाल की स्थिति में जहाँ तक हो पुलवामा जैसे बहुत बड़ी आतंकी कार्यवाही को सही समय तक रोककर रखा जाए।

इसलिए ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान हर आतंकी हमले के संबंध में ऐसी सूचना साझा करेगा। घाटी में आतंकी हिंसा का जारी रहना भी यही इंगित करता है। जैसे 12 जून को आतंकियों द्वारा सीआरपीएफ की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए हमले में पाँच जवानों ने वीरगति प्राप्त की थी। अकेले जून के दूसरे हफ्ते में घाटी में आतंकी हिंसा में सुरक्षाबलों के 10 जवानों ने वीरगति प्राप्त की। भारतीय सुरक्षा बलों ने भी जून के दूसरे और तीसरे हफ्ते में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद व अंसार-गजवा-तुल-हिंद के 12 आतंकियों को मार गिराने में सफलता प्राप्त की।

बहरहाल भारत ने भी सिर्फ आतंकी संगठनों पर ही नहीं, पाक फौज पर भी दबाव जारी रखा है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि छंब सेक्टर में नियंत्रण रेखा से कुछ दूर उसके पाँच सैनिक एक धमाके में मारे गए। पाक फौज ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताया है।

ज्ञात हो कि पाक सेना और आतंकियों की बार्डर एक्शन टीम(बैट) अक्सर नियंत्रण रेखा के निकट भारतीय सैनिकों पर घात लगाकर हमला करती रही है। ऐसे में बहुत संभावना है कि शिकार करने आए पाक सैनिक खुद ही शिकार बन गए। इसको 12 जून को सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले, जिसमें पाँच जवानों ने वीरगति प्राप्त की थी, का भी जवाब समझा जा सकता है। अपनी जवाबी कार्रवाई के जरिए भारत पाकिस्तान को बार बार संदेश दे रहा है कि उसके हर पैंतरे का जवाब भारतीय सुरक्षा बल बेहद चपलता से देने में सक्षम हैं।