भारती
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे समेत उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के मायने और विस्तार

प्रसंग- निर्माणाधीन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के अलावा उत्तर प्रदेश में कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ चल रही हैं। जानें उनकी विशेषता और कार्य प्रगति।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के आने के बाद देखा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा। लोकसभा चुनावों के समय स्वराज्य की ग्राउंड रिपोर्टों में पाया गया कि लोगों ने इस परिवर्तन को महसूस किया है। चुनावों के बाद जुलाई में योगी सरकार द्वारा 2019-20 के लिए प्रस्तावित पहले अनुपूरक बजट में भी यह ध्यान बरकरार रहा।

हम देख सकते हैं कि अनुपूरक बजट में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए 850 करोड़ रुपये और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए 1,150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे की महत्वाकांक्षी 36,000 करोड़ रुपये की परियोजना की डीपीआर (विवरणात्मक परियोजना प्रतिवेदन) के लिए भी 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

इससे पहले भी फरवरी में प्रस्तुत बजट में इन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए 3,194 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे जिसमें से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को 1,194 करोड़ रुपये और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे व गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को 1,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। साथ ही बुंदेलखंड डिफेन्स कॉरिडोर (रक्षा गलियारा) को भी 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

क्या हैं ये परियोजनाएँ

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्देश्य है कि प्रदेश के पूर्वी भाग को राजधानी लखनऊ से जोड़ा जाए और पहले से क्रियान्वित लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से ये क्षेत्र देश की राजधानी से भी आसानी से जुड़ सकें। लखनऊ जिले के चांद सराय से शुरू होकर गाज़ीपुर जिले के हैदरिया तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे 353.4 किलोमीटर लंबा होगा।

6-लेन वाला यह एक्सप्रेसवे लखनऊ से शुरू होकर बाराबंकी, फैज़ाबाद, अंबेडकर नगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आज़मगढ़ और माऊ जिलों से गुज़रकर गाज़ीपुर पहुँचेगा। बाद में विस्तार करके इस एक्सप्रेसवे को 8-लेन वाला भी बनाया जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे पर 19 फ्लाइओवर और सड़क के ऊपर से सात पुलों के अलावा 7 बड़े पुल व 123 छोटे पुल होंगे। इसके साथ ही इस मार्ग पर 223 अंडरपास और 491 पुलिया (कल्वर्ट) भी बनाए जाएँगे।

गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का भी निर्माण किया जा रहा है। अंबेडकर नगर और संत कबीर नगर जिलों से गुज़रकर यह एक्सप्रेसवे आज़मगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिलेगा। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर के कुरेभर में एक एयरस्ट्रिप (हवाई पट्टी) भी होगी जिसपर आपातकाल स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को उतारा जा सकेगा।

296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पिछड़े हुए बुंदेलखंड क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के मुख्यपृष्ठ और राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ा जाए। बांदा से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे झाँसी, हमीरपुर, महोबा जलाऊँ और औरैया जिलों से गुज़रते हुए इटावा में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जाकर मिल जाएगा।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे परियोजना महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में रक्षा गलियारा (डिफेन्स कॉरिडोर) विकसित करने पर केंद्र कार्य कर रहा है। छह क्षेत्रों में यह गलियारा विकसित किया जाएगा- लखनऊ, आगरा, झाँसी, अलीगढ़, चित्रकूट और कानपुर। आशा है कि यह परियोजना 20,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित कर पाएगी। झाँसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे 2.5 लाख नौकरियाँ उत्पन्न की जाएँगी।

इसके अलावा 600 किलोमीटर लंबी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना अभी विचाराधीन है। यदि यह परियोजना पूरी हुई तो यह विश्व का सबसे लंबा ऐक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगा। एक्सेस कंट्रोल का अर्थ है कि तेज़ गति के वाहनों के अनुसार परिकल्पित मार्ग जिसमें प्रवेश और निकास नियंत्रित हो। यह एक्सप्रेसवे बुलंदशहर, शाहजहांपुर, बदायूँ, कन्नौज, उन्नाव और प्रतापगढ़ जिलों से गुज़रते हुए प्रयागराज को मेरठ से जोड़ेगा।

कितना हुआ है काम

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को पूरा करने का लक्ष्य अगस्त 2020 रखा गया है। इस परियोजना के लिए 4,332 हेक्टेयर भूमि अर्जन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई और ट्रान्समिशन लाइन व अन्य संरचनाओं का स्थानांतरण भी किया जा चुका है। निर्माण कार्य 10 प्रतिशत पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए 40 प्रतिशत भूमि तैयार की जा चुकी है।

ईपीसी (अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण) मॉडल के तहत बनाए जा रहे इस एक्सप्रेसवे की रूप-रेखा तैयार करने से लेकर निर्माण के बाद सौंपे जाने तक का सारा कार्य ठेकेदार को करना होगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने त्वरित निर्माण हेतु इस परियोजना को आठ पैकेज में विभाजित किया है। गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स और पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को एक्सप्रेसवे के दो-दो पैकेजों का कार्य मिला है, वहीं ऐपको इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और ओरिएंटल स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग एक-एक पैकेज पर काम कर रहे हैं।

दूसरी ओर 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को छह पैकेज में विभाजित किया गया है और सभी पैकेजों के लिए टेंडर आवेदन मंगा लिए गए हैं। 3,642 हेक्टेयर आवश्यक भूमि में से 2,200 हेक्टेयर से अधिक भूमि अर्जित की जा चुकी है। 2021 के अंत तक योगी सरकार 14,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा करना चाहती है।

इसी क्षेत्र से जुड़े हुए बुंदेलखंड डिफेन्स कॉरिडोर के लिए राज्य सरकार ने 5,000 हेक्टेयर की भूमि चिह्नित की है। बजट में आवंटित 500 करोड़ रुपये से भूमि एकत्रित की जाएगी जिसे बाद में निवेश करने वाली निजी कंपनियों को आवंटित किया जाएगा। इस गलियारे के लिए सबसे अधिक भूमि लगभग 3000 हेक्टेयर झाँसी जिले में ली जाएगी और इसके अलावा कानपुर जिले में 1,000 हेक्टेयर, आगरा जिले में 300 हेक्टेयर, अलीगढ़ जिले में 45.84 हेक्टेयर, चित्रकूट जिले में 500 हेक्टेयर व लखनऊ जिले में 200 हेक्टेयर भूमि ली जाएगी। भूमि अधिग्रहण के लिए 3275.34 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

5,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 1,100 हेक्टेयर की भूमि का अधिग्रहण करना होगा। दो पैकेज में बनने वाली इस परियोजना के लिए ऑनलाइन टेंडर मँगाए जा रहे हैं जिनकी अंतिम तिथि 29 अगस्त 2019 की है। इस प्रक्रिया की समाप्ति के बाद ठेका दिया जाएगा और कार्य शुरू होगा।

योगी सरकार ने निर्णय लिया है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए वित्तीय संस्थानों से भी सहायता ली जाए। कुल 23,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना के लिए कॉर्पोरेशन बैंक 1,000 करोड़ रुपये देने को तैयार हो गया है। साथ ही पंजाब नेशनल बैंक से 7,800 करोड़ रुपये का ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने मीडिया को बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा और विजया बैंक की संधि के बाद इस एकीकृत इकाई से 2,000 करोड़ रुपये का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित हो गया है। इसके अलावा 1,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण पर भी विचार किया जा रहा है।

निश्चित रूप से ये परियोजनाएँ जनता के लिए लाभकारी होंगी। विकास की पहली सीढ़ी संयोजकता है। इन एक्सप्रेसवे के माध्यम से राज्य के सभी क्षेत्र राज्य की राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी से जुड़ पाएँगे। इन परियोजनाओं पर तत्परता से कार्यरत योगी सरकार को इसका लाभ मिलेगा या नहीं, यह जानने के लिए 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों की प्रतीक्षा करनी होगी।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।