भारती
पुणे मेट्रो के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं, 30 महीनों में ट्रायल का है रिकॉर्ड

जनवरी की शुरुआत में पुणे मेट्रो ने ट्रायल करके खुद को देश का सबसे तेज़ गति से निर्मित मेट्रो सिद्ध कर दिया। 30 महीनों के रिकॉर्ड समय में पुणे मेट्रो ने ट्रायल आयोजित करके दिखाए। पिंपरी में भूमि से ऊपरी स्तर (एलिवेटेड) पर 2.4 किलोमीटर लंबे भाग पर 10 जनवरी को ट्रायल किए गए।

महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महा-मेट्रो) के प्रबंध निदेशक व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने समय के अनुसार और सुव्यवस्थित कार्य को इस उपलब्धि का श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “यह संभव इसलिए हो पाया क्योंकि हमने नींव और स्तंभ का कार्य, ट्रैक बिछाना, विद्युत खंभे और केबल समय के अनुसार सुव्यवस्थित ढंग से किया।”

ट्रायल के लिए तीन कोच (डब्बे) नागपुर से मंगवाए गए थे और इन्हें संत तुकाराम नगर स्टेशन पर रखा गया था। इन कोचों का निर्माण चीन के सीआरआरसी कॉर्पोरेशन द्वारा किया गया है और शेष डिब्बों को 2020 के मध्य तक पुणे मेट्रो को सौंप दिया जाएगा।

2017 में शुरू हुई इस परियोजना को तीन भागों में पूरा किया जाएगा। पहले दो भाग महा-मेट्रो पूरा करेगा और तीसरा भाग पुणे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) द्वारा किया जाएगा।

पुणे वासियों के लिए अच्छी खबर यह है कि पुणे के मध्य क्षेत्र को पिंपरी और चिंचवड़ के बाहरी क्षेत्रों से जोड़ने वाले पहले दो चरणों को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन उससे भी अच्छी खबर यह है कि पहले और दूसरे चरण का कुल 12 किलोमीटर लंबा भाग मार्च 2020 तक ही पूरा करने की घोषणा केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की है।

पहले महा-मेट्रो ने घोषणा की थी कि दिसंबर 2019 तक पहली लाइन के पिंपरी से स्वारगेट के 7 किलोमीटर लंबे भाग और दूसरी लाइन पर वनाज़ से रामवाड़ी के बीच 5 किलोमीटर लंबे भाग पर मेट्रो क्रियान्वित कर दी जाएगी। लेकिन चुनावों के कारण इस कार्य में देरी हुई।

महा विकास अघाड़ी सरकार ने कई परियोजनाओं पर पुनर्विचार किया था और हाइपरलूप परियोजना को टाल भी दिया है, ऐसे में पुणे मेट्रो को सरकार का काफी सहयोग मिला है। शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कार्यभार संभालते ही परियोजना का निरीक्षण किया और उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार भी इसके विस्तार में रुचि लेते दिखे।

परियोजना की विस्तृत जानकारी

केंद्र और महाराष्ट्र सरकार इस परियोजना का आधा-आधा खर्च उठा रहे हैं व दो गलियारों के लिए अनुमानित लागत 11,420 करोड़ रुपये है- पूर्व-पश्चिम दिशा में चलने वाली लाइन 1 के लिए 7,628 करोड़ रुपये और उत्तर-दक्षिण दिशा में चलने वाली लाइन 2 के लिए 3,894 करोड़ रुपये। तीसरी लाइन पीपीपी मॉडल के आधार पर 8,313 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी।

16.6 किलोमीटर लंबी पीसीएससी (पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम)-स्वारगेट लाइन पर कुल 14 स्टेशन हैं जिनमें से नौ भूमि से ऊपरी स्तर पर और पाँच भूमिगत हैं। पहली लाइन पर महीने भर में संत तुकाराम नगर से फुगेवाड़ी के बीच चार मेट्रो संटेशनों वाला भाग संचालित किया जाएगा।

शिवाजी नगर से स्वारगेट के बीच का भाग भूमिगत होगा। इसके लिए आधे किलोमीटर से अधिक सुरंग खोदी जा चुकी है। कुल 5 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जानी है जिसके लिए दोनों ओर से दो-दो टनल बोरिंग मशीनें लगी हैं। औसत रूप से एक मशीन प्रतिदिन 8-10 मीटर लंबी सुरंग खोद सकती है।

पुणे मेट्रो के लिए खोदी गई सुरंग

इसके अलावा अजीत पवार ने स्वारगेट से कात्रज के बीच 5.5 किलोमीटर लंबे अतिरिक्त भूमिगत भाग की अनुमति भी दे दी है। इस मार्ग पर तीन स्टेशन होंगे। पीपीपी मॉडल के तहत बनने वाले इस भाग के लिए अतिरिक्त 4,203 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए गए हैं। स्वारगेट से हड़पसर गलियारे को भी स्वीकृति मिली।

दूसरी लाइन 14.7 किलोमीटर लंबी है व पूर्ण रूप से एलिवेटेड है। वनाज़ से रामवाड़ी के बीच कुल 16 स्टेशन होंगे। वनाज़ से सिविल कोर्ट वाले भाग की नींव का काम लगभग पूरा हो चुका है।

तीसरी लाइन पर शिवाजी नगर और हिंजेवाड़ी के बीच 23 स्टेशन होंगे। मार्च के अंत तक इस लाइन के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जावड़ेकर ने कहा है कि इसकी आधार शिला अगले महीने तक रख दी जाएगी व यह लाइन भी 2022 तक क्रियान्वित हो जाएगी।

तकनीकी और वित्तीय विशेषताएँ

पुणे मेट्रो देश की पहली मेट्रो होगी जिसमें एलुमिनियम से बने डब्बे होंगे। एलुमिनियम का बना होने के कारण इनका वज़न भी कम होगा। ये रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग व उन्नत संचार प्रणाली से लैस होंगे।

शुरुआत में चार डिब्बों वाली मेट्रो चलाई जाएगी और बाद में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे बढ़ाकर छह डिब्बों वाली कर दिया जाएगा। मेट्रो की सर्वाधिक गति क्षमता 90 किलोमीटर प्रति घंटा है लेकिन इसे अभी 31-33 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ही चलाया जाएगा।

एक डब्बे की क्षमता 900 यात्रियों को लेकर चलने की है। चार डिब्बों में से एक डिब्बा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। डब्बे पर बनने वाले चित्र सहयाद्री पर्वत श्रृंखला और पुणे शहर के इतिहास, परंपरा और उद्योग से मेल खाते होंगे।

स्टेशन पर आम मेट्रो स्टेशनों की तरह सीसीटीवी कैमरा, एस्कैलेटर, लिफ्ट आदि होंगे। किराया वसूलने के लिए स्वचालित व्यवस्था होगी। यात्री स्मार्ट कार्ड के अलावा कम्यूटरीकृत पेपर टिकट भी खरीद सकेंगे।

महा-मेट्रो दो गलियारों के कुल 30 स्टेशनों पर 1 करोड़ स्क्वायर फूट की व्यावसायिक जगह के साथ स्थाई संपत्ति कारोबार में उतरने की तैयारी में भी है। बृजेश दीक्षित का कहना है कि वे आधे से ज्यादा राजस्वा गैर-किराया माध्यमों से कमाएँगे।

यूरोपियन इन्वेस्टमेन्ट बैंक (ईआईबी) पुणे मेट्रो में 4,800 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए तैयार हो गई है। यह राशि तीन किश्तों में 0.35 प्रतिशत की ब्याज दर पर दी जाएगी। दो नई मेट्रो लाइनों के अलावा 102 मेट्रो डब्बों की खरीद के लिए यह सहायता राशि दी जा रही है।

इसके लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में फरवरी की शुरुआत में हुई बैठक में महा-मेट्रो और ईआईबी 1,600 करोड़ के पहले ऋण समझौते पर हस्ताक्षर भी कर लिए। पुणे के अलावा ईआईबी भोपाल, बेंगलुरु और लखनऊ मेट्रो का बी सहयोग कर रही है।

इस बैठक के बाद ईआईबी के उपाध्यक्ष एन्ड्र्यू मैकडॉवल ने कहा, “पुणे मेट्रो 30 लाख लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएगी। यह कार्यस्थलों, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाज़ारों तक लोगों की पहुँच को आसान और सस्ती बनाएगी। साथ ही पर्यावरण और वायु गुणवत्ता सुधारने में भूमिका निभाएगी।”

महा-मेट्रो ने फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (एफडीए), जो कि फ्रांस का सार्वजनिक वित्तीय संस्थान है, से भी बात की है। एफडीए इस परियोजना में 1,012 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है।

अभी तक इस परियोजना का लगभग 40 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।