भारती
अचल संपत्ति के मूल्य में होने हैं बड़े सुधार, जानें संभवानाएँ और प्रभाव

साल 2020 या वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी अचल संपत्ति को ऐसी परीक्षा से गुज़रना होगा जैसी पहले कभी नहीं हुई होगी। और इसका कारण है कोविड-19, एक ऐसी वैश्विक महामारी जिसके कारण सारी आर्थिक गतिविधियाँ थम गई हैं। जब लोग दैनिक आवश्यकताओं और रोज़गार के अवसरों की चिंता कर रहे हैं तो उच्च-मूल्य की संपत्ति का क्रय उनकी आखिरी प्राथमिकता होगी।

यह कुछ लोगों के लिए अच्छा समाचार है और कुछ लोगों के लिए बुरा। जिनके पास पहले से संपत्ति है उनके लिए उसे बेचने के दाम घट जाएँगे। संपार्श्विक मूल्य गिरने के कारण जिनके सिर पर बैंक का ऋण चुकाने के लिए ईएमआई का भार है, उनसे अधिक किश्त या एकमुश्त पूर्व भुगतान की माँग की जा सकती है।

जिन लोगों ने निर्माणाधीन संपत्तियों में निवेश किया है उन्हें विलंब झेलना पड़ेगा और यहाँ तक कि अचल संपत्ति विनियमन अधिनियम (रेरा) भी उनकी सहायता नहीं कर पाएगा। कारण कि विनियमकर्ता दलालों की याचिका पर उनके पक्ष में निर्णय सुनाएँगे क्योंकि कोविड-19 के कारण एक असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हुई है और संपत्तियों के सौंपने में देरी को स्वीकार किया जाना चहिए।

वहीं दूसरी ओर वे लोग जो संपत्ति खरीदना चाह रहे हैं, वे सोचेंगे कि गिरे हुए दामों के कारण 2020-21 में संपत्ति खरीदने का उत्तम अवसर है। निश्चित ही वर्तमान परिदृश्य में बनी बनाई संपत्ति खरीदना ही सर्वश्रेष्ठ होगा। नई परियोजनाओं में निवेश करना खतरों भरा होगा जब तक कि परियोजना संचालक पूर्ण रूप से वित्तपोषित नहीं है।

आइए कुछ विशेषज्ञों की राय जानते हैं-

रियल्टी कन्सल्टेन्सी लायसेस फोरास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज कपूर का कहना है कि सब तरफ संपत्ति के दामों में 10-20 प्रतिशत की गिरावट होगी और भूमि की कीमत 30 प्रतिशत तक गिरेगी।

वेबसाइट का मुखपृष्ठ

वहीं देश के सबसे बड़े बिल्डरों में से एक निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि लॉकडाउन और सामाजिक दूरी बनाए रकने की आवश्कता के कारण आवासीय संपत्तियों की बिक्री 70-80 प्रतिशत तक गिर गई है। उनका मानना है कि अगले कुछ माहों तक ग्राहकों का विश्वास पुनः स्थापित नहीं किया जा सकेगा।

अनारॉक प्रॉपर्टी कन्सलटेन्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का मानना है कि नई परियोजनाओं की शुरुआत में गिरावच के साथ-साथ आवासीय संपत्ति की बिक्री में भी इस वर्ष में 25-35 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिलेगी।

आवासीय संपत्तियों की माँग में गिरावट के साथ-साथ वर्क फ्रॉम होमे के विकसित हो रहे विकल्प के कारण कार्यालय स्थलों की भी माँग में गिरावट का अनुमान आईसीआईसीआई सेक्युरिटीज़ लिमिटेड ने लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया कि कोविड-19 के कारण वित्तीय वर्ष 2021-22 भारत के कार्यालय स्थलों को खतरा है। प्रभाव में देरी का कारण पहले से लीज़ की हुई और सौदे अवधि की समाप्ति है।

स्पष्ट रूप से आने वाली कुछ तिमाहियों में हम ऐसा क्रय बाज़ार देखेंगे जहाँ विक्रेता बड़ी छूट के साथ संपत्ति बेचने या तय करने के इच्छुक होंगे। निस्संदेह ही यह अचल संपत्ति और बैंकिंग क्षेत्र के लिए संकट खड़ा करने वाला है।

इन दोनों ही क्षेत्रों के लाभ में बड़ी गिरावट होगी और यहाँ तक कि वे घाटे में भी जा सकते हैं। अचल संपत्ति क्षेत्र का नुकसान छूटों या बिना बिकी हुई संपत्ति को रखने की लागत के रूप में हो सकता है। बैंकों को व्यावसायिक और खुदरा क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का भार उठाना होगा या ऋणधारकों को भुगतान के लिए अधिक समय देना होगा या दोनों।

क्रिसिल रेटिंग के वरिष्ठ निदेशक सचिन गुप्ता ने अर्थशोधन में अक्षम होने वालों के कारण अचल संपत्ति क्षेत्र की क्रेडिट रेटिंग गिरने की भी बात कही है। उनका कहना है कि अगर लॉकडाउन लंबा चलेगा तो नकद प्रवाह भी प्रभावित होगा और क्रेडिट रेटिंग की दृष्टि से अचल संपत्ति क्षेत्र पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ेगा। संस्था ने इस क्षेत्र को संकट की घड़ी में सबसे कम लचीले क्षेत्रों में से भी एक माना है।

लचीलेपन पर क्रिसिल रिपोर्ट

निर्माणधीन संपत्तियों के जो पहले से खरीददार हैं उनके लिए खतरा सबसे बड़ा है क्योंकि उन्होंने कोविड-19 के पहले वाले मूल्य को तय किया होगा जो अब काफी गिर जाएगा। साथ ही विलंब का शिकार भी ये ही लोग होंगे, भले ही उनके दलाल के पास वित्तीय व्यवस्था हो या वह घाटे में हो। यह भी हो सकता है कि कुछ बिल्डर परियोजना को पूरा ही न कर पाएँ।

दलालों के लिए चुनौती यह है कि संभावना होगी कि जिन लोगों ने थोड़े रुपये देकर संपत्ति आरक्षित की होगी अब वे गिरते मूल्यों को देखकर थोड़ा नुकसान झेलकर भी परियोजना को त्याग देंगे। वे इस नुकसान के बावजुद भी नए दामों पर कम कुल लागत में संपत्ति खरीदने के विकल्प की ओर जाना चाहेंगे।

हालाँकि दलालों और खरीददारों को सरकारी सहायता अवश्य मिलेगी लेकिन बहुत सारी समस्याओं का समाधान स्वयं इस क्षेत्र में ही निहित है। अगर वे नुकसान झेलने के लिए अभी तैयार हो जाते हैं तो अपने निवेशकों को छूट देकर और कीमतों को कम करके बाज़ार को शीघ्र पुनर्जीवित कर सकते हैं।

भारत में प्रायः देखा गया है कि अचल संपत्ति की वास्तविकता समय के साथ ही पता चलती है व तुरंत मूल्यों में गिरावट नहीं होती। समय सुधार का अर्थ है कि अचल संपत्ति का मूल्य तटस्थ हो जाता है जबकि आय और मुद्रास्फीति बढ़ती रहती है, इस प्रक्रिया में संपत्ति को खरीदने के लिए ग्राहक बेहतर स्थिति में आ जाता है।

लेकिन कोविड-19 के कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत की पारंपरिक स्थिति में परिवर्तन होगा व मूल्य और बिक्री में गिरावट होगी। इसमें सुधार की राह धीमी और कष्टदायक होगी।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि काफी समय से मंदी में चल रहे अचल संपत्ति क्षेत्र पिछले कुछ माहों से ही गति पकड़ रहा था लेकिन अब इस वैश्विक महामारी के कारण इसे फिर धक्का लगा है।

जेएलएल लिमिटेड का अनुमान है कि 31 मार्च तक बिना बिक्री हुई संपत्ति में फँसी पूंजी 3.7 ट्रिलियन रुपये तक है। माँग के फिर बढ़ने के कारण नई परियोजनाओं के विकास ने गति पकड़ी थी जिसके कारण बिक्री न हुई संपत्ति की संख्या बढ़ गई है।

ऐसे में यदि दलाल अपने मूल्यों पर टिके रहेंगे तो बाज़ार पुनर्जीवित नहीं होगा। दो बातों में से एक चुनना होगा। या तो मूल्यों में भारी कटौती करनी होगी या समय अपने अनुसार इसे सुधारेगा। ऐसे में समय सुधार के विषय में जैसा पहले बताया गया है कि बिक्री स्थगित हो जाएगी या गिर भी सकती है।